Shankh Mitra Success Story: सफलता की कहानी हमेशा आईआईटी, आईआईएम या किसी बड़े विदेशी संस्थान से शुरू हो, यह जरूरी नहीं है। कोलकाता की जादवपुर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग करने वाले शंख मित्रा (Shankh Mitra) ने अपनी मेहनत, लगन और लगातार सीखने की चाहत के दम पर ग्लोबल कॉरपोरेट जगत में ऐसी पहचान बनाई है, जिसने उन्हें दुनिया के सबसे ज्यादा भुगतान पाने वाले सीईओ की लिस्ट में पहुंचा दिया।
2025 की एक वैश्विक सीईओ वेतन रैंकिंग के मुताबिक, अमेरिका की हेल्थकेयर रियल एस्टेट कंपनी वेलटावर के सीईओ शंख मित्रा को करीब 821 मिलियन डॉलर यानी लगभग 7,000 करोड़ रुपये का कंपनसेशन पैकेज मिला। इस सूची में वह टेस्ला सीईओ एलन मस्क के बाद दूसरे स्थान पर रहे। हालांकि, यह रकम उनकी सामान्य सालाना सैलरी नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनसेशन का बड़ा हिस्सा शेयर अवॉर्ड और लंबी अवधि के इंसेंटिव से जुड़ा है।
Jadavpur University से शुरू हुई कहानी
शंख मित्रा की कहानी उन युवाओं के लिए खास है जो मानते हैं कि बड़ी सफलता के लिए आईआईटी या एनआईटी से पढ़ना जरूरी है। उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी से इंस्ट्रूमेंटेशन और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
यहीं से उनके करियर की नींव तैयार हुई। इसके बाद उन्होंने अमेरिका का रुख किया और कोलंबिया बिजनेस स्कूल से MBA किया। वेलटावर के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनकी शिक्षा जादवपुर विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग और कोलंबिया बिजनेस स्कूल से एमबीए के रूप में दर्ज है।
यह सफर बताता है कि प्रतिष्ठित संस्थान का नाम महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन करियर की ऊंचाई तय करने में कौशल, मेहनत, सही फैसले और लगातार सीखना भी उतना ही मायने रखता है।
इंजीनियरिंग के बाद बदली करियर की दिशा
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद शंख मित्रा ने अपने करियर को सिर्फ तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने फाइनेंस और निवेश की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद सिटाडेल इन्वेस्टमेंट ग्रुप और मिलेनियम मैनेजमेंट जैसी बड़ी फाइनेंशियल प्रोसेस में काम किया।
इन प्रोसेस में काम करते हुए उन्होंने निवेश, फाइनेंशियल एनालिसिस और रिस्क मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में इन्वेस्टिगेट विकसित किए और यही अनुभव आगे चलकर उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत बना।
दो साल में बने CIO
शंख मित्रा ने 2016 में वेलटॉवर जॉइन किया। शुरुआत में उन्होंने फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट से जुड़े वरिष्ठ पद पर काम किया। उनकी क्षमता और प्रदर्शन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज करीब दो साल बाद 2018 में उन्हें वेलटावर का चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) बना दिया गया।
कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंने अगस्त 2018 से जनवरी 2023 तक CIO की जिम्मेदारी संभाली और यह उनके करियर का वह पड़ाव था जहां उनकी मेहनत और वित्तीय विशेषज्ञता को बड़ी जिम्मेदारी में बदला गया।
2020 में बने CEO
करियर की रफ्तार यहीं नहीं रुकी और अक्टूबर 2020 में शंख मित्रा वेलटावर के सीईओ बने। इसके साथ ही वह कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्य भी हैं। वेलटावर अमेरिका की प्रमुख हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट में से एक है। कंपनी सीनियर हाउसिंग, हेल्थकेयर और वेलनेस से जुड़ी संपत्तियों में निवेश करती है।
सफलता का राज सिर्फ बड़ी डिग्री नहीं
शंख मित्रा की कहानी को अगर करीब से देखें तो इसमें एक बात लगातार दिखाई देती है कि, उन्होंने अपनी पहली डिग्री को अपनी अंतिम सीमा नहीं बनने दिया। जादवपुर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने कोलंबिया बिजनेस स्कूल से एमबीए किया। इसके बाद अलग-अलग वित्तीय संस्थानों में काम करके अपने अनुभव को लगातार मजबूत किया। यानी उन्होंने एक क्षेत्र में शिक्षा हासिल करने के बाद दूसरे क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता विकसित की और फिर दोनों को मिलाकर करियर बनाया।
हर पड़ाव ने बनाया मजबूत
सफलता अचानक नहीं मिलती और इसी तथ्य के तहत शंख मित्रा का करियर भी कई चरणों से होकर गुजरा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई, विदेश में एमबीए, वित्तीय क्षेत्र में शुरुआती नौकरी, बड़े निवेश संस्थानों का अनुभव और फिर वेलटावर में तेजी से बढ़ती जिम्मेदारियां और हर पड़ाव ने उन्हें अगले स्तर के लिए तैयार किया।
फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स, सिटाडेल और मिलेनियम मैनेजमेंट जैसे संस्थानों में काम करने का अनुभव उनके लिए एक तरह की प्रोफेशनल ट्रेनिंग रहा। इसके बाद वेलटावर में उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल बड़े निवेश और कारोबारी फैसलों में किया।
Elon Musk के बाद दूसरे नंबर पर क्यों आए?
2025 की सीईओ कंपनसेशन रैंकिंग में शंख मित्रा का नाम तब सुर्खियों में आया जब उनकी कुल कंपनसेशन करीब 821 मिलियन डॉलर आंकी गई है। यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है कि, यह रकम उनकी बैंक खाते में मिलने वाली साधारण “सैलरी” नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार कंपनसेशन का बड़ा हिस्सा स्टॉक अवार्ड और लॉन्ग टर्म इनसेंटिव्स से जुड़ा था। इसलिए इसे “एक साल की सैलरी” कहना सही नहीं होगा। यानी उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा कंपनी के प्रदर्शन और शेयर आधारित पुरस्कारों से जुड़ा है।
युवाओं के लिए कहानी में क्या सीख है?
शंख मित्रा की सफलता की कहानी सिर्फ करोड़ों रुपये के कंपनसेशन की कहानी नहीं है। इसमें उन छात्रों और युवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण सबक हैं जो अपने करियर को लेकर असमंजस में रहते हैं। कोलकाता की जाधवपुर यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ उनका सफर अमेरिका के कॉरपोरेट जगत के शीर्ष तक पहुंचा। यह दिखाता है कि सही कौशल और मेहनत के साथ भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
Shankh Mitra Career Timeline
| साल | करियर पड़ाव |
| इंजीनियरिंग | जादवपुर विश्वविद्यालय से इंस्ट्रुमेंटेशन और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग |
| एमबीए | कोलंबिया बिजनेस स्कूल |
| 2009-2012 | फिडेलिटी निवेश |
| 2012-2013 | सिटाडेल इन्वेस्टमेंट ग्रुप |
| 2013-2015 | मिलेनियम प्रबंधन |
| 2016 | वेलटावर से जुड़े |
| 2018 | वेलटावर के मुख्य निवेश अधिकारी बने |
| 2020 | वेलटावर के सीईओ बने |
| 2025 | करीब 821 मिलियन कंपनसेशन पैकेज के साथ दुनिया के शीर्ष भुगतान वाले सीईओ दूसरे स्थान पर |
करियर टाइमलाइन के प्रमुख पदों और संस्थानों की पुष्टि वेलटावर के आधिकारिक रिकॉर्ड से होती है।
करोड़ों की कमाई से ज्यादा बड़ी है यह सफलता की कहानी
शंख मित्रा की कहानी को सिर्फ 7,000 करोड़ रुपये के कंपनसेशन पैकेज के नजरिए से देखना अधूरा होगा। असली कहानी उस सफर की है जो जाधवपुर यूनिवर्सिटी की इंजीनियरिंग पढ़ाई से शुरू हुआ और अमेरिका के बड़े वित्तीय संस्थानों से होते हुए वेलटावर के सीईओ पद तक पहुंचा।
उनकी कहानी उन छात्रों के लिए खास संदेश देती है जो अपने कॉलेज या शुरुआती करियर को लेकर खुद को दूसरों से कम आंकते हैं। सफलता की दौड़ में शुरुआत कहां से हुई, उससे ज्यादा मायने यह रखता है कि आप रास्ते में कितना सीखते हैं और लगातार खुद को कितना बेहतर बनाते हैं।
