शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के खिलाफ देशभर में चल रहा शिक्षकों का प्रदर्शन अब दिल्ली पहुंचने की तैयारी में है। दरअसल, टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले देशभर के लाखों शिक्षक 4 अप्रैल 2026, शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा होकर अपनी आवाज उठाएंगे। फेडरेशन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को टीईटी की अनिवार्यता को लेकर जो फैसला सुनाया था उससे देशभर के करीब 20 लाख शिक्षक प्रभावित हुए हैं। फेडरेशन के मुताबिक, इन शिक्षकों पर इनका रोजगार खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है।
फेडरेशन की सरकार से क्या है मांग?
फेडरेशन ऑफ इंडिया का दिल्ली में होने वाला यह प्रदर्शन न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है बल्कि इस प्रदर्शन के जरिए उनकी सरकार से भी यह मांग है कि भारत सरकार एक कानून बनाकर उच्चतम न्यायालय के इस आदेश को प्रभावी होने से रोक सकती है। फेडरेशन का कहना है कि अगर भारत सरकार एक कानून बनाकर कोर्ट के इस आदेश का प्रभाव खत्म कर देती हो तो इससे देशभर के लगभग 20 लाख शिक्षकों के साथ न्याय होगा।
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कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 6 महीने पहले दिए अपने उस आदेश में टी.ई.टी. (TET) परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया था। उच्चतम न्यायालय ने देशभर के शिक्षकों को शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत टी.ई.टी. (TET) की अनिवार्यता को लागू कर दिया था। कोर्ट के इस फैसले के अनुसार, अगर कोई शिक्षक 2 साल के अंदर यानी 1 सितम्बर 2027 तक टी.ई.टी. पास नहीं करता है तो उसे हर साल अतिरिक्त वेतनवृद्धि नहीं मिलेगी और नौकरी से भी निकाल दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले कितने नाखुश हैं शिक्षक?
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद से देशभर के अलग-अलग राज्यों में कई महीनों से प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन अब यह प्रदर्शन राज्यों से निकलकर दिल्ली पहुंच रहा है। कोर्ट के फैसले से प्रभावित होने वाले शिक्षक न्याय की मांग कर रहे हैं। इस फैसले से प्रभावित होने वाले कुछ शिक्षकों से जनसत्ता ने बात की। उनकी प्रतिक्रिया इस प्रकार है:-
>> वाराणसी के प्राइमरी टीचर (जो 16 साल से नौकरी कर रहे हैं और उनकी नियुक्ति 2009 में हुई थी) ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 23 अगस्त 2010 को यह कहा था कि अब आगे से जो शिक्षकों की भर्ती होगी उसके लिए टीईटी अनिवार्य होगा। अब सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला है उसमें NCTE के आदेश से पहले वाले शिक्षकों की नियुक्ति पर भी इस फैसले को लागू कर दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि इस आदेश से प्रभावित होने वाले ऐसे शिक्षकों को भी वह जानते हैं जो पिछले 25-30 साल से पढ़ा रहे हैं और उन्हें कई मेडल और अवॉर्ड भी मिल चुके हैं अब उनकी भी नौकरी खतरे में है। शिक्षक ने कहा कि आप हमारे अंदर टीचिंग स्किल का टेस्ट लीजिए उससे जुड़ी अनिवार्यता को लागू कीजिए तो बात समझ आती है, लेकिन आप हमारी नॉलेज स्किल चेक करने से कैसे तय कर पाएंगे कि हम सही पढ़ा रहे हैं या नहीं?
>> इसी तरह गाजियाबाद की एक शिक्षिका ने हमसे बातचीत में कहा है कि 20 साल की जॉब करने के बाद टीचर के लिए टीईटी पास करने के लिए कहा जाना बिल्कुल अव्यवहारिक है, जब हमारी नियुक्ति हुई तब टीईटी अनिवार्य नहीं था। जो टीचर 20 से नौकरी कर रहा है वह बच्चों को पढ़ाने के लिए पहले ही एलिजिबल है, टीचर कभी नाराज नहीं होता वह शांति से अपना काम करता है।
>> अलीगढ़ में एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने शिक्षिका ने बताया है कि वह टीईटी पास करने के बाद शिक्षक बनी हैं, लेकिन फिर भी कोर्ट के इस फैसले से नाखुश हैं क्योंकि पुराने शिक्षक जो सालों से नौकरी कर रहे हैं उनके साथ यह नाइंसाफी है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा है कि आप विभागीय तौर पर उन शिक्षकों की पात्रता के लिए कुछ कर सकते हैं, लेकिन टीईटी अनिवार्य कर देना अव्यवहारिक है।
केंद्र सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दिलाए राहत- TFI
शिक्षकों का कहना है कि जब 27 जुलाई 2011 को टीईटी लागू की गई तो उससे पूर्व भर्ती हुए अध्यापकों पर इसे क्यों थोपा जा रहा है। यह शिक्षकों के साथ अन्याय है। TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा का कहना है कि यूपी के 1.86 लाख शिक्षक ऐसे हैं, जिन्हें टीईटी पास करना होगा। केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राहत दिलाने के लिए कुछ करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को जानिए
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को जारी आदेश में कहा था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य होगा। जो शिक्षक पहले से नौकरी कर रहे हैं और जिनके पास 5 साल से ज्यादा की सर्विस बची हुई है उन्हें टीईटी पास करना होगा। यह फैसला उन शिक्षकों पर लागू होगा जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई है। जिन शिक्षकों की सर्विस 5 साल से कम बची है उन्हें इससे छूट मिलेगी, लेकिन उन्हें प्रमोशन नहीं मिलेगा।
