राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने सोमवार को कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक जारी की है। इस नई किताब में 1947 के भारत विभाजन, आजादी के कारणों, डायरेक्ट एक्शन डे और जालियांवाला बाग हत्याकांड जैसे ऐतिहासिक घटनाक्रमों को नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है।

विभाजन पर क्या बदला?

कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में उल्लेख किया गया है कि महात्मा गांधी और कांग्रेस के अधिकांश नेता देश के विभाजन के खिलाफ थे, लेकिन अंततः उन्होंने इसे “एकमात्र आगे बढ़ने का रास्ता” मानकर स्वीकार किया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारतीय मुसलमानों का एक हिस्सा भी विभाजन के पक्ष में नहीं था।

पुरानी किताब में जहां केवल यह कहा गया था कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच सहमति नहीं बन सकी और विभाजन लगभग अपरिहार्य हो गया, वहीं नई किताब में कांग्रेस नेतृत्व द्वारा विभाजन को स्वीकार किए जाने की बात को स्पष्ट रूप से जोड़ा गया है।

‘India’s Long Road to Independence’ अध्याय में क्या है खास?

‘भारत की स्वतंत्रता का लंबा रास्ता’ शीर्षक वाले अध्याय में 1857 के विद्रोह से लेकर 1947 तक की पूरी स्वतंत्रता यात्रा को समाहित किया गया है। इसमें बंगाल विभाजन, स्वतंत्रता आंदोलन और भारत के विभाजन का विस्तृत विवरण दिया गया है।

आजादी के कारणों पर बदली व्याख्या

एनसीईआरटी ने नई किताब में बताया है कि इतिहासकारों के बीच इस बात पर बहस रही है कि ब्रिटेन ने भारत क्यों छोड़ा। पहले यह माना जाता था कि यह मुख्य रूप से गांधीजी की अहिंसा नीति और कांग्रेस की रणनीतियों का परिणाम था लेकिन अब यह स्वीकार किया गया है कि कई अन्य कारक भी उतने ही महत्वपूर्ण थे, जिसमें जन-आंदोलन और विद्रोह, क्रांतिकारियों के प्रयास, रॉयल इंडियन एयर फोर्स और रॉयल इंडियन नेवी में विद्रोह, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की कमजोर स्थिति, वैश्विक स्तर पर उपनिवेशवाद का अंत को शामिल किया गया है।

जालियांवाला बाग और माफी का मुद्दा

1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड पर एनसीईआरटी की नई किताब में यह उल्लेख किया गया है कि ब्रिटिश सरकार ने अब तक औपचारिक माफी नहीं मांगी है। हालांकि उसने इसे “ब्रिटिश इतिहास की एक बेहद शर्मनाक घटना” बताया है। इससे पहले वाली पुरानी किताब में माफी की मांग का जिक्र नहीं था।

डायरेक्ट एक्शन डे

1946 में मुस्लिम लीग द्वारा मनाए गए ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ का जिक्र नई किताब में विस्तार से किया गया है। किताब के अनुसार, कलकत्ता में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में हजारों लोगों की जान गई।

नई किताब में यह भी बताया गया है कि भड़काऊ भाषणों और पर्चों ने हिंसा को बढ़ावा दिया, जिससे हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच गहरी भय की भावना पैदा हुई और विभाजन की राह लगभग तय हो गई। पुरानी किताब में इस घटना का संक्षिप्त उल्लेख था और केवल दंगों में हजारों मौतों की बात कही गई थी।

पाइका विद्रोह को मिली किताब में जगह

नई किताब में ओडिशा के पारंपरिक किसान मिलिशिया द्वारा 1800 के दशक में किए गए विद्रोह ‘पाइका विद्रोह’ को भी शामिल किया गया है। पिछले वर्ष जब पहली किताब जारी हुई थी, तब कुछ विद्रोहों को शामिल न करने पर आलोचना हुई थी। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पाइक विद्रोह को हटाने को “बड़ा अपमान” बताया था। नई किताब में इस विद्रोह को शामिल कर लिया गया है।

नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव

एनसीईआरटी नई किताबें नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुरूप विकसित कर रहा है। अब तक कक्षा 1 से 8 तक की किताबें तैयार की जा चुकी हैं।

‘Bande Mataram’ का उल्लेख

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के संदर्भ में किताब में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के ‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरे भी शामिल किए गए हैं और छात्रों से उनका अर्थ समझने को कहा गया है।

Jansatta Education Expert Conclusion

एनसीईआरटी की नई कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान की किताब में स्वतंत्रता आंदोलन और विभाजन के घटनाक्रम को अधिक विस्तृत और बहुआयामी तरीके से प्रस्तुत किया गया है। आजादी के कारणों, विभाजन की परिस्थितियों और ऐतिहासिक घटनाओं को नए संदर्भ में समझाने की कोशिश की गई है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पाठ्यक्रम में हो रहे व्यापक सुधारों का हिस्सा है।