जब कोई कहता है, ‘वह तो घर का चिराग है’ तो वहां व्यक्ति वास्तव में चिराग नहीं है, लेकिन उसे चिराग कहकर उसके महत्व और उजाले का संकेत दिया गया है। यही अभिव्यक्ति ‘रूपक’ कहलाती है। ‘रूपक’ भाषा की वह सुंदर शैली है, जिसमें किसी वस्तु या व्यक्ति को सीधे किसी दूसरी वस्तु के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

इसका सामान्य अर्थ किसी एक वस्तु, व्यक्ति या भाव पर दूसरी वस्तु या व्यक्ति का रूप आरोपित कर देना यानी उसे वही मान लेना जनसत्ता.कॉम की ‘सही हिंदी’ मुहिम का उद्देश्य हिंदी भाषा की शुद्धता, सुंदरता और व्याकरणिक समझ को आम पाठकों तक सरल रूप में पहुंचाना है। साथ ही ऐसे शब्दों का प्रयोग, जिनका हम दैनिक जीवन में करते हैं, लेकिन उनके सही अर्थ और सही संदर्भ को लेकर स्पष्टता कम होती है।

यह पहल बोले और लिखे जाने वाले शब्दों के सही रूप, अर्थ, उच्चारण और व्याकरण को समझाकर भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास है। आज की कड़ी का शब्द ‘रूपक’ है। हिंदी व्याकरण और काव्यशास्त्र में ‘रूपक’ एक प्रमुख अलंकार है।

रूपक अलंकार वहां होता है जहां उपमेय (जिसकी तुलना की जा रही है) और उपमान (जिससे तुलना की जा रही है) के बीच का अंतर पूरी तरह मिटा दिया जाता है। इसमें ‘के समान’ या ‘जैसा’ शब्दों का प्रयोग नहीं होता, बल्कि दोनों को एक ही बता दिया जाता है।

‘रूपक’ शब्द की व्युत्पत्ति

  • रूपक: रूप +क
  • रूप: आकृति, स्वरूप, रूपरेखा।
  • क (प्रत्यय): बनाने वाला या संबंधित।

शब्द का महत्व

‘रूपक’ शब्द भाषा को अधिक प्रभावशाली, जीवंत और चित्रात्मक बनाता है। रूपक के माध्यम से लेखक या वक्ता बात को सीधे और गहरे प्रभाव के साथ प्रस्तुत कर सकते हैं। पत्रकारिता, भाषण और दैनिक बातचीत में भी रूपक का प्रयोग देखने को मिलता है, जिससे अभिव्यक्ति प्रभावी बनती है।

उदाहरण

  • पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो: मीराबाई की इस पंक्ति में ‘राम के नाम’ को ही ‘रतन’ और ‘धन’ मान लिया गया है।
  • जीवन एक रंगमंच है: जीवन की तुलना रंगमंच से नहीं की गई, बल्कि जीवन को ही रंगमंच बता दिया गया है।
  • कवि ने अपनी कविता में प्रकृति और मानवीय भावनाओं का बहुत सुंदर रूपक बांधा है।
  • कालिदास के ‘अभिज्ञानशाकुंतलम्’ को संस्कृत साहित्य के सर्वश्रेष्ठ रूपकों में गिना जाता है।
  • नेताजी का भाषण केवल शब्दों का जाल था, जिसमें कई रूपकों का इस्तेमाल किया गया था।

अभिप्राय

‘रूपक’ एक ऐसा शब्द है जो भाषा की अभिव्यक्ति को गहराई और सुंदरता प्रदान करता है। यह केवल एक व्याकरणिक अवधारणा नहीं, बल्कि विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। हिंदी की यही विशेषता एक शब्द और अर्थ की पूरी दुनिया है।

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