सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे सवालों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से छात्रों को परेशानी होने की आशंका है और इस संबंध में केंद्र सरकार से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहन भी शामिल थे, ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में कुछ ऐसी समस्याएं दिखाई दे रही हैं, जिनकी गहराई से जांच की आवश्यकता है।

छात्रों की परेशानी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर छात्रों में काफी निराशा और असंतोष देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अदालत के सामने आए तथ्यों से यह प्रतीत होता है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कुछ “धीरे-धीरे उभरती समस्याएं” हैं, जिनकी जांच जरूरी है।

वहीं, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि, अदालत इस मामले में किसी टकराव की स्थिति नहीं बना रही है, बल्कि केंद्र सरकार की सहायता से पूरी व्यवस्था को समझना चाहती है।

केंद्र सरकार से मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मामले में सहायता करने को कहा और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कथित कमियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे। इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

क्या है पूरा मामला?

यह जनहित याचिका राकेश बिंजोला ने अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मटदान शुक्ला के माध्यम से दायर की है। इस याचिका में मांग की गई है कि सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की निगरानी और सुधार के लिए एक हाई पावर कमेटी का गठन किया जाए। साथ ही केंद्र सरकार और सीबीएसई को डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए स्पष्ट और व्यापक नियम बनाने के निर्देश दिए जाएं।

क्या है CBSE On-Screen Marking सिस्टम?

सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में परीक्षक छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी को कंप्यूटर पर जांचते हैं। यानी उत्तर पुस्तिकाओं की फिजिकल कॉपी की जगह डिजिटल इमेज के माध्यम से मूल्यांकन किया जाता है।

इस प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और मानकीकृत बनाना था। हालांकि याचिका में आरोप लगाया गया है कि डिजिटल मूल्यांकन की कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत खामियों के कारण छात्रों के अंक प्रभावित हो सकते हैं।

छात्रों के लिए क्या राहत मांगी गई?

याचिका में अदालत से अंतरिम राहत देने की भी मांग की गई है, जिसमें प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं।

कथित रूप से प्रभावित छात्रों को न्यूनतम उत्तीर्ण अंक में छूट दी जाए।

जिन छात्रों को प्रोविजनल एडमिशन मिल चुका है या जिन्होंने प्रवेश परीक्षाएं पास कर ली हैं, उनकी पात्रता सुरक्षित रखी जाए।

जिन संस्थानों में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक की अनिवार्यता है, वहां प्रभावित छात्रों को अस्थायी छूट दी जाए।

यदि मूल्यांकन में गड़बड़ी साबित होती है तो छात्रों का शैक्षणिक नुकसान नहीं होना चाहिए।

केंद्र सरकार ने क्या कहा?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि याचिका में उठाई गई कई व्यक्तिगत शिकायतों का समाधान पहले ही किया जा चुका है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया है, जो ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की समीक्षा कर रहा है। आयोग छात्रों की शिकायतों का अध्ययन कर आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगा।

अगले सप्ताह होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीबीएसई को निर्देश दिया है कि वे ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में सुधार के लिए उठाए गए कदमों का पूरा विवरण अदालत के समक्ष रखें। अब इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होगी, जहां सरकार की रिपोर्ट और आयोग की प्रगति पर विचार किया जाएगा।