Teachers Day 2026: भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के महान दार्शनिक, शिक्षाविद और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार, उनका जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
डॉ. राधाकृष्णन का शिक्षा को लेकर नजरिया केवल किताबों, परीक्षाओं और डिग्री तक सीमित नहीं था। वे शिक्षा को ऐसे माध्यम के रूप में देखते थे, जो व्यक्ति में सोचने की क्षमता, मानवीय मूल्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारी विकसित करे। शिक्षक दिवस के मौके पर छात्रों के लिए उनकी कही और उनसे जुड़ी प्रमुख शिक्षाओं को समझना आज भी बेहद उपयोगी है।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की छात्रों के लिए 7 बड़ी शिक्षाएं
शिक्षा का लक्ष्य सिर्फ नौकरी नहीं, बेहतर समाज बनाना है
डॉ. राधाकृष्णन की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षाओं में से एक यह विचार है कि शिक्षा का उद्देश्य उस समाज का निर्माण करना होना चाहिए, जैसा समाज हम चाहते हैं। उनके विचारों को उद्धृत करते हुए भारत सरकार के आधिकारिक स्रोत में कहा गया है कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो मानव गरिमा और समानता पर आधारित आधुनिक लोकतांत्रिक समाज के निर्माण में मदद करे।
छात्रों के लिए इससे सीख मिलती है कि, अच्छे अंक और अच्छी नौकरी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन शिक्षा का असली उद्देश्य एक जिम्मेदार, संवेदनशील और समझदार नागरिक बनना भी है।
सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, सोचने की क्षमता विकसित करें
राधाकृष्णन शिक्षा को व्यक्ति के बौद्धिक विकास से जोड़ते थे। उनके विचारों से यह संदेश मिलता है कि विद्यार्थी को केवल उत्तर याद करने के बजाय सवाल पूछने और चीजों को समझने की आदत विकसित करनी चाहिए। इसलिए किसी विषय को रटने के बजाय यह समझने की कोशिश करें कि वह क्यों महत्वपूर्ण है, उसका वास्तविक जीवन में क्या उपयोग है और उसके अलग-अलग पहलू क्या हैं।
शिक्षा इंसान को जोखिम उठाने और चुनौतियों का सामना करना सिखाए
राधाकृष्णन के एक विश्वविद्यालय दीक्षांत भाषण से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड में उनका यह विचार दर्ज है कि शिक्षा व्यक्ति में जीने, प्रेम करने, जोखिम उठाने और कठिनाइयों का सामना करने का साहस पैदा करे तथा सभ्य समाज के निर्माण में योगदान दे। इसलिए असफलता से डरकर अवसर छोड़ देना सफलता का रास्ता नहीं है। नई चीज सीखना, गलती करना और उससे आगे बढ़ना विद्यार्थी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शिक्षक केवल पढ़ाने वाला नहीं, मार्गदर्शक भी होता है
राधाकृष्णन के शिक्षा-दर्शन में शिक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। शिक्षक का काम सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सही सोच और बेहतर मूल्यों का विकास करना भी है।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने शिक्षक दिवस के एक संबोधन में राधाकृष्णन के विचारों को याद करते हुए कहा था कि शिक्षक देश के सर्वश्रेष्ठ मस्तिष्कों में होने चाहिए और विद्यार्थियों का स्नेह व सम्मान अर्जित करना चाहिए। छात्रों को चाहिए कि वह, शिक्षक से केवल परीक्षा के सवालों के उत्तर न मांगें। उनके अनुभव, सोच और सलाह से सीखने की कोशिश करें।
ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों को भी महत्व दें
राधाकृष्णन का शिक्षा-दर्शन ज्ञान और मानवीय मूल्यों को एक-दूसरे से अलग नहीं करता था। उनके विचारों में मानव गरिमा, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को विशेष महत्व मिलता है। छात्रों को समझना होगा कि बुद्धिमान होना अच्छी बात है, लेकिन ज्ञान का इस्तेमाल दूसरों का सम्मान करने, समाज के लिए काम करने और सही निर्णय लेने में करना उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।
शिक्षा का अंतिम उद्देश्य जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है
राधाकृष्णन के विचारों में शिक्षा और राष्ट्र निर्माण का गहरा संबंध दिखाई देता है। उनके अनुसार शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो समाज के मूल्यों को मजबूत करे और लोकतांत्रिक आदर्शों को वास्तविक जीवन में उतारने में मदद करे। एक विद्यार्थी की जिम्मेदारी केवल अपने करियर तक सीमित नहीं होती। देश, समाज, पर्यावरण और आसपास के लोगों के प्रति जिम्मेदारी समझना भी शिक्षा का हिस्सा है।
बड़ा सपना देखें, लेकिन उसे मूल्यों से जोड़कर पूरा करें
राधाकृष्णन की शिक्षा संबंधी सोच विद्यार्थी को सिर्फ करियर की दौड़ का हिस्सा नहीं बनाती, बल्कि उसे एक बेहतर मनुष्य और समाज के निर्माण से जोड़ती है। उनकी शिक्षाओं का व्यापक संदेश यही है कि ज्ञान का इस्तेमाल व्यक्ति के विकास के साथ-साथ समाज के विकास के लिए भी होना चाहिए। इसलिए आप डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वैज्ञानिक, अधिकारी, उद्यमी या किसी भी क्षेत्र में जाएं, लेकिन अपने ज्ञान और सफलता को समाज के लिए उपयोगी बनाने की कोशिश करें।
शिक्षक दिवस पर क्यों याद किए जाते हैं डॉ. राधाकृष्णन?
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के प्रमुख दार्शनिक, शिक्षाविद और विद्वान थे। वे देश के दूसरे राष्ट्रपति भी रहे। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उनका निधन 17 अप्रैल 1975 को हुआ और उनकी जयंती 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जाती है।
इस दिन स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में शिक्षक अपने विद्यार्थियों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं। राधाकृष्णन की शिक्षा-दृष्टि इसी व्यापक विचार को सामने रखती है कि शिक्षा व्यक्ति के भीतर ज्ञान के साथ विवेक और मानवीय संवेदना भी पैदा करे।
