NEET-PG 2025 के क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल में किए गए संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (4 फरवरी 2026) को एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) को नोटिस भेजकर उनसे जवाब मांगा है। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 6 फरवरी निर्धारित की है।
कटऑफ पर्सेंटाइल में क्यों हुई थी गिरावट?
NBEMS की ओर से ऐसा इसलिए किया गया था ताकि कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी भी स्नातकोत्तर मेडिकल सीट के लिए काउंसलिंग के तीसरे राउंड में शामिल हो सकें, लेकिन एक्सपर्ट को कटऑफ पर्सेंटाइल में की गई यह गिरावट इस परीक्षा की गरिमा को गिराने वाली लगी। जिस दिन यह अधिसूचना आई थी उसी दिन सोशल मीडिया पर इस फैसले का काफी विरोध हुआ था।
याचिका में क्या दी गई दलील?
अब कई दिनों के बाद सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन, डॉ. सौरव कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल और डॉ. आकाश सोनी ने दाखिल की थी। याचिका में तर्क दिया गया कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में न्यूनतम योग्यता मानकों में कमी मनमाना, असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।
संशोधित क्वालिफाइंग मानदंड व कट-ऑफ स्कोर
| कैटेगिरी | न्यूनतम क्वालिफाइंग मानदंड (सूचना बुलेटिन के अनुसार) | पुराना कट-ऑफ स्कोर (800 में से) | संशोधित क्वालिफाइंग मानदंड | संशोधित कट-ऑफ स्कोर (800 में से) |
| जनरल / EWS | 50वां परसेंटाइल | 276 | 7वां परसेंटाइल | 103 |
| जनरल PwBD | 45वां परसेंटाइल | 255 | 5वां परसेंटाइल | 90 |
| SC / ST / OBC (PwBD सहित) | 40वां परसेंटाइल | 235 | 0वां परसेंटाइल | –40 |
