शिक्षकों का सही मार्गदर्शन और ज्ञान किसी समाज व राष्ट्र के निर्माण की असली नींव होता है। 5 सितंबर 2026 को मनाए जा रहे शिक्षक दिवस के अवसर पर, देश-दुनिया की 6 ऐसी महान हस्तियों के अनमोल विचार पढ़ें जिन्होंने शिक्षा, चरित्र निर्माण और जीवन के मूल्यों को एक नई दिशा दी। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से लेकर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तक के ये कथन आज भी हर छात्र के लिए प्रेरणादायी हैं।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन: “सच्चे शिक्षक वे हैं जो हमें स्वयं के लिए सोचने में मदद करते हैं।”

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम: “अगर किसी देश को भ्रष्टाचार मुक्त और सुंदर विचारों वाला बनाना है, तो समाज के तीन लोग यह बदलाव ला सकते हैं—पिता, माता और शिक्षक।”

चाणक्य: “शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद में खेलते हैं।”

स्वामी विवेकानंद: “शिक्षा केवल जानकारी देना नहीं है, बल्कि व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करना और उसे आत्मनिर्भर बनाना है।”

रवींद्रनाथ टैगोर: “एक शिक्षक तब तक वास्तव में सिखा नहीं सकता, जब तक कि वह स्वयं सीख न रहा हो।”

महात्मा गांधी: “सच्ची शिक्षा वह है जो बच्चे के भीतर छिपी सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं और गुणों को बाहर लाए।”

अल्बर्ट आइंस्टीन: “रचनात्मक अभिव्यक्ति और ज्ञान में आनंद जगाना ही एक शिक्षक की सर्वोच्च कला है।”

अरस्तू: “बच्चों को शिक्षित करने वाले माता-पिता से भी अधिक सम्मान के पात्र हैं, क्योंकि माता-पिता ने केवल जीवन दिया है, जबकि शिक्षकों ने अच्छे से जीने की कला सिखाई है।”

नेल्सन मंडेला: “शिक्षा वह सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं।”

बेंजामिन फ्रैंकलिन: “मुझे बताओ और मैं भूल जाऊँगा, मुझे सिखाओ और मैं याद रखूँगा, मुझे शामिल करो और मैं सीख जाऊँगा।”

शिक्षक दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि अपने गुरुओं के प्रति आभार व्यक्त करने और उनकी दी गई सीख को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेने का दिन है।