Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने विशाखापटनम के चंद्रपालम में जेडपी हाई स्कूल के छात्रों से बातचीत करते हुए अपने बचपन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। साथ ही कहा कि अगर आज वह जो कुछ भी हैं तो वह अपनी मां की वजह से हैं।

एक छात्र ने नारा लोकेश से पूछा, “लोकेश अन्ना, मेरा आपसे एक सवाल है। जब आप छोटे थे और आपके कम नंबर आते थे, तो आपके पिता क्या करते थे?” इस सवाल का जवाब देते हुए लोकेश ने कहा कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, वह अपनी मां की वजह से हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता हमेशा राजनीति में व्यस्त रहते थे, एक जगह से दूसरी जगह यात्रा करते रहते थे और देर रात घर लौटते थे।

मेरे जागने से पहले चले जाते थे मेरे पिता- नारा लोकेश

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, नारा लोकेश ने कहा, “भले ही मेरे पिता रात 11:30 या 12 बजे घर आते थे, फिर भी वे सुबह 5:30 या 6 बजे तक तैयार होकर निकल जाते थे। वे मेरे सो जाने के बाद आते थे और मेरे जागने से पहले ही चले जाते थे।”

नारा लोकेश ने कहा कि उनकी मां ने ही उनकी परवरिश की और उन्हें जीवन में इस मुकाम तक पहुंचाया। अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए लोकेश ने बताया कि अगर उनके कम नंबर आते थे, तो उनकी मां उन्हें सजा देती थीं और जरा भी नरमी नहीं बरतती थीं।

उन्होंने कहा, “अगर मुझे कम नंबर मिलते, तो मेरी मां मुझे सजा देती, जरा भी रहम नहीं करती।” अपने बचपन की एक घटना साझा करते हुए लोकेश ने बताया कि उन्होंने भी कई शरारतें की थीं। उन्होंने याद करते हुए कहा, “एक बार मैंने अपनी रिपोर्ट कार्ड पर मां के साइन की नकल करने की कोशिश की थी, लेकिन मैं पकड़ा गया। इसके लिए मुझे सजा मिली थी।”

मां अपने बच्चे की भलाई के लिए सब कुछ करती है- लोकेश

लोकेश ने कहा कि एक मां जो कुछ भी करती है, वह प्यार से और बच्चे की भलाई के लिए करती है। उन्होंने कहा, “एक मां जो कुछ भी करती है, वह प्यार से ही करती है, है ना? यह हमारी भलाई के लिए ही होता है, है ना? इसलिए आज मैं जिस मुकाम पर पहुंचा हूं, वह सब मेरी मां की वजह से है। मैं यहां अपनी मां की वजह से ही खड़ा हूं।”

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नेशनल सैंपल सर्वे के 78वें राउंड के डेटा पर आधारित रिपोर्ट में इस ग्रुप की पहचान NEET युवाओं के तौर पर की गई है। यानी ऐसे लोग जो पढ़ाई, नौकरी या ट्रेनिंग में नहीं हैं, जिनमें बेरोजगार लोग भी शामिल हैं। नीति आयोग ने कहा कि इस ग्रुप को महिलाओं के साथ सस्ती या सब्सिडी वाली ट्रेनिंग और फाइनेंशियल मदद की जरूरत है, जबकि स्किलिंग प्रोग्राम को लोकल डिमांड, स्वरोजगार के मौकों और उभरते सेक्टर से जोड़ा जाना चाहिए। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…