सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सीबीएसई की उस नई भाषा नीति पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके तहत कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है, जिनमें कम से कम दो भारतीय/क्षेत्रीय भाषाएं शामिल होंगी।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्र सरकार, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और NCERT को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

15-16 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल थे, ने मामले की अगली सुनवाई 15 और 16 जुलाई को तय की है।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की थी कि 1 जुलाई से लागू होने वाली इस नई नीति पर तत्काल रोक लगाई जाए, लेकिन अदालत ने फिलहाल ऐसा कोई अंतरिम निर्देश देने से इनकार कर दिया।

क्या है CBSE की नई भाषा नीति?

सीबीएसई द्वारा जारी हालिया सर्कुलर के अनुसार, 1 जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी और इनमें से कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाएं होना जरूरी होगा। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप लागू की जा रही है।

याचिकाकर्ताओं की क्या है आपत्ति?

याचिकाओं में कहा गया है कि यह नीति छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव बढ़ा सकती है और गैर-हिंदी भाषी राज्यों में व्यावहारिक चुनौतियां पैदा कर सकती है। इसके साथ ही यह छात्रों और अभिभावकों की भाषाई पसंद की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि इस नीति की संवैधानिक वैधता की समीक्षा की जाए।

NEP 2020 से जुड़ा है फैसला

CBSE की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रस्तावित तीन-भाषा फॉर्मूला का हिस्सा है। इसका उद्देश्य छात्रों को भारतीय भाषाओं से जोड़ना और मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना बताया गया है।

आगे क्या?

अब सीबीएसई, केंद्र सरकार और एनसीईआरटी को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद जुलाई में होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि इस नीति पर आगे क्या रुख अपनाया जाए।