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सांगवी : चिकित्सक बनने का सपना साकार करेगी ‘मालासर’ बच्ची

तमिलनाडु के एक गांव में देश की आजादी के 75वें साल में इस साल पहली बार किसी ने 12वीं कक्षा पास की

एम सांघवी। फाइल फोटो।

तमिलनाडु के एक गांव में देश की आजादी के 75वें साल में इस साल पहली बार किसी ने 12वीं कक्षा पास की। 12वीं पास करने के साथ ही राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) में सफलता अर्जित की। आदिवासी ‘मालासर’ समुदाय के गांव नानजप्पनुर की 20 साल की बच्ची एम सांगवी ने इतिहास रचा है। इस समुदाय से अब तक किसी ने 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी नहीं की थी। अनुसूचित जनजाति से संबद्ध सांगवी न केवल यहां से 12वीं कक्षा पास करने वाली पहली छात्रा बनी बल्कि वह नीट 2021 में बाजी मार ली। आदिवासी मालासर समुदाय में यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली लड़की है।

अपनी अनूठी संस्कृति के लिए अलग पहचान रखने वाले मालासर समुदाय में लड़की के यौवन की दहलीज पर कदम रखने पर जश्न मनाए जाने की परंपरा है। सांगवी की आंखों में पले और आकार ले रहे सपने ने उसके समुदाय को लंबे समय तक जश्न मनाने का अवसर दे दिया। वह डाक्टर बनना चाहती है।

करीब 40 परिवारों के नानजप्पनुर गांव में एक परिवार सांगवी का है जिसमें एक बरस पहले तक वह अपनी कच्ची झोपड़ी में मां वसंतमणि और पिता मुनियप्पन के साथ रहती थीं। खेत में काम कर गुजर-बसर करने वाले इस दंपत्ति ने मुश्किलों के बाद भी बिटिया की पढ़ाई पर आंच नहीं आने दी। उसने डाक्टर बनने की इच्छा जताई और मुनियप्पन ने उसे प्रोत्साहित किया। 2018 में बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सांगवी ने पिचानूर के सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 2017-18 में नीट की परीक्षा दी लेकिन पहले प्रयास में वह नाकाम रही। इसके अगले साल वह नीट की परीक्षा नहीं दे पाई क्योंकि मुनियप्पन बीमार हो गए और उन्होंने आखिरी सांस ले ली। आंखों की समस्या से पीड़ित वसंतमणि को सर्जरी के बाद और कम दिखने लगा।

कोविड महामारी का कहर चरम पर था और नानजप्पनुर में राहत कार्यों में लगे कुछ लोगों ने आदिवासी बहुल नानजप्पनुर गांव में राहत सामग्री पहुंचाई। इस दौरान उन्हें पढ़ाई के लिए सांगवी की ललक के बारे में पता चला। उन्होंने सांगवी की मदद की। स्टेट बोर्ड और गैर सरकारी संगठन की सहायता से सांगवी ने किताबें लीं और नीट परीक्षा 2021 के दूसरे प्रयास में 720 में से 202 अंक हासिल किए। इससे पहले उसे इस परीक्षा के लिए सामुदायिक प्रमाण पत्र हासिल करने में बहुत मुश्किल हुई थीं। लेकिन कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद उसे यह प्रमाण पत्र मिला। गांव के लोगों को बीमारी से जूझते देखने वाली सांगवी डाक्टर बन कर उनके लिए कुछ करना चाहती है। इसके लिए वह सरकारी मेडिकल कालेज में एक सीट और तमिलनाडु सरकार से आर्थिक मदद की आकांक्षी है।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उम्मीदवारों के लिए कट-आफ 108 और 137 अंकों के बीच है और सांगवी ने 202 अंक हासिल किए हैं। रास्ता लंबा और मुश्किलों भरा है लेकिन सांगवी को विश्वास है कि वह चुनौतियों से पार पा लेगी और डाक्टर बन कर अपने गांव के लोगों का इलाज करेगी।

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