इस साल नीट यूजी परीक्षा में बैठने वाले कैंडिडेट्स इन दिनों अलग तरह का ट्रॉमा झेल रहे हैं, क्योंकि यह परीक्षा 03 मई को आयोजित की जा चुकी थी, लेकिन पेपर लीक के चलते एनटीए ने इस एग्जाम को रद्द कर दिया था। इस परीक्षा में 23 लाख के करीब कैंडिडेट उपस्थित हुए थे। एनटीए ने बाद में ऐलान किया कि यह परीक्षा दोबारा 21 जून को आयोजित होगी। अब री एग्जाम में 3 दिन का ही समय बचा है। ऐसे में उम्मीदवारों की जो तैयारी थी वह लगभग अंतिम चरण में है, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले तनाव को दूर करने के लिए आपको एक्सपर्ट की सलाह जरूर काम आ सकती है।
कुछ नया इस वक्त न करें शुरू
विद्यामंदिर क्लासेस के फिजिक्स डिपार्टमेंट के HOD जितेंद्र आहूजा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि री एग्जाम को लेकर अब ज्यादा समय नहीं बचा है इसलिए नए चैप्टर की शुरुआत करना तो इस वक्त सही नहीं है बल्कि आपने अभी तक जो पढ़ा है उसके सभी जरूरी पहलुओं का रिव्यू करने का यह समय है। उन्होंने बताया कि जैसे कॉन्सेप्ट, फॉर्मूला, डायग्राम, रिएक्शन और NCERT मटीरियल का रिव्यू किया जा सकता है। साथ ही उन गलतियों से बचने का अभ्यास करें जो बचें जो आपने अपने पिछले अटेम्प्ट में की थीं।
‘स्टूडेंट्स को शांत रहने की जरूरत है’
जितेंद्र आहूजा के मुताबिक, अब जो समय बचा है उसमें आप अपना पूरा फोकस अपने मौजूदा ज्ञान का इस्तेमाल करने पर लगाएं। आपके पास महीनों की तैयारी और प्रैक्टिस टेस्ट की रिवीजन है। इस दौरान आपने जो भी ज्ञान और कॉन्सेप्ट हासिल किए हैं, वे अभी भी वहीं हैं। आहूजा ने कहा कि कई स्टूडेंट्स इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या नया एग्जाम पुराने वाले जैसा ही होगा? क्या इसका डिफिकल्टी लेवल अलग होगा? इस टेस्ट के बारे में कोई भी पक्के तौर पर नहीं बता सकता। हालांकि, आप टेस्ट देने से पहले यह तय कर सकते हैं कि आप टेस्ट में कैसा रिस्पॉन्स देंगे। एक मुश्किल टेस्ट हर किसी के लिए मुश्किल होगा अगर टेस्ट में कई मुश्किल सवाल देखने पर उनका दिमाग साफ न हो। इसका मतलब है कि एक स्टूडेंट की शांत रहने की काबिलियत आमतौर पर उसे टेस्ट में अच्छा करने में मदद करेगी, जबकि एक स्टूडेंट कई मुश्किल सवाल देखकर घबरा जाता है।
टाइम मैनेजमेंट का रखें ध्यान
जितेंद्र आहूजा ने बताया है कि एग्जाम के दौरान टाइम मैनेजमेंट पर फोकस सबसे ज्यादा होना चाहिए। स्टूडेंट्स को यह सलाह दी जाती है कि जब पेपर आए तो आप उन सवालों से शुरू करें जो जाने-पहचाने हों और जिन्हें हल करना आसान हो, क्योंकि इससे आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और मुश्किल कैलकुलेशन या गहरी कॉन्सेप्चुअल समझ वाली ज्यादा मुश्किल प्रॉब्लम को हल करने से पहले पॉजिटिव मोमेंटम बनाने में मदद मिलती है। पेपर में किसी एक प्रश्न पर बहुत ज्यादा समय खर्च करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
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एनटीए की गाइडलाइन जरूर पढ़ लें
एकेडमिक तैयारी के अलावा, प्रैक्टिकल तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। स्टूडेंट्स को एग्जाम से कम से कम एक दिन पहले अपना एडमिट कार्ड, वैलिड फोटो आइडेंटिफिकेशन, फोटो और कोई भी दूसरा ज़रूरी डॉक्यूमेंट तैयार रखना चाहिए। उन्हें एग्जाम सेंटर के अंदर कौन सी चीजें ले जाने की इजाजत है और किसकी नहीं इसके बारे में एनटीए की गाइडलाइन को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए। कैंडिडेट्स को आखिरी मिनट के स्ट्रेस से बचने और टेस्ट शुरू होने से पहले मेंटली सेटल होने के लिए रिपोर्टिंग टाइम से काफी पहले एग्जाम सेंटर पहुंचने का प्लान बनाना चाहिए।
मेंटल हेल्थ का कैसे रखें ध्यान?
नीट री-एग्जाम से पहले अगर आप मेंटल हेल्थ से जूझ रहे हैं तो आपको सबसे पहले अपना रूटीन हेल्दी रखने की जरूरत है। एग्जाम न सिर्फ एकेडमिक नॉलेज बल्कि मेंटल रेजिलिएंस का भी टेस्ट लेते हैं। एंग्जायटी और स्ट्रेस एग्जाम के दौरान कॉन्संट्रेशन और फैसले लेने पर असर डाल सकते हैं। इसलिए स्टूडेंट्स को टेस्ट से पहले के आखिरी दिनों का इस्तेमाल एक हेल्दी रूटीन बनाए रखने के लिए करना चाहिए। पूरी नींद, सही हाइड्रेशन और बैलेंस्ड खाना याददाश्त, फोकस और ओवरऑल परफॉर्मेंस में जरूरी रोल निभाते हैं। एग्जाम से एक दिन पहले देर तक जागकर पढ़ाई करने से फायदे से ज्यादा नुकसान हो सकता है, क्योंकि थकान एग्जाम के दिन परफॉर्मेंस पर बुरा असर डाल सकती है।
‘यह पेपर आपके लिए आखिरी मौका नहीं’
पेपर को लेकर सबसे जरूरी बात यह कि री-एग्जाम में आपकी परफॉर्मेंस से आपकी पहचान नहीं होती है। मार्कर्स सिर्फ एक दिन की आपकी परफॉर्मेंस का एक स्नैपशॉट होते हैं। मार्क्स आपके पक्के इरादे, लगन, डिसिप्लिन, या पिछले कई महीनों की आपकी मेहनत को नहीं दिखाते इसलिए भले पेपर सही ना जाए आपको हताश होने की जरूरत नहीं है। इस एग्जाम के लिए आपने जो किया है उस पर आपको गर्व होना चाहिए।
