जिस उम्र में ज्यादातर युवा पढ़ाई और करियर की दिशा तय करने में लगे होते हैं, उसी उम्र में मुंबई के ध्रव्य शाह एआई की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। महज 19 साल की उम्र में उन्होंने सुपरमेमोरी (Supermemory) नाम का एआई स्टार्टअप तैयार किया, जिसका मकसद एआई सिस्टम को इंसानों की तरह लंबे समय तक जानकारी याद रखने में मदद करना है। अक्टूबर 2025 में सुपरमेमोरी ने करीब 2.6 मिलियन डॉलर की सीड फंडिंग जुटाई थी, जबकि कंपनी ने अपने ब्लॉग में इस राउंड को 3 मिलियन डॉलर बताया है।

मुंबई से शुरू हुआ टेक्नोलॉजी का सफर

ध्रव्य शाह मुंबई से हैं और किशोरावस्था से ही टेक्नोलॉजी तथा प्रोडक्ट बनाने में दिलचस्पी रखते थे और आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी के दौरान भी उन्होंने एक छोटा सा टूल बनाया था, जो ट्वीट्स को बेहतर दिखने वाले स्क्रीनशॉट में बदलता था।

यह प्रोडक्ट बाद में सोशल मीडिया टूल Hypefury को बेच दिया गया। इससे मिले पैसे ने ध्रव्य को अमेरिका जाने और वहां अपनी टेक्नोलॉजी यात्रा को आगे बढ़ाने में मदद की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने आईआईटी की तैयारी के बाद अमेरिका में एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी जाने का फैसला किया।

खुद को दिया 40 हफ्तों का चैलेंज

अमेरिका पहुंचने के बाद ध्रव्य ने कोई सामान्य रास्ता नहीं चुना बल्कि उन्होंने खुद को एक खास चुनौती दी, जिसमें उन्हें 40 हफ्तों तक हर सप्ताह एक नया प्रोडक्ट बनाना था।

इसी प्रयोग के दौरान उनके प्रोजेक्ट प्रोजेक्ट्स में से एक आगे सुपरमेमोरी बनाई गई। शुरुआत में इसका नाम एनी कॉन्टेक्स्ट था और यह ट्विटर बुकमार्क के साथ बातचीत करने वाला टूल था। बाद में इसका स्वरूप बदल गया और मेमोरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एआई अनुप्रयोगों में बदलाव किया गया।यही प्रयोग ध्रव्य के करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

Supermemory क्या करता है?

आसान भाषा में समझें तो सुपरमेमोरी एआई को लंबे समय तक जानकारी याद रखने में मदद करता है। एआई मॉडल किसी बातचीत या काम के दौरान बहुत सारी जानकारी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक यूजर के संदर्भ को बनाए रखना एक चुनौती है। सुपरमेमोरी इसी समस्या को हल करने के लिए एआई एप्लीकेशन्स को एक मेमोरी लेयर उपलब्ध कराता है।

कंपनी के मुताबिक इसका सिस्टम फाइल्स, डॉक्यूमेंट्स, चैट्स, प्रोजेक्ट्स, ईमेल्स, पीडीएफ और दूसरे एप डाटा से जानकारी लेकर उसे एआई एप्लीकेशन्स के लिए उपयोगी कॉन्टेक्स्ट में बदल सकता है। यानी किसी एआई एप्लीकेशन को यूजर की पुरानी जानकारी, बातचीत या दस्तावेजों से संबंधित कॉन्टेक्स्ट दोबारा उपलब्ध कराने में सुपरमेमोरी मदद कर सकता है।

Cloudflare में काम करने का भी मिला अनुभव

ध्रव्य ने 2024 में क्लाउड फ्लेयर में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने एआई और इंस्फ्राट्रक्चर पर काम किया। बाद में वह कंपनी में डेवलपर रिलेशन्स लीड की भूमिका में भी रहे। क्लाउड फ्लेयर में काम करने के दौरान उन्हें इंस्फ्राट्रक्चर और डाटा सिस्टम की व्यावहारिक समझ मिली।

रिपोर्ट्स के अनुसार, क्लाउड फ्लेयर के सीटीओ डेन नेच्ट समेत कुछ एडवाइजर्स ने उन्हें सुपरमेमोरी को एक फुल फ्लेज्ड प्रोडक्ट के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद ही ध्रव्य ने सुपरमेमोरी पर फुल टाइम काम करने का फैसला किया।

19 साल की उम्र में मिली करोड़ों की फंडिंग

सुपरमेमोरी ने अक्टूबर 2025 में करीब 2.6 मिलियन डॉलर की सीड फंडिंग जुटाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व सुसा वेंचर्स, ब्राउनर कैपिटल और SF1.vc ने किया। इसमें गूगल एआई प्रमुख जेफ डीन, डीपमाइंड के लोगन किलपैट्रिक, क्लाउडफ्लेयर सीटीओ डेन कनेच और ओपनएआई, मेटा और गूगल से जुड़े अन्य प्रतिभागियों ने भी हिस्सा लिया।

सुपरमेमोरी ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में इस फंडिंग को 3 मिलियन डॉलर बताया है, जो भारतीय रुपये में यह रकम उस समय की विनिमय दर के हिसाब से करीब 22-26 करोड़ के आसपास बैठती है।

Supermemory के यूजर और ग्राहक भी बढ़े

कंपनी के अनुसार शुरुआती दौर में सुपरमेमोरी का कंज्यूमर ऐप तेजी से बढ़ा और 50,000 से ज्यादा यूजर्स तक पहुंचा। इसके गिटहब रिपॉजिटरी को भी 10,000 से ज्यादा स्टार्स मिले थे। बाद में कंपनी ने अपना फोकस एआई एप्लीकेशन्स के लिए मेमोरी इंस्फ्राट्रक्चर पर किया।

2026 में सुपरमेमोरी की वेबसाइट के मुताबिक उसका इंस्फ्राट्रक्चर 100k+ ऑर्गनाइजेशन्स और हर महीने 1 ट्रिलियन से ज्यादा टोकन्स प्रोसेस कर रहा है। ये कंपनी द्वारा बताए गए वर्तमान आंकड़े हैं।

O-1 Visa भी हासिल किया

ध्रव्य शाह को अमेरिका का O-1 वीजा भी मिला, जो उन लोगों के लिए होता है जिनके पास साइंस, एजुकेशन, बिजनेस, आर्ट्स या अन्य निर्धारित क्षेत्रों में असाधारण योग्यता या उपलब्धि का प्रमाण होता है। 19 साल की उम्र में एआई और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम, प्रोडक्ट्स बनाने के अनुभव और उपलब्धियों के आधार पर उन्हें यह वीजा मिला।

छोटे प्रयोग से शुरू हुई बड़ी कहानी

ध्रव्य शाह की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि सुपरमेमोरी किसी लंबे बिजनेस प्लान से नहीं, बल्कि लगातार नए प्रोडक्ट बनाने के प्रयोग से निकला। आईआईटी की तैयारी के दौरान छोटा सा टूल बनाना, उसे बेचकर अमेरिका जाना, 40 हफ्तों तक हर सप्ताह नया प्रोडक्ट बनाना और फिर उनमें से एक आइडिया को कंपनी में बदल देना, यह सफर दिखाता है कि शुरुआती स्तर पर लगातार प्रयोग करना किस तरह किसी आइडिया को बड़े प्रोडक्ट में बदल सकता है।