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UPTET: सुप्रीम कोर्ट ने एक लाख से ज्यादा शिक्षकों को दी बड़ी राहत, यूं पलटा हाईकोर्ट का फैसला

UPTET Supreme Court relief: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों का टीईटी रिजल्ट पहले आया और बीएड या बीटीसी का रिजल्ट बाद में आया उनका टीईटी प्रमाण पत्र वैध नहीं माना जाएगा।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

UPTET Supreme Court relief: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 जुलाई 2019) को हाईकोर्ट के एक आदेश को पलटकर उत्तर प्रदेश के करीब एक लाख से ज्यादा शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने 30 मई 2018 को टीईटी मामले पर फैसला सुनाते हुए 2012 से 2018 के बीच की भर्ती के लिए नियुक्ती पत्र जारी किया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों का टीईटी रिजल्ट पहले आया और बीएड या बीटीसी का रिजल्ट बाद में आया उनका टीईटी प्रमाण पत्र वैध नहीं माना जाएगा। इस फैसले के बाद करीब 50,000 से ज्यादा सहायक शिक्षकों की नौकरी जाने की संभावना बहुत बढ़ गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद के इस फैसले को निरस्त करते हुए सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत दी है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मई 2018 को दिए गए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करने से 72,825 ट्रेनी टीचर, 12,460 प्राइमरी लेवल असिस्टेंट टीचर,  29,334 अपर प्राइमरी लेवल के साइंस और मैथ्स टीचर्स की भर्ती में चयनित शिक्षक प्रभावित हो रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पलटते हुए कहा कि, यह फैसला 2011 और उसके बाद उत्तर प्रदेश में हुए सभी टीईटी परीक्षाओं और नियुक्तियों पर लागू होता है।

इसके बाद प्रभावित शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। चयनित शिक्षकों का कहना था कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) के लिए 4 अक्टूबर 2011 और 15 मई 2013 को जारी शासनादेश में इस बात का जिक्र नहीं था कि जिनके प्रशिक्षण का परिणाम टीईटी के बाद आएगा उन्हें टीईटी का प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा। हालांकि इस मसले पर अब तक सरकार ने अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।

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