नीट यूजी री एग्जाम से ठीक दो दिन पहले नागपुर के जिस स्टूडेंट को यह पता चला था कि उसका एग्जाम सेंटर अबू धाबी मिला है वह छात्र फाइनली नागपुर के ही एक सेंटर पर पेपर देने के लिए पहुंच गया है। अबू धाबी सेंटर मिलने के बाद उस स्टूडेंट के पिता ने एनटीए के समक्ष अपनी इस शिकायत को पहुंचाया था। फिर एजेंसी की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि शनिवार शाम 4 बजे तक उन्हें नया सेंटर मिल जाएगा। साथ ही एनटीए ने यह भी कहा था कि उस स्टूडेंट ने खुद ही अबू धाबी का सेंटर चुना था और एनटीए ने यह बात अपनी वेब-एक्टिविटी रिकॉर्ड के आधार पर कही थी।

पिता ने एनटीए के आरोपों पर क्या कहा?

अब एनटीए के इन आरोपों का जवाब पिता ने दिया है। नागपुर के एक सेंटर पर अपने बेटे अब्दुल्लाह मोहम्मद तालिब को लेकर पहुंचे पिता मोहम्मद तालिब ने कहा कि मैं NTA की बात को गलत नहीं कहूंगा, क्योंकि उनके पास कोई सबूत तो होगा ही, लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहूंगा कि अबू धाबी सेंटर का चयन हमारी तरफ से नहीं किया गया।

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तालिब के पिता ने कहा कि फिर यह किसी की शरारत हो सकती है। उन्होंने कहा कि हमारा बच्चा बाहर पेपर देने क्यों जाएगा? हमारा वहां कोई सोर्स नहीं है, कोई रिश्तेदार नहीं है, कोई पासपोर्ट नहीं है, कोई पैसा नहीं है, कुछ भी नहीं है। हम उसे अबू धाबी क्यों भेजेंगे…”

‘परीक्षा के लिए तैयार नहीं हो रहा था बेटा’

अब्दुल्ला के पिता ने कहा कि उनका बेटा परीक्षा देने के लिए तैयार नहीं हो रहा था, लेकिन हमने उसे मनाया और बड़ी मुश्किल से वह पेपर देने के लिए राजी हुआ। उन्होंने कहा, “हम उसे बड़ी मुश्किल से मना पाए। वह बिल्कुल तैयार नहीं हो रहा था, उसे पूरी रात उल्टी हो रही थी। वह बहुत नर्वस था। वह सुबह करीब दस बजे उठा। उसने कोई रिवीजन नहीं किया। इस पेपर के लिए उसे 50 परसेंट कॉन्फिडेंट समझो। वह खुद को एग्जाम में बैठने के लिए मजबूर कर रहा है क्योंकि हमने उसे मनाया। वह बहुत कॉन्फिडेंट नहीं है, लेकिन उसने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है। एक बार जब वह एग्जाम देना शुरू कर देगा, तो वह धीरे-धीरे नॉर्मल हो जाएगा।”

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि इस स्टूडेंट को नीट यूजी री एग्जाम के लिए सेंटर अबू धाबी मिला था और इसकी जानकारी एग्जाम से दो दिन पहले ही हुई थी। अब्दुल्ला के पिता ने मीडिया से कहा था कि 14 जून को एडमिट कार्ड जारी हो गया था, लेकिन तब से एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं हो रहा था। एडमिट कार्ड शुक्रवार को डाउनलोड किया तो पता चला कि सेंटर अबू धाबी मिला है। यह देखकर बेटा तो सदमे में चला गया। फिर हमने एनटीए को इसकी शिकायत की तो उन्होंने शनिवार शाम 4 बजे तक हमें नया सेंटर अलॉट कर दिया।

वहीं इस मामले में एनटीए की ओर से कहा गया था कि हमारा वेब-एक्टिविटी रिकॉर्ड बताता है कि नागपुर के उस छात्र ने ओपन करेक्शन विंडो के दौरान अपनी सिटी में बदलाव करके अबू धाबी सेंटर खुद ही चुना था। एनटीए ने बताया है कि जब री एग्जाम की डेट घोषित कर दी गई थी उसके बाद कैंडिडेट के अपने रजिस्टर्ड लॉगिन के जरिए ओपन करेक्शन विंडो के दौरान सिटी में बदलाव किया गया था जिसमें लगातार सिंगल-यूज़र एक्सेस पैटर्न था।