मुंबई यूनिवर्सिटी के डिस्टेंस एजुकेशन प्रोग्राम में पढ़ने वाले छात्रों के लिए पहले साल के परीक्षा परिणाम चिंता बढ़ाने वाले रहे हैं। यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन (CDOE) की ओर से जारी बीए और बीकॉम प्रथम वर्ष के रिजल्ट में 80 फीसदी से अधिक छात्र सफल नहीं हो सके। खास बात यह है कि परीक्षा के करीब चार महीने बाद ये परिणाम घोषित किए गए हैं। इसके बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था और छात्रों को मिलने वाली शैक्षणिक सहायता पर सवाल उठने लगे हैं।

CDOE ने सोमवार को फर्स्ट ईयर बीकॉम के पहले सेमेस्टर का रिजल्ट जारी किया। परीक्षा में कुल 2,543 छात्र शामिल हुए थे, जिनमें से सिर्फ 457 छात्र ही पास हो सके। वहीं, 2,086 छात्रों को असफल घोषित किया गया। इस तरह बीकॉम में पास प्रतिशत महज 18 फीसदी रहा।

बीए में भी स्थिति बहुत अलग नहीं रही। फर्स्ट ईयर बीए की परीक्षा में 2,224 छात्र शामिल हुए थे। इनमें से सिर्फ 460 छात्र परीक्षा पास कर सके, जबकि 1,764 छात्र सफल नहीं हुए। बीए का पास प्रतिशत 20.68 फीसदी रहा।

पिछले साल के मुकाबले बीकॉम का रिजल्ट बेहतर: यूनिवर्सिटी

कम पास प्रतिशत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मुंबई यूनिवर्सिटी ने परिणामों का बचाव किया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि इस साल के आंकड़े पिछले वर्षों के परिणामों के अनुरूप ही हैं।

विश्वविद्यालय के मुताबिक, FY बीए का पास प्रतिशत इस साल 20.68 फीसदी रहा, जबकि पिछले साल यह 23.35 फीसदी था। वहीं, FY बीकॉम में इस साल 18 फीसदी छात्र पास हुए, जबकि पिछले साल पास प्रतिशत सिर्फ 13 फीसदी था। यानी बीकॉम के परिणाम में इस बार कुछ सुधार हुआ है।

विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी छात्र को ‘असफल’ घोषित किए जाने का मतलब यह नहीं है कि वह सभी विषयों में फेल हुआ है। बीए और बीकॉम के छात्र हर सेमेस्टर कई आंतरिक और बाहरी परीक्षाएं देते हैं। अगर कोई छात्र एक या उससे अधिक पेपर में असफल होता है, तो उसे विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में असफल उम्मीदवारों में गिना जाता है।

चार महीने की देरी से आया रिजल्ट

इन परिणामों को लेकर सबसे बड़ा सवाल रिजल्ट जारी करने में हुई देरी को लेकर भी है। छात्रों की परीक्षाएं होने के करीब चार महीने बाद परिणाम घोषित किए गए। इस देरी ने पहले से ही CDOE की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही नाराजगी को और बढ़ा दिया है।

मुंबई यूनिवर्सिटी के डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर पर इससे पहले भी एडमिशन में देरी, स्टडी मटेरियल उपलब्ध नहीं होने, पेपर लीक के आरोप और रिजल्ट जारी करने में देरी जैसे मामलों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

स्टडी मटेरियल और अकादमिक सपोर्ट पर सवाल

कम पास प्रतिशत सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्यों ने यह सवाल उठाया है कि कहीं छात्रों को समय पर स्टडी मटेरियल नहीं मिलने, प्रशासनिक खामियों और पर्याप्त अकादमिक सपोर्ट के अभाव का असर उनके प्रदर्शन पर तो नहीं पड़ा।

छात्रों और सीनेट सदस्यों का कहना है कि अगर इतने बड़े पैमाने पर छात्र असफल हुए हैं, तो केवल छात्रों की तैयारी पर सवाल उठाने के बजाय पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।

युवा सेना ने की रिजल्ट की समीक्षा की मांग

रिजल्ट को लेकर शिवसेना (UBT) की युवा सेना के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुंबई यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. प्रसाद करांडे से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में मौजूदा और पूर्व सीनेट सदस्य भी शामिल थे। उन्होंने परिणामों की समीक्षा करने की मांग की।

युवा सेना के सीनेट सदस्य प्रदीप सावंत ने कहा कि अगर इतने ज्यादा छात्र फेल हुए हैं, तो समस्या सिस्टम में है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय छात्रों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपनी व्यवस्था की समीक्षा करे।

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