पश्चिम बंगाल सरकार अगले साल (जनवरी 2027) से स्कूलों में नया पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारी कर रही है। नए पाठ्यक्रम के तहत स्कूल की किताबों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, उनके योगदान और उनकी विरासत से जुड़े पाठ शामिल किए जाएंगे। वहीं, सिंगूर भूमि आंदोलन और कन्याश्री योजना से जुड़े अध्याय किताबों से हटाए जाएंगे।

राज्य की उच्च स्तरीय सिलेबस-कम-करिकुलम समिति के मुताबिक, ये चेंज पाठ्यक्रम में बड़े स्तर पर किए जा रहे बदलाव का हिस्सा हैं। इसके तहत स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली साहित्यिक रचनाओं में भी बदलाव होगा। साथ ही, साम्यवाद और मुगल काल से जुड़े पाठ्यक्रम का हिस्सा भी कम किया जाएगा।

बंगाल के शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने कहा कि सिलेबस में बदलाव की पूरी प्रक्रिया सिलेबस समिति देख रही है। उन्होंने कहा, “पूरी प्रक्रिया सिलेबस समिति की देखरेख में हो रही है। जब यह मेरे पास आएगा, तब मैं इसे देखूंगा।”

2 जनवरी से लागू होगा नया सिलेबस

सिलेबस समिति के मुताबिक, इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, मूल्यों और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर ज्यादा ध्यान देना है। नया स्कूल सिलेबस 2 जनवरी 2027 से लागू किया जाना है।

समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. देबाशीष चटर्जी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 1951 में बीजेपी की पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले बंगाली नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से जुड़ी जानकारी सभी कक्षाओं की किताबों में शामिल की जाएगी।

हर किताब की शुरुआत में होगी श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जानकारी

डॉ. देबाशीष चटर्जी ने कहा, “सभी किताबों की शुरुआत में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में जानकारी दी जाएगी, ताकि छात्र उनके बारे में जान सकें। यह हर कक्षा की किताब में होगा।”

यह फैसला उच्च शिक्षा विभाग द्वारा पहले जारी किए गए एक आदेश के बाद लिया गया है। इसमें सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से डॉ. मुखर्जी के जीवन और उनके योगदान को शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल करने को कहा गया था।

आदेश में छात्रों के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने को भी कहा गया था, जिनसे नई पीढ़ी डॉ. मुखर्जी के योगदान के बारे में जान सके। संस्थानों को इस दिशा में जल्द काम करने और की गई उठाए गए कदमों की रिपोर्ट विभाग को भेजने का निर्देश भी दिया गया था।

सिंगूर आंंदोलन पाठ्यक्रम से हटेगा

इन बदलावों के तहत कक्षा 8 की इतिहास की किताब से सिंगूर भूमि आंदोलन का अध्याय हटा दिया जाएगा। यह अध्याय 2017 में पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान किताब में शामिल किया गया था।

सिंगूर आंदोलन की अगुवाई पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की थी। यह आंदोलन वाम मोर्चा सरकार के उस फैसले के खिलाफ था, जिसमें टाटा मोटर्स की परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा था।

इसके अलावा, कक्षा 6 से 8 की स्वास्थ्य और स्वच्छता की किताबों से कन्याश्री योजना का अध्याय भी हटा दिया जाएगा। यह योजना 2013 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य किशोरियों की शिक्षा, जीवन और उनके कल्याण को बेहतर बनाना था। इसके तहत लड़कियों को कुछ शर्तों के साथ आर्थिक सहायता दी जाती थी।

समिति के अध्यक्ष देबाशीष चटर्जी ने कहा, “कक्षा 8 की किताब में जोड़ा गया सिंगूर का अध्याय हटाया जाएगा। कन्याश्री का अध्याय भी हटा दिया जाएगा।”

बंग्ला भाषा की किताबों में भी परिवर्तन होगा

प्रस्तावित बदलावों में बंग्ला भाषा की किताबों में भी परिवर्तन किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष देबाशीष चटर्जी ने कहा कि रोजमर्रा की बंग्ला में कम इस्तेमाल होने वाले कई शब्दों को हटाया या बदला जाएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पानी के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘पानी’ शब्द की जगह ‘जोल’ किया जाएगा। इसी तरह ‘अम्मा’ और ‘अब्बा’ जैसे शब्दों में भी बदलाव किए जाएंगे।

माध्यमिक कक्षा के छात्रों को पढ़ाए जाने वाले साहित्य में भी बदलाव होगा। देबाशीष चटर्जी के मुताबिक, रवींद्रनाथ टैगोर की कविता ‘अफ्रीका’ की जगह ‘शिवाजी उत्सव’ को सिलेबस में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा, “जब हम विकसित भारत की बात कर रहे हैं, तो हमें अपनी संस्कृति और मूल्यों को आगे रखना होगा। इसलिए यह कविता महत्वपूर्ण है।”

इसी तरह सचिनेंद्रनाथ सेनगुप्ता के नाटक ‘सिराजदौला’ की जगह द्विजेंद्रलाल राय के नाटक ‘मेबार पतन’ को सिलेबस में शामिल किया जाएगा।

मुगलकाल से जुड़े सिलेबस में भी बदलाव का प्रस्ताव

सिलेबस समिति ने साम्यवाद और मुगल काल से जुड़े कुछ हिस्सों में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही, भारत की आजादी की लड़ाई से जुड़े लोगों और उनके योगदान पर ज्यादा जोर देने की बात कही गई है।

समिति के अध्यक्ष ने कहा, “सालों से हमें यह याद करने के लिए कहा जाता रहा है कि ताजमहल किसने बनवाया और उनके पूर्वजों और पोते-पोतियों के नाम क्या थे। लेकिन जिन लोगों ने देश की आजादी के लिए अपनी जान दे दी, उनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, क्योंकि इतिहास की किताबों में उनका जिक्र नहीं है। अब उन्हें भी किताबों में जगह दी जाएगी।”

समिति के अनुसार, बंगाली और अंग्रेजी की कई किताबों के अध्याय मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजे जा चुके हैं। बाकी हिस्से भी जल्द ही सरकार को भेजने की उम्मीद है। पढ़िए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा लिखा गया लेख