संसद के बजट सत्र के दौरान बीजेपी के राज्यसभा सांसद भीम सिह ने सदन में आरक्षित वर्ग (एससी, एसटी और ओबीसी) को लेकर एक अहम मुद्दा उठाया है। भीम सिंह ने संसद में कहा कि जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी में SC, ST और OBC कर्मचारियों के साथ कथित रूप से भेदभाव हो रहा है। उनका कहना है कि इन कर्मचारियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। राज्यसभा सांसद ने इसके लिए सरकार से एक विशेष ऑडिट कराए जाने की मांग की है।

सांसद ने की विशेष ऑडिट की मांग

बिहार के राज्यसभा सांसद भीम सिंह स्पेशल मेंशन सेशन के दौरान कहा कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के बावजूद वहां SC, ST और OBC कर्मचारियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है इसलिए इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच और विशेष ऑडिट कराया जाए।

भीम सिंह ने कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की नीव राष्ट्रवादी मौलाना अबुल कलाम आजाद और डॉक्टर जाकिर हुसैन ने राष्ट्रीय शिक्षा, सामाजिक समरसता और देश निर्माण के उद्देश्य से रखी थी, लेकिन अत्यंत खेद का विषय है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के बावजूद वहां की छात्र संरचना और नियुक्तियों से बहुलतावादी छवि पूरी तरह गायब है। सबसे भयावह स्थिति हमारे वंचित वर्गों की है।”

कैंपस में होती है मारपीट की घटनाएं

उन्होंने आगे कहा, “विश्वविद्यालय में कार्यरत एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के कर्मचारियों को ना केवल वैधानिक सेवा लाभों और आरक्षण से वंचित रखा जा रहा है बल्कि उनके साथ परिसर में मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाएं भी हो रही हैं। प्रशासन को इन शिकायतों पर कारवाई करनी चाहिए। अतः मेरी मांग है कि समावेशी विजन को बचाने के लिए वहां की आरक्षण नीति और विशेषकर एससी एसटी ओबीसी कर्मचारियों के साथ हो रहे भेदभाव की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच और विशेष ऑडिट तत्काल कराया जाए।