NEET PG 2025 के क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल में किए गए संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा यह मामला अब निपटारे की ओर बढ़ता दिख रहा है। दरअसल, केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBEMS) ने सर्वोच्च अदालत में यह कहा है कि कट ऑफ को घटाकर 0 किए जाने से करीब 1 लाख उम्मीदवार काउंसलिंग के लिए पात्र हो गए हैं। इसका मतलब है कि यह एडमिशन पाने के हकदार होंगे। ऐसे में अगर कोई नेगेटिव फैसला लिया जाता है तो यह उन सभी कैंडिडेट पर असल डालेगा। केंद्र और NBEMS ने इसी को आधार मानते हुए जनहित याचिका को खारिज किया जाना चाहिए।
कोर्ट में केंद्र ने क्या दी दलील
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBEMS) ने कहा कि पहले के नियमों के हिसाब से 1,28,116 उम्मीदवार ही योग्य थे, लेकिन कट-ऑफ में संशोधन होने के बाद अब कुल 2,24,029 उम्मीदवार काउंसलिंग के लिए योग्य हो गए हैं। इसका मतलब है कि कुल 95,913 नए उम्मीदवार काउंसलिंग प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। बोर्ड ने कहा कि यह उम्मीदवार अब स्पेशलाइजेशन की सीटों के लिए लाइन में हैं। बोर्ड ने कहा है कि इस स्टेज पर कोई भी दखल सीधे इन कैंडिडेट पर असर डालेगा और सिर्फ इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दी जाए। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।
बोर्ड ने फैसले को बताया है सही
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही है। इस मामले में अगली सुनवाई 23 फरवरी को होनी है। बोर्ड (NBEMS) ने अदालत में अपना हलफनामा जमा किया है। बोर्ड का कहना है कि कट-ऑफ कम करने का फैसला बिल्कुल सही है और इससे काउंसलिंग में उम्मीदवारों का दायरा बढ़ा है।
18 हजार सीटें खाली रहने के बाद हुआ संशोधन
बता दें कि देशभर के मेडिकल कॉलेजों में पीजी (MD/MS) की करीब 18,000 सीटें खाली रहने के बाद NBEMS और केंद्र सरकार ने कट-ऑफ पर्सेंटाइल में बदलाव किया था। इसको लेकर काफी विवाद हुआ। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर बोर्ड के इस फैसले को असंवैधानिक बताया गया। याचिका में तर्क दिया गया था कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में न्यूनतम योग्यता मानकों में कमी मनमाना, असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।
