राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने पिछले छह वर्षों में लगभग 448 करोड़ रुपये का सरप्लस (अधिशेष) अर्जित किया है। इस खुलासे के बाद संसदीय स्थायी समिति ने सुझाव दिया है कि इस राशि का उपयोग परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने, परीक्षा संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास और निजी वेंडर्स की निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने में किया जाए।
शिक्षा, महिला, बाल विकास, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की हालिया एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) के अनुसार NTA ने पिछले छह वर्षों में परीक्षाओं के आयोजन से कुल 3,512.98 करोड़ रुपये की आय अर्जित की, जबकि इस अवधि में एजेंसी का कुल खर्च 3,064.77 करोड़ रुपये रहा। इस प्रकार NTA के पास लगभग 448 करोड़ रुपये का अधिशेष फंड जमा हुआ।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत
राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों की घटनाएं अब भी सामने आ रही हैं। इससे छात्रों में असमंजस और तनाव की स्थिति पैदा होती है। समिति ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि एनटीए में अभी “काफी सुधार की जरूरत” है।
केआर राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें जल्द लागू करने की मांग
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने पूर्व इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति (HLCE) की सिफारिशों को लागू करने के लिए एक स्टीयरिंग कमेटी बनाई है। इसके बावजूद परीक्षा अनियमितताओं की घटनाएं जारी हैं।
समिति ने उच्च शिक्षा विभाग से मांग की है कि वह विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए समयबद्ध रोडमैप सार्वजनिक करे और देशभर की प्रतियोगी परीक्षाओं को “फूलप्रूफ” बनाने के लिए व्यापक स्तर पर हितधारकों से चर्चा करे।
ब्लैकलिस्टेड कंपनियों की राष्ट्रीय सूची बनाने का सुझाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई बार प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन से जुड़ी कंपनियां किसी राज्य या संस्थान द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद अन्य राज्यों या संस्थानों में ठेके हासिल कर लेती हैं। इसे रोकने के लिए समिति ने ब्लैकलिस्टेड कंपनियों की राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा सूची तैयार करने की सिफारिश की है, ताकि ऐसी एजेंसियों को दोबारा संवेदनशील कार्य न मिल सकें।
एनटीए ने क्या कहा?
उच्च शिक्षा विभाग ने समिति को बताया कि एनटीए के मुख्य कार्य जैसे प्रश्नपत्र तैयार करना और मूल्यांकन आउटसोर्स नहीं किए जाते हैं। एजेंसी उन वेंडर्स का रिकॉर्ड रखती है जिन पर कार्रवाई की गई है और ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को काम नहीं देती।
विभाग के अनुसार एनटीए एक स्व-वित्तपोषित संस्था है और उसे सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलती। हर साल परीक्षा केंद्रों की बुकिंग, विशेषज्ञों के मानदेय, सॉफ्टवेयर सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बड़ी राशि खर्च होती है।
हर साल औसतन 74.5 करोड़ रुपये बचते हैं
विभाग ने बताया कि खर्चों के बाद NTA के पास औसतन 74.5 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष बचते हैं। इन पैसों का उपयोग अगले वर्ष की परीक्षाओं की तैयारी और प्रारंभिक व्यवस्थाओं में किया जाता है। हालांकि भविष्य की जरूरतों का बजट निर्धारित करने के बाद बची हुई अतिरिक्त राशि का उपयोग अन्य उपयुक्त उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट?
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं को लेकर पारदर्शिता, पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन पर सवाल उठे हैं। ऐसे में संसदीय समिति की यह रिपोर्ट संकेत देती है कि आने वाले समय में NTA की परीक्षा प्रणाली, निगरानी तंत्र और तकनीकी ढांचे को और मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
