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खत्म होगी 5वीं-8वीं कक्षा की ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’? जानिए संसदीय समिति की सिफारिश

स्कूलों में पांचवीं और आठवीं कक्षा तक लागू 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को समाप्त किया जा सकता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने सरकार के 'नो डिटेंशन पॉलिसी' को खत्म करने की सिफारिश का समर्थन किया है।

देश के 23 राज्यों ने स्कूलों में पांचवी एवं आठवीं कक्षा में फेल नहीं करने की नीति में संशोधन करने का समर्थन किया है।

स्कूलों में पांचवीं और आठवीं कक्षा तक लागू ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को समाप्त किया जा सकता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने सरकार के ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को खत्म करने की सिफारिश का समर्थन किया है। समिति ने कहा कि ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ से न छात्र पर सीखने का कोई दबाव रहता है और न शिक्षकों पर सिखाने का कोई दबाव होता है, ऐसे में नीति में बदलाव करने की जरूरत है ताकि प्राथमिक शिक्षा के दौरान छात्र की लर्निंग स्किल्स को बेहतर बनाया जा सके। समिति का मानना है कि बच्चों की लर्निंग स्किल्स के स्तर और रिजल्ट्स को बेहतर बनाने के लिए पांचवीं और आठवीं कक्षा में परीक्षा ली जानी चाहिए। इसी के मद्देनजर समिति ने आरटीई अधिनियम के क्लॉज 2 (1) में प्रस्तावित संशोधन का स्वागत किया है। इसके तहत हर एकेडमिक शेशन के अंत में पांचवीं और आठवीं कक्षा में नियमित परीक्षा का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक में यह प्रावधान भी किया गया है कि अगर छात्र परीक्षा में फेल होता है तो उसे 2 महीने के बाद दोबारा परीक्षा का मौका मिले।

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बच्चों को नि: शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2017 पर अपनी 300वीं रिपोर्ट में पैनल ने सिफारिश की है कि राज्य खुद निर्धारित करें की छात्र को कौन सी कक्षा में डिटेन करना है। इसके मुताबिक राज्य तय करेंगे कि छात्र को पांचवीं, आठवीं या फिर दोनों ही कक्षाओं में डिटेन करना है या फिर प्राथमिक शिक्षा हासिल करने तक उसे डिटेन नहीं ही करना है। हालांकि समिति ने किसी छात्र के डिटेंशन को लेकर केंद्र सरकार से इस संबंध में सामान्य दिशानिर्देश जारी करने को कहा है।

बता दें बच्चों को नि: शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2017 लोक सभा में 11 अगस्त 2017 को पेश किया गया था। इसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित संसदीय स्थायी समिति को भेजा गया था। विधेयक RTE ऐक्ट, 2009 के सेक्शन 16 का विकल्प लाना चाहता है। सेक्शन 16 के तहत स्कूल में भर्ती किसी भी छात्र को प्राथमिक शिक्षा हासिल करने तक डिटेन (फेल) या निष्कासित नहीं किया जाता है।

उल्लेखनीय है कि देश के 23 राज्यों ने स्कूलों में पांचवी एवं आठवीं कक्षा में फेल नहीं करने की नीति में संशोधन करने का समर्थन किया है और इनमें से आठ राज्यों ने इस नीति को पूरी तरह से वापस लेने की पक्ष लिया है। स्कूलों में फेल नहीं करने की नीति के विषय पर विचार करने के लिये 26 अक्तूबर 2015 को राजस्थान के शिक्षा मंत्री के नेतृत्व में एक उप समिति का गठन किया गया था । इस समिति ने छह से 14 वर्ष के बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून के तहत इस नीति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया था ।

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