राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने यूजीसी-नेट के तीन विषयों के प्रश्नपत्र में त्रुटियों के पाए जाने के बाद फिर से इन विषयों की परीक्षा कराने की घोषणा की है। अंग्रेजी और कॉमर्स विषयों की परीक्षा 09 सितंबर को होगी, जबकि सामाजिक विज्ञान की परीक्षा 10 सितंबर को होगी।

एनटीए ने बताया कि फिर से होने वाली इस परीक्षा के कारण सफल होने वाले उम्मीदवारों की संख्या और प्रत्येक विषय के लिए आवंटित सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा। साथ ही एजेंसी ने कहा कि फिर से होने वाली इस परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

जून में यूजीसी नेट के 84 विषयों के लिए परीक्षा आयोजित की गयी थी, लेकिन परीक्षा के बाद से ही इन तीन विषयों के प्रश्नपत्रों में कई गलतियों के होने के शिकायत मिलने लगने लगे थे। एजेंसी ने इन शिकायतों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी जांच में पाया कि प्रश्नपत्रों में अनुवाद, तथ्यों और टाइपिंग संबंधी कई गलतियां थीं। साथ ही समिति ने स्वीकार किया था कि महत्वपूर्ण व्यक्तियों के नाम भी गलत थे।

प्रश्नपत्र तैयार करने संबंधी प्रक्रियाएं होंगी सख्त

एनटीए ने पुनः परीक्षा की घोषणा करते हुए कहा कि वह इस अनुभव का उपयोग प्रश्नपत्र तैयार करने में करेगी; ताकि अनुवाद, तथ्यों और कंपोजिंग के स्तर पर होने वाली गलतियों को शुरुआत में ही रोका जा सके। एजेंसी ने यह भी कहा है कि वह इस अनुभव का उपयोग प्रश्नपत्र तैयार करने संबंधी प्रक्रियाओं एवं नियमों को मजबूत करने में करेगी, ताकि किसी भी चूक के लिए जवाबदेही तय की जा सके।

एजेंसी ने कहा, “एनटीए एक निष्पक्ष, सटीक और त्रुटिहीन परीक्षा प्रणाली संचालित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ये सभी सुधार उम्मीदवारों के व्यापक हित में और एक अधिक जवाबदेह परीक्षा प्रणाली की नींव को मजबूत करने के लिए किए जा रहे हैं। भविष्य में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक प्रक्रियाओं और नियमों की समीक्षा की जा रही है।”

लेक्चररशिप और शोध अहर्ता के लिए एनटीए साल में दो बार यूजीसी-नेट की परीक्षा का आयोजन करती है। जून में हुई परीक्षा के लिए एजेंसी ने रविवार को ही उत्तर कुंजी जारी की थी। एजेंसी ने कहा है कि बाकी के विषयों के लिए परीणाम अपने तय समय पर ही जारी किए जाएंगे।

गौरतलब है कि एनटीए नीट पेपर लीक के कारण भी काफी विवादों में रहा है। नीट पेपर लीक के बाद छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। एजेंसी ने भी इस विवाद को बाद अपने 47 अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया था।

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शिक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में बताया कि UGC NET परीक्षा देने वाले केवल 6 फीसदी उम्मीदवारों को ही असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए एलिजिबिलिटी मिलती है, जबकि हर साल 11,750 जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) स्लॉट उपलब्ध होते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।