मुंबई और पुणे पुलिस ने हैदराबाद के एक PhD होल्डर और ‘एजुकेशन कंसल्टेंट’ को करोड़ों रुपए की ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है। पिछले हफ्ते हुई इस गिरफ्तारी के बाद पुणे और मुंबई पुलिस की जांच में सामने आया है कि हैदराबाद के एक पीएचडी होल्डर आदित्य कुमार उर्फ अरविंद प्रकाश कुमार अरोगोंडा ने 40 से अधिक नीट स्टूडेंट्स को MBBS कोर्स में एडमिशन का वादा करके उनसे करोड़ों रुपए ठग लिए। आरोपी को मुंबई की आर्थर रोड जेल से कस्टडी में लिया गया, जहां उसे मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक हिरासत में रखा हुआ था।
मुंबई और पुणे में खोली फर्जी कंपनी
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने तेलंगाना और महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में 40 से अधिक नीट यूजी छात्रों को MBBS कोर्स में दाखिला का वादा करके लाखों रुपए ले लिए और एडमिशन के नाम पर फर्जी-फर्जी दस्तावेज पेश कर दिए। आरोपी ने पुणे और मुंबई में एक फर्जी कंपनी भी खोली हुई थी जिसके जरिए उन्होंने कैंडिडेट्स को धोखाधड़ी का शिकार आसानी से कर लिया।
आरोपी ने खुद को बताया एजुकेशन एक्सपर्ट
इस जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया है कि अरविंद प्रकाश कुमार के पास PhD की डिग्री है और वह पहले तेलंगाना के किसी कॉलेज में काम कर चुका है। उसने खुद को नीट उम्मीदवारों के सामने एजुकेशन एक्सपर्ट और मेंटर के तौर पर पेश किया था और मेडिकल की पढ़ाई करने वालों को काउंसलिंग सर्विस देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया था। उसने ‘कॉलेज प्रेडिक्टर’ नाम के एक फोन-बेस्ड एप्लिकेशन का भी विज्ञापन दिया था।”
आरोपी ने मुंबई और हैदराबाद में की ठगी
आरोपी के खिलाफ पुणे में अलग-अलग दो मामले में भी दर्ज हैं जिसमें दो परिवारों ने कथित तौर पर 8.12 लाख रुपए की ठगी का आरोप लगाया है। परिवार का आरोप है कि आरोपी ने उनके बच्चों को एक जाने-माने मेडिकल कॉलेज में MBBS कोर्स में एडमिशन का वादा किया था। जांच में ये सामने आया है कि आरोपी न सिर्फ इन दो मामलों में बल्कि मुंबई और हैदराबाद में इसी तरह के 40 से अधिक मामलों में आरोपी है। पुणे के यरवदा पुलिस स्टेशन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, कोर्ट के ट्रांसफर वारंट पर मुंबई की आर्थर रोड जेल से पुणे लाए जाने से पहले ही आरोपी के खिलाफ कम से कम छह क्रिमिनल केस दर्ज थे।
कैसे ठगी को दिया अंजाम?
अधिकारियों ने बताया कि यह पूरा घोटाला एक कंपनी के जरिए हुआ जिसका पहला ऑफिस हैदराबाद में था। बाद में मुंबई और पुणे में भी इसकी ब्रांच खुल गई। इस कंपनी ने फोन मैसेंजर और सोशल मीडिया के जरिए विज्ञापन के सहारे नीट रिजल्ट के बाद MBBS कोर्स में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को टारगेट किया। सोशल मीडिया पर विज्ञापन देखकर जिन-जिन छात्रों ने कंपनी से संपर्क किया उन्हें कंपनी द्वारा प्रमोट किए गए ‘कॉलेज प्रेडिक्टर’ एप्लिकेशन का इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया गया। इस दौरान कंपनी की ओर से कैंडिडेट्स को उनकी कैटेगिरी और मार्क्स के आधार पर उन कॉलेजों में एडमिशन का सपना दिखाया गया जहां वह चाहते हैं।
जांच करने वाले अधिकारियों ने बताया कि इस प्रक्रिया के जरिए कैंडिडेट्स को भरोसा हुआ और फिर छात्रों ने अपने परिवार वालों को भरोसे में लिया। इन छात्रों के परिजनों को कंपनी की ओर से यह भरोसा दिलाया गया कि उनके पास एक्सक्लूसिव एडमिशन एक्सपर्टीज और मेडिकल कॉलेजों तक एक्सेस है। जांच करने वाले अधिकारी ने बताया कि एक बार भरोसा बन जाने के बाद, कंसल्टेंसी ने एडमिशन में मदद करने का ऑफर दिया।
परिवारों को बताया गया कि सरकारी कॉलेजों में एडमिशन लगभग 5 लाख रुपये की फीस पर मिल सकता है, जबकि प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन के लिए 2 लाख से 3 लाख रुपये का काउंसलिंग चार्ज देना होगा। पीड़ितों को कथित तौर पर भरोसा दिलाया गया कि अगर एडमिशन नहीं मिला तो उनके पैसे वापस कर दिए जाएंगे। पेरेंट्स को यह यकीन दिलाने के लिए एग्रीमेंट और भरोसे का इस्तेमाल किया गया कि प्रोसेस असली है।
आरोपी और उसके साथियों ने स्टूडेंट्स और पेरेंट्स से पैसे इकट्ठा किए और बाद में नकली कॉलेज एडमिशन डॉक्यूमेंट्स और अलॉटमेंट लेटर कैंडिडेट्स को दिखा दिए। परिवार वालों को खास तारीखों पर कॉलेजों में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया, लेकिन बाद में पता चला कि असल में कोई एडमिशन नहीं दिया गया था। जब तक परिवारों को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है, तब तक कीमती पढ़ाई का समय बर्बाद हो चुका था, और कई स्टूडेंट्स ने दूसरी जगहों पर मौके गंवा दिए थे।
