दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कक्षा 12 के कमजोर परीक्षा परिणामों को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले में शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा कई स्कूलों के शिक्षकों और प्रिंसिपलों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों में बोर्ड परीक्षा में खराब प्रदर्शन के लिए जवाब मांगा गया है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब परिणामों के विश्लेषण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पोर्टल भी कथित तौर पर बंद हो गया, जिससे स्कूल प्रशासन और शिक्षकों को आंकड़ों की समीक्षा करने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
किन शिक्षकों को जारी हुए नोटिस?
रिपोर्ट के अनुसार, जिन स्कूलों में कक्षा 12 का परिणाम अपेक्षाकृत कमजोर रहा, वहां के शिक्षकों को नोटिस भेजे गए हैं। नोटिस में शिक्षकों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके विषयों में छात्रों का प्रदर्शन अपेक्षित स्तर तक क्यों नहीं पहुंच पाया।
कुछ स्कूलों में प्रिंसिपलों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित शिक्षकों से स्पष्टीकरण लेकर विभाग को भेजें। इसके अलावा, जिन विषयों में परिणाम कमजोर रहे, वहां सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
परिणाम विश्लेषण पोर्टल बंद
शिक्षकों और स्कूल प्रशासन का कहना है कि परिणामों के विश्लेषण के लिए उपयोग किया जाने वाला ऑनलाइन पोर्टल कई दिनों तक उपलब्ध नहीं रहा। इससे यह समझने में कठिनाई हुई कि किन क्षेत्रों में छात्रों का प्रदर्शन कमजोर रहा और सुधार की आवश्यकता है।
कुछ शिक्षकों का आरोप है कि पोर्टल की तकनीकी समस्याओं के कारण परिणामों का सही विश्लेषण नहीं हो सका, जबकि विभाग ने खराब प्रदर्शन के आधार पर नोटिस जारी कर दिए।
मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस वर्ष पहली बार बड़े स्तर पर लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिक्षकों के संगठनों का कहना है कि नई मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी दिक्कतें सामने आईं, जिनका असर छात्रों के अंकों पर पड़ सकता है।
शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि परिणामों की समीक्षा करते समय केवल शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय मूल्यांकन प्रक्रिया और तकनीकी व्यवस्थाओं की भी जांच की जाए।
शिक्षकों के संगठन ने जताई नाराजगी
शिक्षक संगठनों का कहना है कि बिना पूरी जांच के शिक्षकों को नोटिस जारी करना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि परीक्षा परिणाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं, जिनमें छात्रों की तैयारी, मूल्यांकन प्रक्रिया और तकनीकी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं। संगठनों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि पोर्टल संबंधी समस्याओं और ऑन-स्क्रीन मार्किंग से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
