नीट यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट से कथित पेपर लीक की तैयारी को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। लातूर के रेनुकाई करियर कोचिंग इंस्टीट्यूट के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर के 18 वर्षीय बेटे ने जांच एजेंसी को बताया है कि परीक्षा से पहले उसे लातूर के सिद्धिविनायक अस्पताल में स्पेशल केमिस्ट्री क्लास के लिए भेजा गया था। कथित तौर पर इन कक्षाओं में एनटीए के केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी ने 132 सवाल और उनके जवाब डिक्टेट कराए थे।

सीबीआई की चार्जशीट में युवक के बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है। चार्जशीट में कुल 360 गवाहों का उल्लेख है और 13 आरोपियों को नामजद किया गया है। यह चार्जशीट 28 जुलाई को दिल्ली की फास्ट-ट्रैक कोर्ट में दाखिल की गई थी।

पिता ने कहा था- ‘NEET एक्सपर्ट’ से मिलो

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, युवक ने CBI को बताया कि करीब 15 अप्रैल को उसके पिता ने उसे सिद्धिविनायक अस्पताल जाकर एक केमिस्ट्री शिक्षक से मिलने के लिए कहा था। युवक ने कथित तौर पर अपने पिता से पूछा कि जब उनका परिवार खुद कोचिंग सेंटर चलाता है तो उसे किसी दूसरे शिक्षक के पास क्यों भेजा जा रहा है।

बताया जाता है कि उसके पिता ने उसे कहा कि संबंधित शिक्षक NEET के विशेषज्ञ हैं और परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उपलब्ध करा सकते हैं। इसके बाद युवक 18, 19 और 22 अप्रैल को सिद्धिविनायक अस्पताल गया।

अस्पताल की तीसरी मंजिल पर हुईं कथित स्पेशल क्लास

सीबीआई को दिए कथित बयान के अनुसार, युवक को अस्पताल की तीसरी मंजिल पर ले जाया जाता था। वहां एक बुजुर्ग व्यक्ति करीब डेढ़ से दो घंटे तक केमिस्ट्री की रिवीजन क्लास लेते थे। बाद में युवक ने उस व्यक्ति की पहचान प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी के रूप में की।

युवक के मुताबिक, कुलकर्णी अपने साथ कागजों का एक बंडल लेकर आते थे और उसमें लिखे सवाल-जवाब बोलकर लिखवाते थे। युवक ने इन कक्षाओं के दौरान अपनी नोटबुक में कथित तौर पर 132 केमिस्ट्री प्रश्न और उनके उत्तर लिखे।

सीबीआई की जांच में युवक ने अस्पताल संचालक मनोज भगवानराव शिरूरे की भी पहचान की। शिरूरे को युवक ने अपना पारिवारिक डॉक्टर बताया। दोनों कुलकर्णी और शिरूरे को मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।

20 अप्रैल को नहीं आए शिक्षक

युवक के कथित बयान के मुताबिक, वह 20 अप्रैल को भी अस्पताल पहुंचा था, लेकिन उस दिन कुलकर्णी नहीं आए। इसके चलते वह वापस लौट गया। 21 अप्रैल को तबीयत खराब होने के कारण वह अस्पताल नहीं गया। इसके बाद 22 अप्रैल को वह दोबारा अस्पताल पहुंचा। वहां रिसेप्शनिस्ट से मिलने के बाद वह तीसरी मंजिल पर गया और कथित तौर पर कुलकर्णी की एक और क्लास में शामिल हुआ।

CBI के अनुसार, युवक ने वीडियो कॉल के जरिए अस्पताल के रिसेप्शनिस्ट भुजंग राजकुमार बिराजदार की भी पहचान की।

पिता नोटबुक में लिखे सवाल देखते थे

जांच एजेंसी को दिए बयान के अनुसार, प्रत्येक क्लास के बाद युवक घर लौटकर अपनी नोटबुक में लिखे सवालों को अपने पिता को दिखाता था। हालांकि, युवक ने कथित तौर पर कहा कि उसके पिता इन सवालों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे।

युवक ने बताया कि उसने भी इन सवालों को गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें याद नहीं किया। उसके अनुसार, यदि उसने उन सवालों पर भरोसा किया होता तो केमिस्ट्री में उसके पूरे अंक आ सकते थे। नीट एग्जाम में युवक को केमिस्ट्री में 180 में से 117 अंक मिले थे।

क्या पिता ने भी सवालों की कॉपी बनाई?

जांच एजेंसी ने युवक से कथित तौर पर यह भी पूछा कि क्या उसके पिता ने कुलकर्णी द्वारा बताए गए सवालों को कॉपी किया या उनकी अलग से कोई नोट तैयार की थी। युवक ने कथित तौर पर कहा कि उसने अपने पिता को अपनी मौजूदगी में ऐसे सवालों की अलग से नोट बनाते हुए नहीं देखा।

हालांकि, उसने यह भी बताया कि उसके पिता उसकी नोटबुक में लिखे सवालों को देखते थे। यह बयान मामले में कथित पेपर लीक नेटवर्क और परीक्षा से पहले छात्रों तक संभावित प्रश्न पहुंचने की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कबाड़ में बेच दी गई नोटबुक

सीबीआई ने युवक से यह भी पूछा कि कुलकर्णी द्वारा बताए गए सवालों वाली नोटबुक अब कहां है। सूत्रों के अनुसार, युवक ने जांच एजेंसी को बताया कि नीट यूजी परीक्षा खत्म होने के बाद उसने अपनी नोटबुक कबाड़ खरीदने वाले को बेच दी थी। इससे जांच एजेंसी के सामने उस कथित नोटबुक को बरामद करने की चुनौती भी सामने आई।

अस्पताल में विजिटर एंट्री का रिकॉर्ड नहीं मिला

सीबीआई ने सिद्धिविनायक अस्पताल के रिसेप्शनिस्ट से अस्पताल में आने वाले लोगों के रिकॉर्ड के बारे में भी पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि अस्पताल के रजिस्टर में सामान्य विजिटर्स की एंट्री दर्ज नहीं की जाती थी। केवल मरीजों की एंट्री का रिकॉर्ड रखा जाता था। युवक के बयान के अनुसार, 18 अप्रैल को अस्पताल में डॉक्टर मनोज शिरूरे मौजूद थे और उन्होंने रिसेप्शनिस्ट भुजंग बिराजदार को उसे तीसरी मंजिल पर ले जाने के लिए कहा था।

13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट

नीट यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई ने 28 जुलाई को दिल्ली की फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। इसमें 13 आरोपियों के नाम शामिल हैं और 360 गवाहों का उल्लेख किया गया है।

चार्जशीट में शामिल युवक का बयान जांच एजेंसी द्वारा परीक्षा से पहले कथित तौर पर महत्वपूर्ण प्रश्नों की जानकारी उपलब्ध कराने की गतिविधियों के संदर्भ में पेश किया गया है। हालांकि, किसी आरोपी के खिलाफ आरोप अदालत में साबित होना अभी बाकी है और चार्जशीट में दर्ज आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता।

पेपर लीक केस में क्यों अहम है यह बयान?

इस मामले में युवक का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें परीक्षा से कई दिन पहले कथित तौर पर प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए जाने, उन्हें लिखवाए जाने और एक विशेष स्थान पर कक्षाएं आयोजित किए जाने का विवरण सामने आता है।

सीबीआई की जांच का अगला महत्वपूर्ण पहलू यह पता लगाना है कि कथित तौर पर उपलब्ध कराए गए 132 सवालों और वास्तविक NEET UG प्रश्नपत्र के बीच कितना संबंध था और परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र तक पहुंच की पूरी श्रृंखला में कौन-कौन लोग शामिल थे।