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राजेश खन्‍ना और ज‍ितेंद्र ने साथ-साथ की थी पढ़ाई, कॉलेज में खूब ड्रामा करते थे ‘बाबू मोशाय’

राजेश खन्ना का सुपरस्टारडम जैसे जैसे तेजी से बढ़ रहा था वैसे ही उनकी हर फिल्म की फीस भी बढ़ रही थी। 1970 तक, वह एक फिल्म के लिए 10 लाख रुपये तक की फीस लेते थे। इसके बाद, आराधना (1969) की सफलता के चलते उन्होंने 1974-77 के बीच अपनी फीस 20-27 लाख रुपये कर दी थी।

Rajesh Khanna career, Rajesh Khanna early life, Rajesh Khanna struggle , Rajesh Khanna हृषिकेश ने आनंद, (1971), बावर्ची (1972), नमक हराम (1973) और नौकरी (1978) नामक चार फिल्मों में राजेश खन्ना का निर्देशन किया थी। नौकरी को छोड़कर, बाकी तीनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रहीं थी। (फाइल फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

दिवंगत अभिनेता और राजनेता राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा जगत के जाने-माने एक्टरों में से एक थे। 1969 से 1971 तक उन्होंने लगातार 15 हिट फिल्मों में अभिनय किया जिसके बाद, उन्हें हिंदी फिल्म जगत का `पहला सुपरस्टार` कहा जाने लगा था। राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को अमृतसर में हुआ था, उनके बचपन का नाम जतिन था। उन्हें ऐसे माता-पिता ने गोद लिया था, जिनकी पहले से ही अपनी तीन बेटियां थीं। जतिन ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट सेबेस्टियन गोअन हाई स्कूल, मुंबई से और कॉलेज की पढ़ाई नवरोज वाडिया कॉलेज पुणे और केसी कॉलेज मुंबई से की थी। उन्होंने अपनी पढ़ाई अपने घनिष्ट मित्र रवि कपूर के साथ की थी, जो कि फिल्म स्टार जितेंद्र के नाम से जाने जाते हैं।

राजेश खन्ना ने कई इंटर कॉलेज ड्रामा प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की थी जिसके बाद उन्होंने थिएटर की ओर रुख कर लिया था। 1965 में उन्होंने फिल्मफेयर और यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स द्वारा आयोजित ऑल इंडिया टैलेंट कॉन्टेस्ट जीता था और अगले साल चेतन आनंद की ‘आखिरी खत’ फिल्म के साथ डेब्यू किया था। उनकी कुछ सुपरहिट ब्लॉकबस्टर फिल्मों में आराधना (1969), इत्तेफाज (1969), सच्चा झूठा (1970), खामोशी (1970), आनंद (1971), कटी पतंग (1971), दुश्मन (1972), अमर प्रेम (1972) शामिल हैं।
राजेश खन्ना ने 1973 में अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से शादी की थी। शादी के समय डिंपल की उम्र महज 16 वर्ष थी। उनकी दो बेटियां हुईं, जिनका नाम ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना है। 1984 में डिंपल और राजेश एक दूसरे से अलग हो गए थे। हलांकि दोनो ने कानूनी तौर पर कभी तलाक नहीं लिया था।

राजेश खन्ना का सुपरस्टारडम जैसे जैसे तेजी से बढ़ रहा था वैसे ही उनकी हर फिल्म की फीस भी बढ़ रही थी। 1970 तक, वह एक फिल्म के लिए 10 लाख रुपये तक की फीस लेते थे। इसके बाद, आराधना (1969) की सफलता के चलते उन्होंने 1974-77 के बीच अपनी फीस 20-27 लाख रुपये कर दी थी। अगले दशक तक, राजेश खन्ना की प्रति फिल्म फीस 30-57 लाख रुपये से बढ़कर 1981-89 में 50-70 लाख रुपये हो गयी थी।

एक निर्देशक ऐसे भी थे जिनके लिए राजेश खन्ना ने अपनी फीस आधी कर दी थी, वे निर्देशक थे हृषिकेश मुखर्जी। हृषिकेश ने आनंद, (1971), बावर्ची (1972), नमक हराम (1973) और नौकरी (1978) नामक चार फिल्मों में राजेश खन्ना का निर्देशन किया थी। नौकरी को छोड़कर, बाकी तीनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रहीं थी।

1992 में राजेश भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में नई दिल्ली लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सासंद चुने गए थे। उन्होंने सांसद के रूप में पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा किया था। भारतीय सिनेमा में काका के नाम से मशहूर राजेश खन्ना का देहांत 18 जुलाई, 2012 को मुंबई में हो गया था। राजेश खन्ना को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया जो भारत का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।

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