नागपुर के एक स्टूडेंट को नीट री एग्जाम का सेंटर अबू धाबी मिलने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है। दरअसल, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एनटीए ने कहा है कि हमारा वेब-एक्टिविटी रिकॉर्ड बताता है कि नागपुर के उस छात्र ने ओपन करेक्शन विंडो के दौरान अपनी सिटी में बदलाव करके अबू धाबी सेंटर खुद ही चुना था। एनटीए ने बताया है कि जब री एग्जाम की डेट घोषित कर दी गई थी उसके बाद कैंडिडेट के अपने रजिस्टर्ड लॉगिन के जरिए ओपन करेक्शन विंडो के दौरान सिटी में बदलाव किया गया था जिसमें लगातार सिंगल-यूज़र एक्सेस पैटर्न था।
क्या कहा है एनटीए ने ?
एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए एनटीए ने बताया कि नीट री एग्जाम की डेट घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए एग्जाम-सिटी करेक्शन (Correction) विंडो री ओपन की गई थी। उस समय करीब 3.2 लाख अभ्यर्थियों ने इस सुविधा का उपयोग किया और उनमें से 99.5 प्रतिशत से अधिक स्टूडेंट्स को उनकी पसंद की एग्जाम सिटी आवंटित की गई। एनटीए ने कहा कि हमारा वेब रिकॉर्ड बताता है अभ्यर्थी के अपने लॉगिन के जरिए एग्जाम सिटी में बदलाव हुआ था।
एजेंसी ने स्टूडेंट के पिता से किया कॉन्टैक्ट
एनटीए ने आगे बताया कि नागपुर के उस कैंडिडेट द्वारा अबू धाबी सेंटर चुने जाने के बावजूद NTA को 19 जून की शाम (एग्जाम से सिर्फ 48 घंटे पहले) सेंटर को नागपुर में बदलने के लिए एक इनफॉर्मल रिक्वेस्ट मिली। NTA ने तुरंत बदलाव शुरू किया और 19 तारीख की शाम को ही कैंडिडेट के पिता से कॉन्टैक्ट किया ताकि उन्हें फॉर्मल प्रोसेस पूरा करने में मदद मिल सके।
स्टूडेंट फर्स्ट हमारी प्रायोरिटी है- एनटीए
एनटीए ने बताया कि एक बार कैंडिडेट के क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके सेंटर अबू धाबी में बदल दिया गया था और दो बार यह दिखाया गया था कि सेंटर अबू धाबी है। इसके बावजूद NTA ने कैंडिडेट की रिक्वेस्ट मान ली और सेंटर बदलने पर एक्शन लिया गया। एजेंसी ने कहा कि हमारी प्रायोरिटी यह है कि कोई भी कैंडिडेट एडमिनिस्ट्रेटिव डाउट की वजह से एग्जाम मिस न करे और हम ‘स्टूडेंट-फर्स्ट’ की पॉलिसी को प्रायोरिटी देते हैं।
