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ऑनलाइन क्‍लासेज़ न कराने वाले प्राइवेट स्कूल भी मांग सकते हैं ट्यूशन फीस: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

अदालत ने कहा कि जिन स्कूलों ने ऑनलाइन क्‍लासेज़ आयोजित नहीं भी कराई हैं, उन्हें भी अपने स्‍टाफ के वेतन और बिजली के बिल जैसे खर्चों को पूरा करना है। स्‍कूलों को अपने इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को मेनटेन रखना होगा ताकि जब छात्र स्कूलों में लौटें तो उन्‍हें क्‍वालिटी एजुकेशन के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं भी मिल सकें।

अदालत ने स्कूलों को जारी शैक्षणिक सत्र (2020-21) के लिए शुल्क न बढ़ाने को कहा है।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपने फैसले में कहा कि पंजाब के सभी प्राइवेट स्कूल, चाहें वे ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित कर रहे हैं या नहीं, वे ट्यूशन फीस लेने के अधिकारी हैं और साथ ही उन्हें एडमिशन फीस लेने की अनुमति भी दी। यह आदेश पंजाब सरकार द्वारा पंजाब स्‍कूल वेलफेयर असोसिएशन द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया गया है। न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर ने यह फैसला सुनाते हुए स्कूलों को लॉकडाउन अवधि के लिए अन्य शुल्क एकत्र करने की अनुमति दी। हालांकि, अदालत ने स्कूलों को जारी शैक्षणिक सत्र (2020-21) के लिए शुल्क न बढ़ाने को कहा है और उन्हें पिछले वर्ष की तरह ही फीस संरचना को अपनाने का आदेश दिया है।

सरकार ने पहले केवल उन स्कूलों को ट्यूशन फीस मांगने की अनुमति दी थी, जो ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित कर रहे थे। जबकि सभी स्कूलों को एडमिशन फीस जमा करने की लास्‍ट डेट को स्थगित करने के लिए कहा गया था और स्‍कूलों को लॉकडाउन की अवधि के दौरान ट्रांस्‍पोर्ट, भवन व्यय जैसे अन्य शुल्क लेने से भी रोक दिया था। स्वतंत्र स्कूल एसोसिएशन और पंजाब स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन सहित विभिन्न स्कूल प्रबंधन द्वारा सरकार के आदेश को उच्च न्यायालय के सामने चुनौती दी गई थी।

अदालत ने कहा कि जिन स्कूलों ने ऑनलाइन क्‍लासेज़ आयोजित नहीं भी कराई हैं, उन्हें भी अपने स्‍टाफ के वेतन और बिजली के बिल जैसे खर्चों को पूरा करना है। स्‍कूलों को अपने इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को मेनटेन रखना होगा ताकि जब छात्र स्कूलों में लौटें तो उन्‍हें क्‍वालिटी एजुकेशन के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं भी मिल सकें। चूंकि अदालत ने स्‍कूलों को फीस बढ़ाने से मना कर दिया है, ऐसे में यदि कोई स्‍कूल (गंभीर) आर्थिक तंगी का सामना करता है तो वह प्रमाण के साथ जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकता है। DEO को आदेश दिया गया है कि ऐसे अभ्यावेदन पर गौर करें और आवेदन प्राप्त होने के तीन सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करें।

इससे पहले महाराष्‍ट्र हाईकोर्ट ने भी सरकार के स्‍कूलों पर फीस मांगने पर लगाई गई पाबंदी के मामले पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया है कि महाराष्‍ट्र सरकार प्राइवेट अनऐडड स्‍कूलों की फीस रेगुलेट नहीं कर सकती। हालांकि, अदालत ने स्कूल मैनेजमेंट को निर्देश दिए कि वे मौजूदा परिस्‍थितियों को ध्‍यान में रखते हुए अभिभावकों को इंस्‍टॉलमेंट में, तथा ऑनलाइन मोड से फीस जमा करने की सुविधा दें।

पंजाब हाईकोर्ट के फैसले के बाद अभिभावकों ने पंजाब में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया और मांग की कि जिस दौरान बच्चों को घर पर रखा गया हो उस महीने कोई शुल्क नहीं लिया जाए। राजपुरा स्थित पैरेंट्स असोसिएशन के वकील सीनियर एडवोकेट रविन्‍दर सिंह ने कहा कि अभिभावक हाईकोर्ट के इस फैसले के संतुष्‍ट नहीं है इसलिए इस पर स्‍टे लगाने की मांग के साथ वे जल्द से जल्‍द सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

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