Shardendu Tiwari Success Story: आज के दौर में लाखों रुपये का सालाना पैकेज किसी भी युवा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। खासकर जब नौकरी अमेजन जैसी दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी में हो। लेकिन लखनऊ के शारदेंदु तिवारी ने करियर की इसी ऊंचाई पर एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। करीब 46 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली अमजेन क्लाउड इंजीनियर की नौकरी छोड़कर उन्होंने भारतीय सेना को चुना।
यह सिर्फ एक नौकरी छोड़ने की कहानी नहीं है बल्कि इसके पीछे बचपन का सपना, पिता की 36 साल की सैन्य सेवा, लगातार असफलताओं के बावजूद कोशिश करते रहने का जज्बा और देश के लिए कुछ करने की इच्छा जुड़ी है। सेना में चयन के लिए शारदेंदु को आठ प्रयासों से गुजरना पड़ा और आखिरकार टेक्निकल एंट्री के जरिए उनका सपना पूरा हुआ।
46 लाख की नौकरी थी, फिर भी दिल ने चुनी वर्दी
अमेजन में क्लाउड इंजीनियर के रूप में काम करना शारदेंदु के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं था। उनका सालाना पैकेज करीब 46 लाख रुपये बताया गया है। इतना ही नहीं, उनके पास एयरबस जैसी बड़ी एयरोस्पेस कंपनी से जुड़ने का अवसर भी था।
उनके सामने कॉरपोरेट करियर में आगे बढ़ने के कई रास्ते खुले हुए थे लेकिन शारदेंदु ने इन अवसरों के बजाय भारतीय सेना की राह चुनी। रिपोर्टों के अनुसार, सेना में एडवेंचर और फील्ड सर्विस के अवसर भी उन्हें इस करियर की ओर आकर्षित करते थे।
पिता की विरासत को आगे बढ़ाया
शारदेंदु के फैसले के पीछे उनके परिवार की सैन्य पृष्ठभूमि भी अहम रही। उनके पिता मानद कैप्टन राज कुमार तिवारी ने आर्मी सर्विस कोर में करीब 36 साल सेवा की और रिटायर हुए। बचपन से पिता को वर्दी में देखकर शारदेंदु के मन में भी सेना में जाने की इच्छा पैदा हुई।
शारदेंदु ने कॉरपोरेट दुनिया में अपनी पहचान बनाने के बावजूद उस पुराने सपने को खत्म नहीं होने दिया और यही वजह है कि उनकी कहानी में सिर्फ करियर बदलने का फैसला नहीं, बल्कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंची देशसेवा की विरासत भी दिखाई देती है।
टेक्नोलॉजी में बनाया मजबूत करियर
शारदेंदु ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय, चंडीमंदिर से की, जिसके बाद उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ से बीई इन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी किया और आगे एमटेक इन कंप्यूटर साइंस एंड इनफॉर्मेशन सिक्योरिटी की पढ़ाई पूरी की। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के रिकॉर्ड में भी उनका नाम कंप्यूटर साइंस एंड इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी के एमटेक विद्यार्थियों में दर्ज है।
टेक्निकल बैकग्राउंड के बाद उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में कदम रखा और आगे चलकर अमेजन वेब सर्विसेज में क्लाउड इंजीनियर के तौर पर काम किया। उनके पब्लिक प्रोफाइल में भी AWS में ऑपरेशन्स इंजीनियर के रूप में उनका अनुभव दर्ज है।
8 बार कोशिश के बाद पूरा हुआ सपना
शारदेंदु की कहानी का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा उनकी असफलताएं हैं। सेना में जाने की कोशिश के दौरान उन्हें आठ बार चयन प्रक्रिया का सामना करना पड़ा, लेकिन शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं बदला। आखिरकार टेक्निकल एंट्री स्कीम के जरिए उनका चयन हुआ और वे ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) पहुंचे।
यहां उनकी नेतृत्व क्षमता भी सामने आई, जिसमें प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सीनियर अंडर ऑफिसर (SUO) की जिम्मेदारी मिली, जिसे OTA में कैडेट के लिए महत्वपूर्ण नेतृत्व पदों में गिना जाता है।
कॉरपोरेट की चमक से सेना की वर्दी तक
शारदेंदु की कहानी में एक बड़ा फर्क साफ दिखाई देता है। एक तरफ अमेजन की हाई-पेइंग टेक नौकरी, बेहतर कॉरपोरेट अवसर और एयरबस का विकल्प था। दूसरी तरफ सेना का अनुशासित और चुनौतीपूर्ण जीवन।
उन्होंने आसान और आर्थिक रूप से आकर्षक रास्ते के बजाय वह रास्ता चुना, जिसे वह लंबे समय से अपना सपना मानते थे। सितंबर 2026 में OTA गया से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन हुए।
पैसे से बड़ी मकसद की कीमत
शारदेंदु तिवारी की कहानी को सिर्फ इस नजरिए से देखना कि उन्होंने 46 लाख रुपये का पैकेज छोड़ दिया, अधूरा होगा। असल सवाल यह है कि जब आर्थिक सफलता हासिल हो चुकी थी, तब भी उन्होंने अपने पुराने लक्ष्य को क्यों चुना?
उनका सफर बताता है कि हर व्यक्ति के लिए सफलता का पैमाना एक जैसा नहीं होता। किसी के लिए बड़ी सैलरी सफलता है, तो किसी के लिए वर्दी पहनकर देश की सेवा करना सबसे बड़ी उपलब्धि हो सकती है। शारदेंदु ने अपने लिए दूसरा रास्ता चुना। उनके मामले में पैकेज बड़ा था, लेकिन देशसेवा का सपना उससे भी बड़ा निकला।
