राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा नौवीं के गणित और सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में महत्त्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए पाठ्यक्रम के तहत गणित की किताब में प्रायिकता, क्षेत्रफल व परिमाप तथा अनुक्रम व प्रगति जैसे अध्याय शामिल किए गए हैं, जो वर्तमान में कक्षा दसवीं में पढ़ाए जाते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप तैयार राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (एनसीएफ) के आधार पर ये पुस्तकें अकादमिक वर्ष 2026-27 से लागू होंगी।

कक्षा नौवीं की गणित पुस्तक में कुल 15 अध्याय होंगे

एनसीईआरटी ने हाल ही में नई पुस्तकों के पाठ्यक्रम का मसविदा जारी किया है। मसविदे के अनुसार, कक्षा नौवीं की गणित पुस्तक में कुल 15 अध्याय होंगे, जबकि वर्तमान किताब में केवल 12 अध्याय हैं। पुराने सभी अध्यायों को बनाए रखते हुए तीन नए अध्याय जोड़े गए हैं। प्रायिकता का अध्याय अब नौवीं में स्थानांतरित हो गया है।

इसमें विद्यार्थियों को घटनाओं की प्रायिकता की गणना सिखाई जाएगी। अवधारणा को आरेखों और तालिकाओं के माध्यम से सरलता से समझाया जाएगा, ताकि विद्यार्थी आसानी से ग्रहण कर सकें। क्षेत्रफल व परिमाप अध्याय में हीरोज फार्मूला को शामिल किया गया है, जो पहले अलग अध्याय था। भारतीय गणितज्ञों बौधायन और ब्रह्मगुप्त के सूत्रों का भी उल्लेख होगा। साथ ही, पाई का मूल्य और वृत के परिमाप की गणना पर जोर दिया जाएगा।

राजनीतिक शास्त्र पुस्तक में ‘चुनाव’ शीर्षक वाला अध्याय जुड़ा

अनुक्रम व प्रगति अध्याय में अंकगणितीय प्रगति (एपी) और ज्यामितीय प्रगति (जीपी) के सिद्धांत पढ़ाए जाएंगे। ये बदलाव विद्यार्थियों की गणितीय समझ को मजबूत बनाने और उच्च कक्षाओं के लिए आधार तैयार करने के उद्देश्य से किए गए हैं। सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में भी व्यापक परिवर्तन हुए हैं। अब दो पुस्तकों में कुल 16 अध्याय होंगे। राजनीतिक शास्त्र पुस्तक में ‘चुनावी राजनीति’ अध्याय के स्थान पर ‘चुनाव’ शीर्षक वाला नया अध्याय होगा। इसमें भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआइ) की संरचना, कार्यों और भूमिका पर विस्तार से चर्चा होगी। आयोग के स्वतंत्र संचालन, चुनाव प्रक्रिया प्रबंधन और लोकतंत्र मजबूत करने वाली भूमिकाओं को समझाया जाएगा।

इसके अलावा, नई पुस्तकों में ‘विचार से स्टार्टअप तक’ अध्याय जोड़ा गया है। देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम के तेज विकास को देखते हुए यह कदम महत्त्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को उद्यमिता की बुनियादी समझ दी जाएगी। व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन पर भी नया फोकस है। बचत, निवेश, व्यक्तिगत ऋण, बीमा और आयकर जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

स्कूलों में अब तक ये व्यावहारिक ज्ञान सीमित था, लेकिन अब छात्र वित्तीय साक्षरता से लैस होंगे। ये बदलाव एनईपी के लक्ष्यों जैसे समग्र विकास, व्यावहारिक शिक्षा और भारतीय संदर्भों को मजबूत करने के अनुरूप हैं। एनसीईआरटी ने पुस्तकें तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया है। मसविदे पर सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, ताकि अंतिम पुस्तकें और प्रभावी हों।

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