ताज़ा खबर
 

कभी गरीबी के चलते बेचता था चाय, अब गरीब बच्‍चों को देता है मुफ्त कोचिंग, 14 स्‍टूडेंट्स ने पास किया NEET 2019

NEET 2019 Exam Result: 'जिंदगी' फाउंडेशन अजय बहादुर सिंह की एक पहल है जिसके जरिए वंचित छात्रों को मेडिकल शिक्षा मुफ्त प्रदान की जाती है। इस बार यहां से 14 छात्रों ने NEET एग्जाम में सफलता हासिल की है।

Author दिल्ली | June 11, 2019 5:03 PM
प्रतीकात्मक चित्र फोटो सोर्स- सोशल मीडिया

NEET 2019 Exam Result: नीट (NEET) के परिणाम हाल ही में घोषित किए गए थे। जिसमें ओडिशा के 19,244 छात्रों ने सफलता हासिल की। लेकिन खास बात यह है कि इन छात्रों में 14 ऐसे छात्र हैं जिन्होंने ‘जिंदगी’ फाउंडेशन की वजह से यह सफलता हासिल है। इस फाउंडेशन के मालिक अजय बहादुर सिंह ऐसे गरीब बच्‍चों को जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, जो लाखों की फीस नहीं चुका सकते हैं उनको मुफ्त में कोचिंग पढ़ाते हैं। इस बार जब NEET के परिणाम घोषित हुए तो ‘जिंदगी’ फाउंडेशन के 14 छात्रों ने इस परीक्षा में सफलता हासिल कर कामयाबी की नई इबारत लिख दी। एक समय आर्थिक तंगी के चलते अजय को चाय बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

जिंदगी फाउंडेशन की पहल: दरअसल, ओडिशा के जिंदगी फाउंडेशन के मालिक अजय बहादुर सिंह खुद एक डॉक्टर बनना चाहते थे लेकिन पारिवारिक परिस्‍थतियों की वजह से उनका ये सपना पूरा नहीं हो सका। इसके बाद ही उन्‍होंने इस फाउंडेशन की शुरूआत की। यह संस्था नीट की तैयारी कर रहे वंचित छात्र-छात्राओं को भोजन, आवास, कोचिंग और पढ़ने की सुविधा मुफ्त में सुविधा मुहैया कराता है।

National Hindi News, 11 June 2019 LIVE Updates: देश-दुनिया की हर खबर पढ़ने के लिए यहां करें क्लिक

‘जिंदगी’ फाउंडेशन से पास की NEET 2019 परीक्षा: इस बार नीट की परीक्षा में अजय के जिंदगी फाउंडेशन से 14 छात्रों ने सफलता हासिल की है। दैनिक जागरण में छपी खबर के मुताबिक NEET पास करने वाले कृष्णा मोहंतो ने भी ‘जिंदगी’ से ही पढ़ाई की है। उन्होंने नीट की परीक्षा में 720 में से 573 अंक प्राप्त किए हैं और उनकी ऑल इंडिया रैंक 15,295 है। इसके अलावा एक और छात्र अनिरुद्ध नायक ने नीट 2019 में आल इंडिया रैंक 5662 हासिल की है। वह भी ‘जिंदगी’ के छात्र रहे। बता दें कि इस संस्था से साल 2018 में भी 18 छात्रों ने नीट की परीक्षा पास की, जिसमें से 12 ने विभिन्न प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लिया था।

चाय बेचने के लिए होना पड़ा मजबूर: एक अखबार से बात करते हुए अजय बहादुर बताते हैं कि उनके इंजीनियर पिता चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने। लेकिन अचानक घर के हालात बिगड़ने की वजह और और पिता की किडनी ट्रांसप्लांट के कारण परिवार में जबर्दस्त आर्थिक तंगी आ गई। जिसके चलते अजय को चाय बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने किसी तरह सोशियोलॉजी में अपना स्नातक पूरा करने के बाद बच्‍चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। इसके बाद जब उनके हालात कुछ ठीक हुए तो उन्‍होंने जिंदगी फाउंडेशन की शुरुआत कर गरीब छात्रों की मदद करने लगे।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X