नीट यूजी 2026 पेपर लीक की घटना ने एक बार फिर देश में एंट्रेंस एग्जाम आधारित शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस एग्जाम को कंडक्ट कराने वाली संस्था यानी NTA की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। यहां तक कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल भी सवालों के घेरे में है। यह उनके कार्यकाल की पांचवीं ऐसी घटना है जहां पेपर लीक हुआ है या फिर तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से परीक्षा रद्द की गई है। नीट पेपर लीक 2026 की घटना के बाद से एजुकेशन सिस्टम पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इस बीच एजुकेशन एक्सपर्ट और Career360 के फाउंडर माहेश्वर पेरी ने जनसत्ता के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में देश के शिक्षा मॉडल को ही छात्रों के अन्याय बताया है।

‘3 घंटे के एग्जाम’ पर टिका है शिक्षा मॉडल

उन्होंने कहा है कि नीट यूजी पेपर लीक 2026 का मामला सामने आने के बाद एंट्रेंस एग्जाम आधारित शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नीट यूजी 2024 और 2026 विवाद पर बोलते हुए माहेश्वर पेरी ने कहा कि भारत का पूरा शिक्षा मॉडल अब “तीन घंटे की परीक्षा” पर टिका हुआ है, जो करोड़ों छात्रों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक कराना बहुत आसान हो चुका है। उन्होंने कह कि अगर बैंक मैनेजर, सिक्योरिटी स्टाफ, बोर्ड इंचार्ज और सेंटर हेड जैसे लोग आपस में मिल जाएं तो पेपर एग्जाम से पहले ही बाहर आ जाता है।

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क्यों लीक हो रही हैं परीक्षाएं?

माहेश्वर पेरी से जब पेपर लीक के कारण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि देश में पिछले कुछ सालों से पेपर लीक कराना बहुत आसान हो गया है और इसकी वजह यही है कि पेपर की देखरेख की जिम्मेदारी ही जिसे दी जाती है वहीं एग्जाम की पवित्रता के साथ खिलवाड़ कर देते हैं। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर होने वाली परीक्षाओं में पेपर ट्रांसपोर्टेशन और सेंटर मैनेजमेंट सबसे बड़ी कमजोरी बन चुके हैं और यही वजह हैं कि परीक्षाएं लीक हो रही हैं।

‘स्कूल शिक्षा को भी महत्व मिलना चाहिए’

उन्होंने आगे कहा कि देश में स्कूल शिक्षा की अहमियत लगभग खत्म कर दी गई है। आज छात्रों से कहा जाता है कि अब तक जो पढ़ा, उसे भूल जाओ एंट्रेंस एग्जाम के 3 घंटे ही तुम्हारी जिंदगी तय करेंगे। उनका मानना है कि केवल एक परीक्षा के आधार पर भविष्य तय करना छात्रों के साथ अन्याय है करियर की दिशा में स्कूल की शिक्षा को भी महत्व मिलना चाहिए।

कोचिंग व्यवस्था ने शिक्षा में बढ़ाई असमानता

माहेश्वर पेरी ने इस बातचीत के दौरान देश में शिक्षा में बढ़ रही असमानता को लेकर भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि महंगी कोचिंग व्यवस्था ने शिक्षा में असमानता बढ़ाई है। सरकारी स्कूलों और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा करना लगातार कठिन होता जा रहा है। महेश्वर पेरी ने दावा किया कि कोचिंग इंडस्ट्री हजारों करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बन चुकी है और सरकार को इससे GST के जरिए भारी राजस्व मिलता है। उनके मुताबिक इससे कोचिंग सिस्टम को अप्रत्यक्ष बढ़ावा मिलता है।

यहां देखें माहेश्वर पेरी का पूरा पॉडकास्ट