सीबीएसई कक्षा 12 परीक्षा के ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए शिक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों का आरोप लगाया है।
सीबीएसई द्वारा 12वीं के परिणाम घोषित किए जाने के बाद से पिछले 12 दिनों में ओएसएम सिस्टम में गड़बड़ियों, गलत मूल्यांकन और कॉपियों की जांच में त्रुटियों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। इस साल करीब 18.5 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी।
राहुल गांधी बोले- सवाल पूछने वाले छात्र को ‘देशद्रोही’ बताया गया
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि एक 17 वर्षीय छात्र, जिसने अपनी उत्तरपुस्तिका के गलत मूल्यांकन के खिलाफ आवाज उठाई, उसे सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया।
राहुल गांधी ने कहा, “एक 17 साल का छात्र अपने भविष्य के लिए आवाज उठाता है और बीजेपी उसे गद्दार बना देती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी से जुड़े आईटी इकोसिस्टम ने छात्र को “एंटी-नेशनल”, “Soros एजेंट” और “डीप स्टेट का हिस्सा” करार दिया।
राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार युवाओं और Gen-Z से इसलिए डरती है क्योंकि वे अब कठिन सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने वालों को बदनाम करने और दबाने की कोशिश की जाती है।
केजरीवाल ने धमेंद्र प्रधान को बताया ‘अयोग्य’
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर हमला बोला। उन्होंने कहा,“CBSE मूल्यांकन में भारी अनियमितताओं ने लाखों बच्चों का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तुरंत शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाना चाहिए।”
केजरीवाल ने शिक्षा मंत्री को “अयोग्य और बेकार” बताते हुए कहा कि देशभर के लाखों छात्र मानसिक तनाव झेल रहे हैं। उन्होंने NEET परीक्षा विवाद का जिक्र करते हुए कहा, “पहले NEET और अब CBSE। धर्मेंद्र प्रधान एक दिन भी शिक्षा मंत्री बने रहने के योग्य नहीं हैं।”
जयराम रमेश ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सीबीएसई रिजल्ट में कम पास प्रतिशत और वेबसाइट संबंधी तकनीकी खामियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि तकनीकी समस्याएं थीं तो पहले से तैयारी क्यों नहीं की गई? साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए IIT संस्थानों की तकनीकी विशेषज्ञता ली जानी चाहिए।
क्या है सीबीएसई ओएसएम विवाद?
सीबीएसई ने इस साल पहली बार बड़े स्तर पर ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) प्रणाली लागू की थी। इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना था।
हालांकि कई छात्रों ने आरोप लगाया कि, उत्तरपुस्तिकाओं के पेज मिसिंग थे, कॉपियां मिक्स-अप हुईं थी, स्टेप मार्किंग सही से नहीं हुई और ब्लर स्कैन की वजह से गलत मूल्यांकन हुआ। इन शिकायतों ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
ओएसएम विवाद के चलते छात्र और अभिभावक लगातार सोशल मीडिया पर न्याय की मांग कर रहे हैं। कई छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन और मैनुअल जांच की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन शिकायतों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
