Scholarship News 2026: केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा और पोस्ट-मैट्रिक पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए आर्थिक सहायता का दायरा बढ़ाया है, जिसमें सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में पोस्ट-मैट्रिक और उच्च शिक्षा के लिए करीब 1.09 करोड़ छात्रवृत्तियां प्रदान की गईं। इनमें एससी, एसटी, ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी वर्ग के विद्यार्थियों को बड़ी संख्या में लाभ मिला है। यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में दी।
स्कॉलरशिप में किस वर्ग के कितने छात्र शामिल?
सरकार की ओर से साझा आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में दी गई करीब 1.09 करोड़ छात्रवृत्तियों में लगभग 48 लाख छात्रवृत्तियां एससी विद्यार्थियों के लिए थीं। वहीं करीब 24 लाख छात्रवृत्तियां एसटी विद्यार्थियों को मिलीं। इसके अलावा ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी वर्ग के छात्रों के लिए लगभग 36 लाख छात्रवृत्तियां प्रदान की गईं।
| वर्ग | छात्रवृत्तियां |
| एससी करीब | 48 लाख |
| एसटी करीब | 24 लाख |
| ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी | करीब 36 लाख |
| कुल करीब | 1.09 करोड़ |
सीधे बैंक खाते में मिल रही स्कॉलरशिप
सरकार के अनुसार छात्रवृत्ति और फेलोशिप की राशि लाभार्थियों के आधार-सीडेड बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जा रही है। भुगतान प्रक्रिया में SNA-SPARSH प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे फंड के वितरण और उपयोग की रियल-टाइम ट्रैकिंग में मदद मिलती है।
पोस्ट ग्रेजुएशन छात्रों के लिए भी बड़ी स्कॉलरशिप
यूजीसी ने अकादमी वर्ष 2023-24 से नेशनल स्कॉलरशिप फॉर पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज (NSPGS) शुरू की थी। इसके तहत पहले से चल रही चार स्कॉलरशिप योजनाओं को एक साथ लाया गया है। इनमें पीजी सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप, पीजी स्कॉलरशिप फॉर यूनिवर्सिटी रैंक होल्डर्स, एससी/एसटी स्टूडेंट्स के लिए प्रोफेशनल कोर्सेज की पीजी स्कॉलरशिप और GATE/GPAT से जुड़ी पीजी स्कॉलरशिप शामिल हैं।
NSPGS के तहत चयनित विद्यार्थियों को 15,000 रुपये प्रति माह, साल में 10 महीने तक दिए जाते हैं। यह सहायता अधिकतम दो वर्ष की पोस्ट ग्रेजुएशन पढ़ाई के लिए उपलब्ध है।
सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए फेलोशिप
यूजीसी ने सितंबर 2022 में सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले फेलोशिप फॉर सिंगल गर्ल चाइल्ड शुरू की थी, जिसका उद्देश्य परिवार की इकलौती बेटी को रिसर्च की पढ़ाई जारी रखने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। यह योजना पहले की स्वामी विवेकानंद सिंगल गर्ल चाइल्ड फेलोशिप की जगह लाई गई थी।
इन संस्थानों में मिली फीस में राहत
सरकार ने आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों में फीस में राहत का भी प्रावधान किया है। वर्ष 2016-17 से एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी छात्रों तथा उन आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को पूरी ट्यूशन फीस माफी दी जा रही है, जिनके परिवार की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से कम है। 1 लाख से 5 लाख रुपये तक की पारिवारिक आय वाले अन्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को ट्यूशन फीस में दो-तिहाई तक की छूट दी जाती है।
इसके अलावा 31 एनआईटी और आईआईईएसटी-शिबपुर में एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी वर्ग के छात्रों को पोस्ट बीटी एम.ई./एम.टेक. कार्यक्रमों के लिए 100 प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी का प्रावधान है।
पीएम विद्यालक्ष्मी से एजुकेशन लोन में मदद
उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता केवल छात्रवृत्ति तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार ने नवंबर 2024 में पीएम विद्यालक्ष्मी योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक कारणों से किसी छात्र को उच्च शिक्षा का अवसर न छोड़ना पड़े। पात्र छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों में मेरिट के आधार पर प्रवेश मिलने पर बिना कोलेटरल और गारंटर के एजुकेशन लोन की सुविधा मिल सकती है।
सरकार के अनुसार पीएम-यूएसपी क्रेडिट गारंटी फंड योजना के तहत 7.5 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर 75 प्रतिशत तक बकाया राशि के डिफॉल्ट पर क्रेडिट गारंटी कवर दिया जाता है।
उच्च शिक्षा में बढ़ा जीईआर
सरकार ने बताया कि इन पहलों के साथ देश में उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात यानी GER भी बढ़ा है। 2014-15 में उच्च शिक्षा का GER 23.7 था, जो 2023-24 में बढ़कर 30 हो गया। इसी अवधि में महिला GER 22.9 से बढ़कर 31.2 हुआ। उच्च शिक्षा में कुल छात्र नामांकन भी 3.42 करोड़ से बढ़कर 4.50 करोड़ हो गया।
छात्रों के लिए क्या है खास?
सरकार की छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता योजनाओं का फोकस आर्थिक रूप से कमजोर और विभिन्न सामाजिक वर्गों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तक पहुंच उपलब्ध कराने पर है। छात्रवृत्ति के साथ फीस में छूट, शिक्षा ऋण, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और रिसर्च से जुड़ी फेलोशिप जैसे विकल्प भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
