देश में तकनीकी संस्थानों में दाखिले के लिए विद्यार्थियों में मारामारी रहती है। दूसरी ओर, तकनीकी संस्थानों में हर साल लाखों सीटें खाली रह जाती हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में 34.15 लाख सीटों में से 25.57 लाख पर ही दाखिले हुए। यानी साढ़े आठ लाख से अधिक सीटें खाली रह गईं। वहीं, एआइसीटीई से संबद्ध तकनीकी संस्थानों की संख्या में में तीन वर्षों 330 से अधिक बढ़ी है।

एआइसीटीई के मुताबिक वर्ष 2025-26 में 34.15 लाख सीटों में से 25.57 लाख पर ही दाखिले हुए। यानी साढ़े आठ लाख से अधिक सीटें खाली रह गईं। इनमें 55 हजार से अधिक तक अकेले कंप्यूटर एप्लीकेशन पाठ्यक्रम की सीटें थीं। वर्ष 2025-26 में कंप्यूटर एप्लीकेशन की सभी स्तर पर कुल 1,45,639 सीटें थीं जिनमें से 90,005 सीटों पर ही दाखिले हुए। वहीं, इंजीनियरिंग की बात करें तो वर्ष 2025-26 में हर स्तर पर कुल 25,52,440 सीटें निर्धारित थीं, जिनमें से 21,37,342 सीटों पर ही दाखिले हुए।

यानी इंजीनियरिंग की चार लाख से अधिक सीटें खाली रह गईं। इसी तरह एआइसीटीई से मान्यता प्राप्त होटल प्रबंधन की 11 हजार से कुछ अधिक सीटों में से चार हजार से कुछ अधिक ही भर पाईं। यानी होटल प्रबंधन की हर स्तर पर सात हजार के करीब सीटें खाली रह गईं। एआइसीटीई के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023-24 में देश में तकनीकी संस्थानों की संख्या 8,263 थी जो वर्ष 2026-27 तक 8,600 पहुंच गई है। यानी इन तीन वर्षों में एआइसीटीई से मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थानों की संख्या में 337 की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी चार फीसद के आसपास रही। हालांकि, वर्ष 2020-21 के मुकाबले तकनीकी संस्थानों की संख्या अभी भी कम है।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020-21 में देश में कुल तकनीकी संस्थानों की संख्या 9,642 थी जबकि वर्ष 2026-27 तक 8,600 ही है। वर्ष 2020-21 से वर्ष 2023-24 तक देश में तकनीकी संस्थानों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की गई थी। जबकि वर्ष 2023-24 से हर वर्ष संस्थानों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।

गौरतलब है कि एआइसीटीई देश में तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का वैधानिक निकाय है। यह शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है। जो इंजीनियरिंग, फार्मेसी, प्रबंधन और वास्तुकला जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए नियम और मानक तय करता है। इतना ही नहीं नए तकनीकी संस्थान खोलने या नए पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति देता है।

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दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IIT) में एक छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया। इस बीच संस्थान ने बुधवार को कहा कि छात्रों की भलाई कैंपस का ऐसा माहौल बनाने के लिए एक बुनियादी शर्त है, जहां छात्रों को लगे कि उनकी बात सुनी जा रही है और उन्हें सपोर्ट किया जा रहा है। एक बयान में IIT दिल्ली ने छात्रों को सपोर्ट करने के लिए लागू किए गए कई उपायों के बारे में बताया, जिसमें एकेडमिक फ्लेक्सिबिलिटी, मेंटरशिप, मेंटल हेल्थकेयर, शिकायत निवारण और विविधता और इनक्लूजन को बेहतर बनाने के मकसद से की गई पहल शामिल हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…