सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लेकर विवाद बना हुआ है। जब से सीबीएसई कक्षा 12 के नतीजे सामने आए हैं, कई छात्रों ने आरोप लगाया है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच सही तरीके से नहीं की गई। यहां तक कहा गया है कि कई प्रश्न बिना जांचे ही छोड़ दिए गए, जबकि कुछ मामलों में अंकों की गणना में भी गलती पाई गई।

इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में भी सामने आया कि सीबीएसई ने ट्रायल चरण में सामने आई कई कमियों को नजरअंदाज करते हुए इस सिस्टम को बड़े स्तर पर लागू कर दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि दुनिया के दूसरे देशों में परीक्षा कॉपियों की जांच कैसे होती है? वहां कौन-सी व्यवस्था लागू है और नियम कितने सख्त हैं? Evidence for Excellence in Education का एक रिसर्च पेपर है जिसने कई देशों के एग्जाम पैटर्न को डीकोड किया है।

ब्रिटेन में कैसी व्यवस्था?

इंग्लैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड में 16 वर्ष तक के छात्रों के लिए जनरल सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (GCSE) परीक्षा आयोजित की जाती है। इस परीक्षा की कॉपियां शिक्षक या पूर्व शिक्षक जांचते हैं। अधिकांश एग्जामिनर स्कूल या कॉलेज में पढ़ा रहे होते हैं। खास बात यह है कि GCSE परीक्षाओं के लिए एग्जामिनर केवल परीक्षा सीजन के दौरान ही नियुक्त किए जाते हैं।

GCSE स्तर की परीक्षाओं में एक और सामान्य बात देखने को मिलती है। यहां आमतौर पर डबल मार्किंग की व्यवस्था नहीं होती। डबल मार्किंग का मतलब है कि एक ही उत्तर पुस्तिका को दो या उससे अधिक परीक्षक जांचें।

ब्रिटेन में डबल मार्किंग न होने की बड़ी वजह परीक्षाओं का विशाल पैमाना है। यहां हर साल करीब 50 लाख GCSE और लगभग 7.5 लाख A-Level परीक्षाएं आयोजित होती हैं। कुल मिलाकर 1.7 करोड़ से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करनी पड़ती है। यही कारण है कि डबल मार्किंग को व्यावहारिक नहीं माना जाता।

हालांकि, वहां सैंपलिंग और मॉडरेशन मॉडल अपनाया जाता है। वरिष्ठ परीक्षक लगातार उत्तर पुस्तिकाओं की निगरानी करते हैं। कुछ कॉपियों का रैंडम सैंपल लेकर दोबारा मूल्यांकन किया जाता है। यदि किसी परीक्षक की मार्किंग संदिग्ध लगती है तो उसकी जांची गई कॉपियों की दोबारा समीक्षा भी की जा सकती है। इस व्यवस्था को क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम कहा जाता है।

ऑस्ट्रेलिया में कैसी व्यवस्था?

ऑस्ट्रेलिया में हायर स्कूल सर्टिफिकेट (HSC) परीक्षा आयोजित की जाती है। यह भारत की 12वीं बोर्ड परीक्षा के समान मानी जाती है। इस परीक्षा में गणित और विज्ञान विषयों में बहुविकल्पीय (MCQ) और छोटे उत्तर वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। कॉपियों की जांच अनुभवी शिक्षक करते हैं। परीक्षकों का चयन उनके विषय ज्ञान और अनुभव के आधार पर किया जाता है।

एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि यदि किसी परीक्षक का कोई रिश्तेदार उसी परीक्षा में शामिल हो रहा है, तो उसे इसकी जानकारी पहले से देनी होती है।

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स राज्य में डबल मार्किंग की व्यवस्था लागू है। यहां दो परीक्षक स्वतंत्र रूप से किसी भी छात्र की कॉपी जांचते हैं। दोनों एक-दूसरे के दिए गए अंक नहीं देख सकते। यदि दोनों के अंकों में बड़ा अंतर पाया जाता है तो तीसरे परीक्षक को बुलाया जाता है। जरूरत पड़ने पर चौथा परीक्षक भी मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

कनाडा में कैसी व्यवस्था?

कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में Alberta Diploma नाम की परीक्षा होती है। इसे ग्रेड 12 की अंतिम बोर्ड परीक्षा माना जाता है। इस परीक्षा में गणित और विज्ञान के लिए MCQ और छोटे उत्तर वाले प्रश्न होते हैं, जबकि अंग्रेजी और इतिहास जैसे विषयों में निबंध आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।

इन परीक्षाओं की जांच करने वाले शिक्षकों के लिए सख्त नियम हैं। शिक्षक को संबंधित विषय पढ़ाने का कम से कम दो वर्ष का अनुभव होना चाहिए। अंग्रेजी भाषा कला (English Language Arts) के लिए कम से कम एक वर्ष का अनुभव आवश्यक है। इसके अलावा, जिस वर्ष परीक्षा हो रही हो, उस वर्ष भी शिक्षक उसी विषय को पढ़ा रहा हो, इसे प्राथमिकता दी जाती है। शिक्षक के पास स्थायी शिक्षण प्रमाणपत्र होना भी जरूरी है। यहां कोई भी शिक्षक सीधे एग्जामिनर बनने के लिए आवेदन नहीं कर सकता। उसके नाम की सिफारिश स्कूल का सुपरिंटेंडेंट या वरिष्ठ अधिकारी करता है।

कनाडा के ओंटारियो प्रांत में Ontario Secondary School Literacy Test (OSSLT) आयोजित किया जाता है। यह परीक्षा छात्रों की अंग्रेजी भाषा समझने और लिखने की क्षमता का मूल्यांकन करती है।

इस परीक्षा की कॉपियां डबल मार्किंग प्रणाली से जांची जाती हैं। दो परीक्षक एक ही उत्तर को स्वतंत्र रूप से जांचते हैं और एक-दूसरे के अंक नहीं देख सकते। यदि दोनों परीक्षकों के अंक एक-दूसरे के करीब होते हैं तो नियमों के अनुसार उच्च अंक या औसत अंक दिया जाता है। यदि दोनों के अंकों में बड़ा अंतर होता है तो किसी विशेषज्ञ परीक्षक से कॉपी दोबारा जांची जाती है।

ओंटारियो में परीक्षकों का चयन करते समय यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि शहर और गांव दोनों क्षेत्रों के शिक्षक शामिल हों। प्रशासन भौगोलिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास करता है।

कनाडा में कुछ परीक्षाओं में एंकर प्रश्न (Anchor Questions) भी शामिल किए जाते हैं। ये ऐसे प्रश्न होते हैं जो पहले भी पूछे जा चुके होते हैं। इनके जरिए यह देखा जाता है कि अलग-अलग वर्षों के छात्रों ने समान प्रश्नों पर कैसा प्रदर्शन किया। यदि प्रदर्शन में बड़ा अंतर दिखाई देता है तो पेपर की कठिनाई का आकलन कर अंकों को समायोजित किया जाता है।

न्यूजीलैंड में कैसी व्यवस्था?

न्यूजीलैंड में National Certificate of Educational Achievement (NCEA) परीक्षा आयोजित की जाती है। इसे स्कूल स्तर की प्रमुख राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा माना जाता है और यह भारत की 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के समान है। यहां प्रश्न मुख्य रूप से वर्णनात्मक होते हैं और MCQ का उपयोग अपेक्षाकृत कम किया जाता है।

कॉपियों की जांच केवल विषय विशेषज्ञों द्वारा की जाती है। जिस विषय की कॉपी जांचनी हो, उसमें पर्याप्त अनुभव और विशेषज्ञता अनिवार्य होती है। न्यूजीलैंड क्वालिफिकेशंस अथॉरिटी (NZQA) ही परीक्षकों की नियुक्ति करती है। यहां छात्रों का मूल्यांकन केवल अंकों के आधार पर नहीं किया जाता। उन्हें चार स्तरों में वर्गीकृत किया जाता है-Not Achieved, Achieved, Merit, Excellence।

हांगकांग में कैसी व्यवस्था?

हांगकांग में Hong Kong Diploma of Secondary Education (HKDSE) परीक्षा आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में गणित और विज्ञान के लिए MCQ, छोटे उत्तर और वर्णनात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि अंग्रेजी और इतिहास जैसे विषयों में निबंध आधारित प्रश्न शामिल होते हैं। कॉपियां मुख्य रूप से अनुभवी शिक्षक जांचते हैं।

हांगकांग में भी डबल मार्किंग की व्यवस्था है। दो परीक्षक स्वतंत्र रूप से एक ही कॉपी की जांच करते हैं। यदि दोनों के अंकों में बड़ा अंतर पाया जाता है तो तीसरे परीक्षक को बुलाया जाता है।

हांगकांग में विशेषज्ञ पैनल की व्यवस्था भी होती है। यह पैनल सिर्फ वर्तमान वर्ष की कॉपियों का मूल्यांकन नहीं करता, बल्कि पुराने वर्षों के परिणामों, वरिष्ठ परीक्षकों की राय और परीक्षा की कठिनाई का भी विश्लेषण करता है। इसके आधार पर तय किया जाता है कि किसी वर्ष A, B या C ग्रेड की सीमा कहां होगी।

अमेरिका में कैसी व्यवस्था?

अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य में Massachusetts Comprehensive Assessment System (MCAS) परीक्षा आयोजित की जाती है। इसके जरिए अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे विषयों का मूल्यांकन किया जाता है।

MCAS की कॉपियां जांचने वाले परीक्षकों के पास संबंधित विषय में स्नातक डिग्री होना जरूरी है। खास बात यह है कि मैसाचुसेट्स के स्कूलों में वर्तमान में पढ़ा रहे शिक्षक इन कॉपियों की जांच नहीं कर सकते।

इस परीक्षा में भी एंकर प्रश्नों का उपयोग किया जाता है। पिछले वर्षों के कुछ प्रश्न दोबारा शामिल किए जाते हैं और छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर परीक्षा की कठिनाई और ग्रेडिंग का आकलन किया जाता है।

अमेरिका में कॉलेज और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए American College Testing (ACT) परीक्षा आयोजित की जाती है। इसमें अंग्रेजी, गणित, रीडिंग और विज्ञान जैसे विषय शामिल होते हैं। अधिकांश प्रश्न MCQ आधारित होते हैं। ACT में केवल राइटिंग सेक्शन की डबल मार्किंग की जाती है। दो प्रशिक्षित परीक्षक स्वतंत्र रूप से निबंध का मूल्यांकन करते हैं। यदि दोनों के अंकों में बड़ा अंतर होता है तो तीसरा परीक्षक फैसला करता है। वहीं MCQ प्रश्नों की जांच मशीनों द्वारा की जाती है।

ये भी पढ़ें- कमियां पता होने के बाद भी CBSE ने लागू कर दिया था OSM सिस्टम