नीट यूजी 2026 री एग्जाम का रिजल्ट गुरुवार (16 जुलाई 2026) को जारी कर दिया गया। एनटीए ने रिजल्ट के साथ-साथ नीट यूजी की फाइनल आंसर की भी जारी कर दी। इस एग्जाम में 22 लाख के करीब बच्चे शामिल हुए थे जिसमें से 11.21 लाख कैंडिडेट इस एग्जाम में सफल हुए हैं जो कि आगे काउंसलिंग राउंड का हिस्सा बनेंगे। नीट यूजी 2026 काउंसलिंग का आधिकारिक शेड्यूल अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन जुलाई के अंत या अगस्त 2026 के पहले सप्ताह में काउंसलिंग शुरू होने की उम्मीद है जिसका शेड्यूल जल्द ही जारी कर दिया जाएगा।
काउंसलिंग को लेकर न रखें कोई कन्फ्यूजन
नीट यूजी काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू होने से पहले हम आपको उससे जुड़ी हर जानकारी यहां उपलब्ध करा रहे हैं, जिसकी सहायता से आप काउंसलिंग की तैयारी शेड्यूल जारी होने से पहले ही कर सकें। साथ ही काउंसलिंग के वेटेज को समझ सकें। नीट यूजी काउंसलिंग को लेकर नए कैंडिडेट और उनके पैरेंट्स में कन्फ्यूजन की स्थिति रहती है क्योंकि इस प्रोसेस में कई अथॉरिटी, कोटा और राउंड शामिल होते हैं जिनमें से हर एक के अपने नियम और डेडलाइन होती है।
यहां हम आपको बता रहे हैं कि NEET UG काउंसलिंग प्रक्रिया कैसे काम करती है? इस प्रक्रिया को संचालित कौन करता है? कौन सा कोटा है और काउंसलिंग में शामिल होने की एलिजिबिलिटी क्या होती है? साथ ही काउंसलिंग को लेकर किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। यह सब जानकारी आपको इस आर्टिकल में मिलेगी।
NEET यूजी काउंसलिंग के लिए निर्धारित MCC की पात्रता
नीट यूजी परीक्षा पास करने के बाद भी उम्मीदवारों को काउंसलिंग में हिस्सा लेने के लिए कुछ बेसिक पात्रता पूरी करनी होती हैं जिनका जिक्र हम यहां कर रहे हैं।
– नीट यूजी काउंसलिंग में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को अपनी कैटेगरी के लिए तय मिनिमम पर्सेंटाइल नीट यूजी एग्जाम में प्राप्त करना होता है। आमतौर पर जनरल/EWS कैंडिडेट्स को 50 पर्सेंटाइल और SC/ST/OBC कैंडिडेट्स को 40 पर्सेंटाइल के साथ नीट यूजी परीक्षा पास करनी होती है।
– काउंसलिंग राउंड में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की उम्र कम से कम 17 साल होनी चाहिए।
– काउंसलिंग में शामिल होने वाले उम्मीदवार फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी/बायोटेक्नोलॉजी, और इंग्लिश कोर सब्जेक्ट के साथ 12वीं पास होने चाहिए।
– भारतीय नागरिक, NRI, OCI, और PIO खास सीट कैटेगरी के तहत काउंसलिंग के लिए पात्र हैं।
– जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के कैंडिडेट ऑल इंडिया कोटा (AIQ) सीटों और डीम्ड यूनिवर्सिटी के लिए काउंसलिंग में हिस्सा लेने के लिए पात्र हैं। हालांकि काउंसलिंग में उनकी बड़ी हिस्सेदारी में पहले से ही दूसरे राज्यों के मुकाबले थोड़े अलग नियम रहे हैं।
नीट यूजी काउंसलिंग को कौन आयोजित करता है?
बता दें कि नीट यूजी काउंसलिंग को दो बॉडी आयोजित करती हैं। एक तो मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और दूसरी स्टेट अथॉरिटी। हालांकि दोनों की प्रक्रिया एक ही ट्रैक पर चलती है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) जो कि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के तहत काम करती है वह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 15 परसेंट ऑल इंडिया कोटा (AIQ) सीटों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया आयोजित करती है।
इसके अलावा सेंट्रल यूनिवर्सिटी (बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी की जामिया मिलिया इस्लामिया में डेंटिस्ट्री फैकल्टी), डीम्ड यूनिवर्सिटी, AIIMS, JIPMER, ESIC इंस्टीट्यूशन और आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे की 100 परसेंट सीटों के लिए भी MCC ही काउंसलिंग प्रक्रिया आयोजित करती है।
अब बात आती है स्टेट काउंसलिंग की तो वहां राज्य स्तर पर बनी हुई काउंसलिंग अथॉरिटी सरकारी कॉलेजों में बाकी 85 परसेंट स्टेट-कोटे सीटों के साथ-साथ सरकारी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 100 परसेंट सीटों के लिए अलग से काउंसलिंग प्रक्रिया चलाती हैं। हर राज्य की अपनी काउंसलिंग बॉडी, पोर्टल और शेड्यूल होता है जो MCC से अलग होता है।
MCC का काउंसलिंग प्रोसेस
नीट यूजी काउंसलिंग का शेड्यूल MCC पोर्टल mcc.nic.in पर जारी किया जाता है। कैंडिडेट्स को एमसीसी और अपने-अपने स्टेट काउंसलिंग पोर्टल दोनों के लिए रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है। एमसीसी का काउंसलिंग प्रोसेस 4 राउंड में कंप्लीट होता है। इसमें राउंड 1, राउंड 2, राउंड 3 / मॉप-अप राउंड और स्ट्रे वैकेंसी राउंड शामिल है।
- राउंड 1 जो कि काउंसलिंग प्रक्रिया का फर्स्ट सीट अलॉटमेंट प्रोसेस होता है उसमें वहीं उम्मीदवार शामिल होते हैं जिन्होंने काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया होता है।
- राउंड 2 में वह उम्मीदवार शामिल होते हैं जिन्हें पहले राउंड में सीट नहीं मिलती या फिर अपनी सीट को वह अपग्रेड करना चाहते हैं।
- मॉप अप राउंड पहले दो राउंड के बाद आयोजित होता है। यह राउंड बाकी बची सीटों को भरने के लिए आयोजित होता है। इस राउंड के लिए पात्र उम्मीदवार चॉइस फिलिंग कर सकते हैं।
- सभी नियमित राउंड पूरे होने के बाद यदि सीटें खाली रह जाती हैं तो उनके लिए अंतिम राउंड आयोजित किया जाता है। इसे स्ट्रे वैकेंसी राउंड कहते हैं। इसमें केवल पात्र और निर्धारित नियमों के अनुसार उम्मीदवार भाग ले सकते हैं।
चॉइस फिलिंग कैसे करते हैं?
काउंसलिंग का शेड्यूल जारी होने के बाद उम्मीदवारों को इस प्रोसेस का हिस्सा बनने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होता है और जो एक बार रजिस्ट्रेशन करा देते हैं वह कैंडिडेट चॉइस-फिलिंग स्टेज में जाते हैं। यह वह स्टेज भी है जहां सबसे अधिक गलतियां होती हैं। कैंडिडेट कितने कॉलेज और कोर्स लिस्ट कर सकता है, इसकी कोई लिमिट नहीं है। MCC की सलाह है कि हर उस ऑप्शन को लिस्ट करें जिसे स्टूडेंट सच में स्वीकार करेगा। डेडलाइन से पहले चॉइस को लॉक करना होता है। अगर कोई कैंडिडेट उन्हें लॉक करना भूल जाता है, तो सिस्टम ऑटोमैटिकली पिछली बार सेव की गई प्रेफरेंस को लॉक कर देता है।
सीट अलॉटमेंट के बाद का प्रोसेस
चॉइस फिलिंग के बाद उम्मीदवारों के लिए MCC और स्टेट अथॉरिटी अलग-अलग सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी करती हैं। उम्मीदवारों का जहां-जहां नाम आ जाता है उन्हें उस संस्थान में जरूरी दस्तावेज लेकर रिपोर्ट करना होता है। इसके लिए आमतौर पर ओरिजिनल डॉक्यूमेंट और फोटोकॉपी दोनों ले जाने की जरूरत होती है, जिनमें शामिल हैं:
–NEET एडमिट कार्ड
–रैंक लेटर
–MCC प्रोविजनल अलॉटमेंट लेटर
–क्लास 10 और क्लास 12 के सर्टिफिकेट और मार्कशीट
–एक वैलिड फोटो ID
