कल्पना कीजिए… किसी काम को करते हुए न कोई रुकावट आए, न कोई बाधा, न कोई ऐसी परिस्थिति जो गति को रोक पाए। कार्य लगातार और सहज रूप से चलता रहे। ऐसी स्थिति के लिए हिंदी में शब्द ‘निर्बाध’ है। ‘निर्बाध’ केवल बिना रुके होने का भाव नहीं बताता, बल्कि ऐसी स्थिति को व्यक्त करता है जिसमें किसी प्रकार की बाधा या अवरोध न हो।

जनसत्ता.कॉम की ‘सही हिंदी’ मुहिम का उद्देश्य हिंदी भाषा की शुद्धता, सुंदरता और व्याकरणिक समझ को आम पाठकों तक सरल रूप में पहुंचाना है। साथ ही ऐसे शब्दों का प्रयोग, जिनका हम दैनिक करते हैं, लेकिन उनके सही अर्थ और संदर्भ को लेकर स्पष्टता कम होती है। यह पहल बोले और लिखे जाने वाले शब्दों के सही रूप, अर्थ, उच्चारण और व्याकरण को समझाकर भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास है। आज की कड़ी का शब्द ‘निर्बाध’ है।

शब्द-रचना

  • निर्बाध= नि:+बाधा
  • नि:= बिना, रहित, अभाव
  • बाधा= रुकावट, अवरोध

जब निः के बाद कोई घोष व्यंजन (जैसे ब, ग, द आदि) आता है, तो विसर्ग में परिवर्तन होकर आगे वाले व्यंजन के अनुसार रूप बनता है, इसलिए नि: + बाधा= निर्बाध। यहां विसर्ग (:) का र् में परिवर्तन हुआ है, इसलिए यह विसर्ग संधि है।

शब्द का महत्व

‘निर्बाध’ शब्द का प्रयोग प्रतिदिन के जीवन से लेकर प्रशासन, तकनीक, शिक्षा और साहित्य तक कई क्षेत्रों में होता है। जब किसी प्रक्रिया, सेवा या कार्य के लगातार चलते रहने की बात कही जाती है तो उसके लिए ‘निर्बाध’ शब्द उपयुक्त होता है। ध्यान दीजिए कि हमने निर्बाध बिजली आपूर्ति, निर्बाध यातायात, निर्बाध संचार आदि जैसे शब्द अक्सर सुने होंगे।

उदाहरण

  • वर्तमान में इंटरनेट सेवा के निर्बाध संचालन में तनिक रुकावट व्यक्तियों को विचलित कर देती है।
  • छात्र ने कई वर्षों तक निर्बाध मेहनत करके भारतीय प्रशासनिक सेवा में सफलता हासिल की।
  • देश के विकास के लिए आर्थिक नीतियों को निर्बाध गति से लागू किया जाना आवश्यक है।
  • त्योहारों के मौसम में रेलवे ने यात्रियों की निर्बाध यात्रा के लिए विशेष प्रबंध किये हैं।
  • देश में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार ने नई योजना शुरू की है।
  • फुटबॉल खिलाड़ी ने 90 मिनट तक निर्बाध गति से अपना प्रदर्शन जारी रखा।

समानार्थी शब्द

अविराम, निरंतर, अबाधित, सतत, लगातार।

अभिप्राय

‘निर्बाध’ एक ऐसा शब्द है जो सहज गति, निरंतरता और अवरोध-रहित स्थिति को व्यक्त करता है। यह हिंदी की उस क्षमता को दिखाता है, जिसमें एक ही शब्द किसी पूरी परिस्थिति का चित्र खींच देता है।

सही हिंदी 41: ‘बैठक में अन्यान्य विषयों पर भी चर्चा हुई’, जानिए ‘अन्यान्य’ का अर्थ, प्रयोग और शब्द-रचना

आधुनिक हिंदी में ‘अन्यान्य’ का प्रयोग अपेक्षाकृत कम होता है। इसकी जगह ‘अन्य’, ‘विभिन्न’, ‘अनेक’ या ‘दूसरे’ अधिक प्रचलित हैं, लेकिन हिंदी और संस्कृत की परंपरा में एक सुंदर शब्द ‘अन्यान्य’ है, जो विविधता और बहुलता का बोध कराता है। (पूरा लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें)