पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राज्य के सरकारी स्कूलों में चल रही शिक्षकों की कमी को लेकर पूर्व की सरकारों को जिम्मेदार ठहराया है। इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में शिक्षा मंत्री ने कहा है कि राज्य में टीचर्स की कमी एक बड़ी समस्या है और यह कोई रातों-रात पैदा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यह सालों से हो रही सिस्टम की अनदेखी का नतीजा है और यह समस्या आम आदमी पार्टी की सरकार को विरासत में मिली थी।

शिक्षा मंत्री ने इस समस्या पर क्या कहा?

दरअसल, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से पंजाब में टीचर्स की कमी को लेकर सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि राज्य में 50 फीसदी से अधिक सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं और 30 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में हेडमास्टर नहीं हैं जबकि ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर के 40 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। इस समस्या का समाधान कैसे किया जा रहा है? इस सवाल के जवाब में हरजोत बैंस ने कहा कि यह समस्या सालों से हो रही सिस्टम की अनदेखी की वजह से बनी है और हमारी सरकार को यह समस्या विरासत में मिली थी।

पिछले 4 साल में 14 हजार शिक्षकों को किया नियुक्त

हरजोत बैंस ने आगे कहा कि हमारी सरकार ने शिक्षकों की कमी वाली इस समस्या को दूर करने की दिशा में तेजी से काम किया है। उन्होंने बताया कि हमने शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने का काम किया और पिछले 4 साल में 14 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती भी की गई है और हजारों पदों पर भर्ती पाइपलाइन में है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पंजाब में पूरे देश में सबसे अच्छे टीचर-प्यूपिल रेश्यो में से एक है। चुनौती रैशनलाइजेशन है और हम इस पर काम कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी बन रहा राह में रोड़ा- बैंस

शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के (पिछले साल) TET (टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट) एग्जाम को पहले से भर्ती टीचरों के लिए भी जरूरी करने के फैसले ने हर प्रमोशन को रोक दिया है। राज्य में 4,500 से ज्यादा प्रमोशन प्रभावित हुए और उनमें से अधिकतर प्रिंसिपल, हेड मास्टर और लेक्चरर के थे। अगर अटके हुए यह प्रमोशन हो जाते हैं तो 500 स्कूलों को प्रिंसिपल मिल जाएंगे।

हरजोत बैंक ने कहा कि अभी नए प्रिंसिपलों की भर्ती पर भी रोक है, लेकिन मैं भरोसे के साथ कह सकता हूं कि कई सालों में पहली बार ऐसी सरकार है जो स्टाफिंग गैप को एक मुख्य गवर्नेंस मुद्दा मान रही है।