एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब को लेकर चल रहे विवाद में अहम मोड़ आ गया है। प्रोफेसर मिशेल डैनिनो ने पहली बार खुलकर अपना पक्ष रखा है और सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। इस हलफनामे में उन्होंने कहा कि, विवादित अध्याय किसी एक या तीन व्यक्तियों द्वारा नहीं, बल्कि “सामूहिक और सहयोगात्मक प्रक्रिया” के तहत तैयार किया गया था।

क्या है पूरा मामला?

फरवरी 2026 में कक्षा 8 की किताब Exploring Society: India and Beyond के एक अध्याय में न्यायपालिका पर लिखे गए हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। खासकर “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” से जुड़ा कंटेंट चर्चा में आया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

11 मार्च 2026 को कोर्ट ने एक सख्त आदेश में मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार को किसी भी सरकारी फंड से जुड़े पाठ्यक्रम या टेक्स्टबुक कार्य से अस्थायी रूप से अलग करने का निर्देश दिया। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि ये लोग अपना पक्ष रखते हैं, तो आदेश में संशोधन संभव है।

डैनिनो ने हलफनामे में क्या कहा?

प्रोफेसर Michel Danino ने अपने हलफनामे में कई अहम दावे किए, जो इस प्रकार हैं।

अध्याय पूरी तरह सामूहिक प्रयास- उन्होंने कहा कि टेक्स्टबुक किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं लिखी गई बल्कि 15 सदस्यों की टीम ने इसे तैयार किया है।

न्यायपालिका पर अध्याय “सकारात्मक”– अध्याय में न्यायपालिका की भूमिका को सराहा गया है, जिसमें मानवाधिकारों की रक्षा, गलत कानूनों को रद्द करने जैसे उदाहरण शामिल हैं। जिसमें जस्टिस कुलदीप सिंह के पर्यावरण न्यायशास्त्र पर काम का जिक्र किया गया है।

डैनिनो ने दिनेश प्रसाद सक्लानी के उस बयान को चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि ड्राफ्ट सीमित लोगों के बीच साझा हुआ।

सुपर्णा दिवाकर की भूमिका पर सफाई- हलफनामे में यह भी कहा गया कि, सुपर्णा दिवाकर ड्राफ्ट तैयार करने वाली नहीं थीं। वह केवल रिसर्च, एडिटिंग और समन्वय में मदद कर रही थीं

बड़े शिक्षाविदों की भी थी निगरानी

डैनिनो ने बताया कि, मंजुल भार्गव (फील्ड्स मेडल विजेता) को भी कंटेंट दिखाया गया था और इसके अलावा एनएसटीसी और एनओसी के कई वरिष्ठ सदस्य लगातार प्रक्रिया से जुड़े थे।

वकीलों ने कोर्ट में क्या कहा?

तीनों आरोपितों की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों गोपाल शंकरनारायणन, अरविन्द दातार और जे साई दीपक ने कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ब्लैकलिस्ट किए जाने से इनकी साख पर गंभीर असर पड़ा है।

NCERT का क्या रुख है?

इस पूरे विवाद के बीच एनसीईआरटी ने किताब वापस लेने का फैसला किया और विवादित अध्याय को दोबारा लिखने की घोषणा की और सार्वजनिक माफी मांगते हुए इसे इसे “अनजाने में हुई गलती” बताया था।