राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने सोमवार 23 फरवरी, 2026 को कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक को जारी किया है, जिसमें इस बार “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” अध्याय के अंतर्गत “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” पर अलग से सेक्शन जोड़ा गया है। पुरानी किताब में जहां केवल न्यायपालिका की संरचना, स्वतंत्र न्यायपालिका की अवधारणा और न्याय तक पहुंच पर चर्चा थी, वहीं नई किताब में न्याय व्यवस्था की चुनौतियों, भ्रष्टाचार और लंबित मामलों जैसे टॉपिक्स को भी शामिल किया गया है।

न्यायपालिका के सामने चुनौतियां: भ्रष्टाचार और लंबित केस

नई पुस्तक में न्यायपालिका के सामने प्रमुख चुनौतियों के रूप में जो मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, वो इस प्रकार हैं।

न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार

जजों की पर्याप्त संख्या का अभाव

जटिल कानूनी प्रक्रियाएं

कमजोर बुनियादी ढांचा

मामलों का भारी बैकलॉग

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में लंबित मामलों के आंकड़े

किताब में दिए गए अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक में लंबित पड़े मामलों की जानकारी इस प्रकार है।

यह पहली बार है जब एनसीईआरटी की कक्षा 8 की किताब में इतने स्पष्ट आंकड़ों के साथ न्यायपालिका की स्थिति का उल्लेख किया गया है।

CPGRAMS और शिकायत तंत्र का जिक्र

पुस्तक में बताया गया है कि जजों के लिए एक आचार संहिता लागू होती है, जो अदालत के अंदर और बाहर उनके व्यवहार को नियंत्रित करती है। इसके अलावा, शिकायतों के लिए केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) का उल्लेख किया गया है। किताब के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई थीं।

संसद द्वारा जजों को हटाने की प्रक्रिया

पुस्तक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गंभीर आरोपों की स्थिति में संसद महाभियोग प्रस्ताव यानी इम्पीचमेंट मोशन पारित कर जज को हटा सकती है। यह प्रक्रिया उचित जांच के बाद और जज को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देने के बाद ही पूरी होती है।

पूर्व CJI बी.आर. गवई का बयान

नई किताब में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई के जुलाई 2025 के बयान का उल्लेख है। उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और कदाचार की घटनाएं सामने आई हैं, जो जनविश्वास को कमजोर करती हैं। उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही को लोकतंत्र के लिए आवश्यक बताया।

इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

कक्षा 8 के लिए जारी की गई नई सामाजिक विज्ञान की किताब के इस नए अध्याय में छात्रों को चर्चा के लिए दो उदाहरण भी दिए गए हैं, जिनमें पहला है इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम और दूसरा इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट है।

एनसीआरटी की इस नई किताब के अनुसार, 2018 में सरकार ने चुनावी चंदा जुटाने के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड योजना शुरू की थी, जिसमें दानदाताओं की पहचान गोपनीय रखी जाती थी। मगर बाद में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि मतदाताओं को यह जानने का अधिकार है कि राजनीतिक दलों को फंडिंग कौन कर रहा है।

दूसरे उदाहरण इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के लिए इस नई किताब किताब में बताया गया है कि 2009 में संशोधन के बाद एक प्रावधान जोड़ा गया था, जिसके तहत सोशल मीडिया पोस्ट के लिए जेल की सजा हो सकती थी। 2015 में एक कानून के छात्र ने इसे अदालत में चुनौती दी और सुप्रीम कोर्ट ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ मानते हुए असंवैधानिक घोषित कर दिया।

नई शिक्षा नीति 2020 के तहत बदलाव

एनसीईआरटी, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी और नए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (NCF) के तहत कक्षा 1 से 8 तक की नई किताबें विकसित कर रहा है। पहले की किताबें 2005 के NCF पर आधारित थीं, जिन्हें कोविड-19 के बाद “रैशनलाइज” किया गया था।

क्या बदला और क्यों है यह अहम?

ऐसा पहली बार हुआ है कि स्कूल की किसी किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर खुलकर चर्चा की गई है, जिसमें न केवल भ्रष्टाचार बल्कि अदालतों में लंबित पड़े मामलों के ठोस आंकड़ों को भी शामिल किया गया है साथ ही सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों को उदाहरण के तौर पर शामिल किया गया है।

एनसीआरटी ने कक्षा 8वीं सामाजिक विज्ञान की इस नई किताब के जरिए छात्रों को न्यायपालिका की जवाबदेही और पारदर्शिता पर विचार करने के लिए प्रेरित किया है। एनसीआरटी द्वारा किया गया यह बदलाव छात्रों को केवल संस्थागत ढांचे की जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें लोकतांत्रिक संस्थाओं की चुनौतियों और सुधार प्रक्रिया से भी परिचित कराता है।