देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने एनसीईआरटी की क्लास 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में जोड़े गए ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ सेक्शन पर गंभीर चिंता जताई है। इस मामले पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी को भी न्यायपालिका जैसी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे और जरूरत पड़ी तो अदालत स्वयं कार्रवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा उठाया गया है, जिसमें इस विषय पर कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया है।

क्या है पूरा मामला?

यह ताजा विवाद नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) द्वारा सोमवार 23 फरवरी को जारी की गई कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से जुड़ा है, जिसके एक अध्याय में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ के अंतर्गत ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ नाम से अलग सेक्शन जोड़ा गया है। इस मामले को कोर्ट के समक्ष उठाते हुए आपत्ति जताई गई है कि स्कूली छात्रों को इस तरह की सामग्री के पढ़ाए जाने से न्यायपालिकी की छवि प्रभावित हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

एनसीईआरटी की नई किताब के खिलाब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वे इस बात से विचलित हैं कि बच्चों को इस प्रकार की सामग्री पढ़ाई जा रही है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया जाए।

कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी की दलील के बाद सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि वह पहले से ही इस मामले से अवगत हो गए हैं और इस संबंध में उनको कई कॉल और मैसेज भी प्राप्त हुए हैं।

सीजेआई ने अपने संबोधन में कहा, “मैं किसी को भी इस संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। मुझे पता है कि इससे कैसे निपटना है। कानून अपना काम करेगा।”

‘सुनियोजित प्रयास’ की आशंका

मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित और सोची-समझी कोशिश प्रतीत होती है। उन्होंने मुद्दा उनके संज्ञान में लाने के लिए सिब्बल और सिंघवी का आभार भी व्यक्त किया।

आगे क्या हो सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में उचित कदम उठाए जाएंगे। यदि अदालत औपचारिक रूप से स्वतः संज्ञान लेती है, तो NCERT से जवाब तलब किया जा सकता है और संबंधित सामग्री की समीक्षा का आदेश भी दिया जा सकता है। यह मामला शिक्षा व्यवस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा जैसे अहम सवालों को भी सामने लाता है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी है।