देश की प्रमुख परीक्षा और मूल्यांकन संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 73 पूर्व वरिष्ठ नौकरशाहों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र और समयबद्ध समीक्षा कराने की मांग की है।

पूर्व अधिकारियों ने बुधवार को कांस्टीट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप (CCG) के बैनर तले जारी एक खुले पत्र में कहा कि परीक्षा संबंधी लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर किया है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की।

NEET-UG पेपर लीक का किया जिक्र

पत्र में पूर्व अधिकारियों ने नीट यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे 23 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य और मेहनत पर असर पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया में बार-बार सामने आने वाली खामियों के कारण कुछ उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध हो गए, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हुई।

पूर्व नौकरशाहों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं और छात्रों का विश्वास कमजोर करती हैं।

CBSE के OSM सिस्टम पर भी उठाए सवाल

ओपन लेटर में सीबीएसई की कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिए लागू किए गए ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) डिजिटल सिस्टम को लेकर भी चिंता जताई गई है।

पत्र के अनुसार, OSM प्रणाली के क्रियान्वयन के दौरान पोर्टल क्रैश, उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल पन्नों का गायब होना, कॉपियों का गलत मिलान और अंकन संबंधी त्रुटियां सामने आईं। विशेष रूप से भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित जैसे विषयों में मूल्यांकन संबंधी समस्याओं का उल्लेख किया गया है।

पूर्व अधिकारियों ने दावा किया कि सिस्टम को जल्दबाजी में लागू किए जाने के कारण पास प्रतिशत और टॉप स्कोर पर भी असर पड़ा।

स्वतंत्र न्यायिक या विशेषज्ञ जांच की मांग

पत्र में केंद्र सरकार से एनटीए और सीबीएसई के मूल्यांकन ढांचे की स्वतंत्र न्यायिक या विशेषज्ञ समिति से समीक्षा कराने की मांग की गई है। साथ ही प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए उन्नत सुरक्षा और क्रिप्टोग्राफिक तकनीकों को अपनाने की भी सिफारिश की गई है। पूर्व अधिकारियों ने डिजिटल मूल्यांकन से जुड़े सभी सॉफ्टवेयरों का देशभर में लागू करने से पहले थर्ड पार्टी ऑडिट कराने की मांग भी उठाई है।

शिक्षा मंत्री की जवाबदेही पर उठे सवाल

ओपन लेटर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया गया है। पत्र में उन उदाहरणों का जिक्र किया गया है जब बड़े सार्वजनिक घटनाक्रमों के बाद मंत्रियों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था। इनमें लाल बहादुर शास्त्री, माधवराव सिंधिया, नीतीश कुमार और शिवराज पाटिल के नाम शामिल हैं।

इन पूर्व अधिकारियों ने किया हस्ताक्षर

ओपन लेटर पर हस्ताक्षर करने वालों में कई वरिष्ठ पूर्व अधिकारी शामिल हैं। इनमें पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन, पूर्व स्वास्थ्य सचिव के सुजाता राव, पूर्व पंजाब पुलिस प्रमुख जुलियो रिबेरियो, पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल नजीब जंग शामिल हैं।

JFME ने भी उठाई परीक्षा सुधार की मांग

इधर, ज्वाइंट फोरम फोर मूवमेंट ऑन एजुकेशन (JFME) के तहत शिक्षक और छात्र संगठनों ने भी एनटीए के पुनर्गठन और कथित परीक्षा अनियमितताओं की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन ने कहा कि परीक्षा से जुड़ी लगातार विवादित घटनाओं ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भरोसे का संकट पैदा कर दिया है।

JFME ने सार्वजनिक परीक्षाओं में निजी एजेंसियों की भूमिका कम करने, विश्वविद्यालयों को अधिक स्वायत्तता देने और मौजूदा परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा करने की मांग की। साथ ही CBSE कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के भौतिक पुनर्मूल्यांकन को बिना अतिरिक्त शुल्क उपलब्ध कराने की भी अपील की।