Pushpak Pujari Success Story: जिंदगी में मुश्किलें कई बार रास्ता रोकने की कोशिश करती हैं लेकिन कुछ लोग इन्हीं मुश्किलों को अपनी ताकत बना लेते हैं। पुष्पक पुजारी की कहानी भी ऐसे ही संघर्ष, साहस और सफलता से भरी हुई है। कम उम्र में पिता को खोने के बाद उन्होंने पढ़ाई का रास्ता नहीं छोड़ा। मां उनके साथ रात 2-3 बजे तक जागती रहीं और बेटे के सपने को पूरा करने में साथ देती रहीं। पुष्पक आज आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई की और सोनी जापान और अमेजन में काम करने करने के बाद व्हार्टन से एमबीए और वेरकाडा में उत्पाद निदेशक की भूमिका के बाद पुष्पक अपना एआई स्टार्टअप
कम उम्र में पिता को खोया, लेकिन हौसला नहीं टूटा
पुष्पक पुजारी के लिए पढ़ाई का सफर आसान नहीं था। जब वह स्कूल में थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारियों और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना चुनौती थी।
उन्होंने कोटा जाकर पढ़ाई करने के बजाय घर से ही आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया। इस दौरान उनकी मां सबसे बड़ी ताकत बनीं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुष्पक जब देर रात तक पढ़ते थे तो उनकी मां भी उनके साथ जागती रहती थीं। कई बार वह पढ़ाई की मेज के पास ही सो जाती थीं और पुष्पक सुबह तक पढ़ाई करते रहते थे। यह सिर्फ एक परीक्षा की तैयारी नहीं थी, बल्कि मां-बेटे के साझा सपने को पूरा करने की कोशिश थी।
पहली कोशिश में AIR 2790, दूसरी बार रैंक 183
पुष्पक ने जेईई की पहली कोशिश में AIR 2,790 हासिल की लेकिन उन्होंने इसे अंतिम परिणाम नहीं माना। उन्होंने दोबारा तैयारी की और दूसरी कोशिश में अपनी रैंक को काफी बेहतर करते हुए AIR 183 हासिल की।
इसके बाद उनका दाखिला आईआईटी दिल्ली में हुआ, जहां उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। आईआईटी दिल्ली की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक संस्थान के पूर्व छात्र दुनियाभर में टेक्नोलॉजी, उद्यमिता और अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
आईआईटी दिल्ली से जापान पहुंचे पुष्पक
आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई पूरी करने के बाद पुष्पक ने अपने करियर की शुरुआत सोनी जापान से की, जहां उन्होंने करीब चार साल काम किया और कैमरा टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोडक्ट्स पर काम किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान में वह अपनी टीम में इकलौते गैर-जापानी कर्मचारी थे और काम के लिए जापानी भाषा भी सीखी।
अमेजन में बनाए AI और टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स
सोनी के बाद पुष्पक ने करीब चार साल अमेजन में काम किया। यहां उन्होंने एलेक्सा और एडब्ल्यूएस से जुड़े प्रोडक्ट्स पर काम किया। उनके प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने एलेक्सा के लिए प्राइवेसी फोकस्ड मशीन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स और एडब्ल्यूएस में आईओटी ऑटोमिशन से जुड़ा नो कोड प्लेटफॉर्म बनाने में भूमिका निभाई।
व्हार्टन से एमबीए, फिर वेरकाडा में प्रोडक्ट डायरेक्टर
करियर में आगे बढ़ने के लिए पुष्पक अमेरिका गए और व्हार्टन स्कूल से एमबीए किया। इसके बाद उन्होंने वेरकाडा में डायरेक्टर ऑफ प्रोडक्ट के तौर पर काम किया। खास बात यह रही कि उन्होंने कंपनी की लीडरशिप टीम को कोल्ड ईमेल किया था और इसी संपर्क के जरिए उन्हें मौका मिला। वेरकाडा में उन्होंने क्लाउड कनेक्टेड सिक्योरिटी कैमरा प्रोडक्ट्स और एआई-कंप्यूटर विशन से जुड़े प्रोडक्ट्स पर काम किया।
2025 में नौकरी छोड़ी और शुरू किया एआई स्टार्टअप
सफल कॉर्पोरेट करियर के बावजूद पुष्पक ने 2025 में नौकरी छोड़कर अपना स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने अपने करीब 25 साल पुराने दोस्त पुष्पेंद्र रस्तोगी के साथ मिलकर कंपनी शुरू की।
शुरुआत में दोनों ने विजन लैंग्वेज मॉडल्स से जुड़े आइडिया पर काम किया। बाद में उन्होंने अपना फोकस बदला और एआई कोडिंग एजेंट्स की सुरक्षा पर काम शुरू किया। पुष्पक के मुताबिक, ग्राहकों और खुद इन एआई टूल्स का इस्तेमाल करने के बाद उन्हें लगा कि कोडिंग एजेंट्स की सिक्योरिटी एक महत्वपूर्ण समस्या है। इसी दिशा से हार्डेन का मौजूदा आइडिया सामने आया।
Harden क्या करती है?
हार्डेन एक एआई सेफ्टी कंपनी है। कंपनी के मुताबिक वह एआई कोडिंग एजेंट्स के लिए सिक्योरिटी और कंट्रोल लेयर तैयार कर रही है, ताकि एआई एजेंट्स द्वारा किए जाने वाले एक्शन्स को एग्जीक्यूट होने से पहले जांचा जा सके।
हार्डेन की वेबसाइट पुष्पक पुजारी का परिचय कंपनी के को-फाउंडर एंड सीईओ के रूप में दर्ज है। और उनके साथ को-फाउंडर एंड सीटीओ के तौर पर पुष्पेंद्र रस्तोगी हैं।
हार्डेन ने जुलाई 2 मिलियन डॉलर की प्री सीड फंडिंग
पुष्पक की लिंक्डइन पोस्ट के मुताबिक, हार्डेन ने शुरुआती दौर में ही 2 मिलियन डॉलर की प्री सीड फंडिंग जुटाई है और उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने शुरुआत एक अलग एआई दिशा से की थी, लेकिन बाद में कोडिंग एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल और सिक्योरिटी चैलेंज्स को देखते हुए हार्डेन के मौजूदा प्रोडक्ट पर फोकस किया।
Pushpak Pujari Success Story से क्या सीख मिलती है?
पुष्पक की कहानी बताती है कि, करियर हमेशा एक सीधी लाइन में आगे नहीं बढ़ता। कई बार रास्ते बदलते हैं, नए मौके आते हैं और असफल प्रयोगों के बाद नया रास्ता सामने आता है।
