तमिलनाडु सरकार ने उच्च शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों के लिए एजुकेशन लोन की सुविधा को और मजबूत करने का फैसला किया है। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री के. विश्वनाथन ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण कोई भी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा ऋण की उपलब्धता का दायरा लगातार बढ़ा रही है ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।

7.5 लाख रुपये तक बिना गारंटी मिलेगा एजुकेशन लोन

मंत्री के अनुसार, मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व में सरकार ने ऐसा व्यापक ढांचा तैयार किया है जिसके तहत छात्रों को 7.5 लाख रुपये तक बिना किसी कॉलेट्रल या गारंटी के शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल आर्थिक तंगी की वजह से किसी भी छात्र की उच्च शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

UPA सरकार की शिक्षा ऋण नीति का भी किया जिक्र

के. विश्वनाथन ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार (2004-2014) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान छात्रों को शिक्षा ऋण उदारता से उपलब्ध कराया जाता था और अब तमिलनाडु सरकार भी उसी सोच के साथ छात्रों को अधिक से अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।

उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने पर सरकार का जोर

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल लोन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा तक सभी छात्रों की समान पहुंच सुनिश्चित करना है। इसके लिए बैंकिंग व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के माध्यम से शिक्षा ऋण की प्रक्रिया को अधिक सरल और सुलभ बनाया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी प्रतिभाशाली छात्र की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए और इसी उद्देश्य से शिक्षा ऋण योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है।