Mukesh Bansal Success Story: सफलता की कहानियां अक्सर बाहर से बहुत आसान दिखाई देती हैं। एक अच्छी पढ़ाई, एक शानदार नौकरी, फिर बिजनेस और करोड़ों की कमाई। लेकिन किसी बड़े उद्यमी की असली कहानी उसके रिज्यूमे में नहीं, बल्कि उन फैसलों में छिपी होती है जो उसने तब लिए जब सफलता की कोई गारंटी नहीं थी।

मुकेश बंसल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने हरिद्वार से निकलकर आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करने के बाद अमेरिका में टेक स्टार्टअप्स में काम किया, लेकिन भारत लौटकर अपना कारोबार खड़ा करने का फैसला किया। साल 2007 में उन्होंने मिंत्रा (Myntra) की शुरुआत की। कुछ ही वर्षों में यह कंपनी भारत के बड़े ऑनलाइन फैशन प्लेटफॉर्म में शामिल हो गई और 2014 में फ्लिपकार्ट ने इसे करीब 330 मिलियन डॉलर के सौदे में खरीद लिया।

लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई। फ्लिपकार्ट छोड़ने के बाद बंसल ने 2016 में Cure.fit की शुरुआत की, जिसने फिटनेस और हेल्थ टेक के क्षेत्र में बड़ा नाम बनाया और 2021 में इसकी वैल्यूएशन करीब 1.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई।

इसके बाद टाटा डिजिटल, मेराकी लैब्स और अब नूरिक्स एआई जैसे पड़ाव उनकी उद्यमशीलता की यात्रा का हिस्सा बने। नूरिक्स एआई ने 2024 में एक्सेल और जनरल कैटालिस्ट की अधिग्रहण में 27.5 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई।

यानी मुकेश बंसल की कहानी सिर्फ करोड़ों की संपत्ति की कहानी नहीं है। यह मेहनत, लगन, जोखिम उठाने, असफलताओं से सीखने और बार-बार खुद को नए सिरे से साबित करने की कहानी है।

हरिद्वार से आईआईटी कानपुर तक पहुंचने का सपना

मुकेश बंसल का जन्म हरिद्वार में हुआ, जिन्होंने पढ़ाई के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी को अपना क्षेत्र बनाया और आगे चलकर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक आईआईटी कानपुर में कंप्यूटर साइंस की की पढ़ाई की।

आईआईटी से निकलने के बाद उन्होंने सीधे अपना स्टार्टअप शुरू नहीं किया बल्कि पहले टेक्नोलॉजी और बिजनेस की दुनिया को समझने के लिए काम किया, जिसमें उन्होंने अमेरिका में डेलॉइट के साथ काम किया और सिलिकॉन वैली के कई स्टार्टअप्स में भी अनुभव हासिल किया।

यही अनुभव आगे चलकर उनके उद्यमी सफर की नींव बना। फोर्ब्स इंडिया के अनुसार, मिंत्रा शुरू करने से पहले बंसल सिलिकॉन वैली की कई स्टार्टअप कंपनियों में काम कर चुके थे और वहीं से उन्होंने टेक बिजनेस को समझने का अनुभव हासिल किया।

यहीं से सीखा बिजनेस का असली खेल

नौकरी के दौरान बंसल ने सिर्फ अपनी टेक्निकल स्किल्स पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि टेक्नोलॉजी को किसी वास्तविक समस्या के समाधान में कैसे बदला जा सकता है और यही सोच बाद में भारत लौटने के उनके फैसले में दिखाई दी।

आसान नहीं रही मिंत्रा की शुरुआत

साल 2007 में मुकेश बैसाख ने आशुतोष लवानिया और विनीत सक्सेना के साथ मिंत्रा की शुरुआत की। शुरुआत में कंपनी का फोकस पर्सनलाइज्ड गिफ्टिंग देने पर था। फिर बाद में मिंत्रा ने अपना बिजनेस मॉडल बदलाव और फैशन और लाइफस्टाइल ई-कॉमर्स की दिशा में आगे बढ़ाया।

उस समय भारत में ऑनलाइन शॉपिंग आज की तरह आम नहीं थी। इंटरनेट यूजर्स की संख्या सीमित थी और लोगों को ऑनलाइन कपड़े खरीदने के लिए तैयार करना अपने आप में बड़ी चुनौती थी लेकिन बंसल ने इसी चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश की।

उनका फोकस सिर्फ वेबसाइट बनाने पर नहीं था, बल्कि ऐसा ऑनलाइन फैशन इकोसिस्टम तैयार करने पर था जिसमें ग्राहक भरोसे के साथ खरीदारी कर सके। आखिरकार बंसल की मेहनत रंग लाई और मिंत्रा एक बड़ी कंपनी बन गई, जो भारत के प्रमुख ऑनलाइन फैशन प्लेटफॉर्म में शामिल हो गई।

2014 में फ्लिपकार्ट ने मिंत्रा का अधिग्रहण किया, जिसमें इस सौदे की वैल्यू करीब 330 मिलियन डॉलर बताई गई थी। अधिग्रहण के बाद भी मिंत्रा को अलग ब्रांड के रूप में आगे बढ़ाया गया और मुकेश बंसल ने फ्लिपकार्ट में महत्वपूर्ण नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली, जो उनके करियर की पहली बड़ी सफलता थी।

लेकिन असली परीक्षा इसके बाद आने वाली थी क्योंकि मिंत्रा बेचने के बाद भी मुकेश बंसल नहीं रुके, जबकि उनकी जगह दूसरे लोग एक कंपनी बनाने और उसे सफलतापूर्वक बेचने के बाद उसी सफलता का फायदा उठाकर आराम कर सकते थे। मगर मुकेश बंसल ने ऐसा नहीं किया।

फ्लिपकार्ट में काम करने के बाद उन्होंने कंपनी से अलग होने का फैसला लिया। उनके लिए यह एक तरह से फिर से शून्य से शुरुआत करने जैसा था। लेकिन यही उनकी कहानी का सबसे बड़ा सबक है, जो उनका सफलता मिलने के बाद भी नई चुनौती स्वीकार करने का साहस दिखाता है।

फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक, फ्लिपकार्ट से पहले ही बंसल ने मिंत्रा को शुरू करने के लिए अपनी सिलिकॉन वैली की नौकरी और अनुभव को पीछे छोड़ा था। मिंत्रा के अधिग्रहण के बाद वह फ्लिपकार्ट की लीडरशिप में शामिल हुए, लेकिन करीब दो साल बाद उन्होंने कंपनी से अलग होने का फैसला किया।

2016 में Cure.fit के साथ शुरू किया नया सफर

2016 में मुकेश बंसल ने अंकित नागोरी के साथ Cure.fit की शुरुआत की। यहां उन्होंने ई-कॉमर्स के बजाय हेल्थ और फिटनेस को चुना। कंपनी ने फिटनेस सेंटर, डिजिटल फिटनेस, न्यूट्रिशन और वेलनेस जैसे क्षेत्रों को एक इकोसिस्टम में जोड़ने की कोशिश की। आगे बढ़ते हुए इसके तहत कल्ट.फिट और ईट.फिट जैसे ब्रांड और सेवाएं भी चर्चा में आए।

एक सफल फैशन स्टार्टअप बनाने के बाद बंसल ने बिल्कुल अलग इंडस्ट्री में कदम रखा। यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन उनकी पिछली सफलता का सबसे बड़ा फायदा यहां दिखाई दिया, उन्हें स्टार्टअप बनाने और स्केल करने का अनुभव था।

Cure.fit पहुंची 1.5 अरब डॉलर की वैल्यूएशन तक

मुकेश बंसल की मेहनत और टीम के प्रयासों से Cure.fit तेजी से बढ़ी और 2021 में जोमाटो के नेतृत्व में करीब 145 मिलियन डॉलर की फंडिंग के बाद Cure.fit की वैल्यूएशन करीब 1.5 अरब डॉलर बताई गई थी।

उसी साल टाटा डिजिटल ने क्योरफिट में 75 मिलियन डॉलर तक निवेश करने की घोषणा की और इसी समझौते के तहत मुकेश बंसल टाटा डिजिटल में प्रेसिडेंट के रूप में शामिल हुए और क्योरफिट में भी अपनी नेतृत्व भूमिका जारी रखी, जो उनके करियर का एक और बड़ा मुकाम था।

खुद कंपनी बनाने से आगे बढ़कर दूसरों को बनाया

मुकेश बंसल कीउ द्यमी यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव मेराकी लैब्स है, जिसकी शुरुआत उन्होंने 2020 में एक स्टार्टअप स्टूडियो के तौर पर की थी। इसका उद्देश्य सिर्फ खुद कंपनी बनाना नहीं था, बल्कि नए स्टार्टअप्स और फाउंडर्स को सपोर्ट करना था।

उनका इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो भी इसी सोच को दिखाता है। ग्रो की आधिकारिक जर्नी के अनुसार, उसके शुरुआती इनवेस्टर्स में क्योरफिट के फाउंडर मुकेश बंसल और अंकित नागोरी भी शामिल थे। यानी बंसल खुद एंटरप्रेन्योर बनने के साथ-साथ अगली पीढ़ी के एंटरप्रेन्योर्स को भी सपोर्ट करने लगे।

अब AI की दुनिया में लाए नई चुनौती

काफी लोगों को लगा की मिंत्रा और क्योरफिट के बाद मुकेश बंसल का उद्यमशीलता का सफर पूरा हो गया, तो नूरिक्स एआई (Nurix AI) ने इस सोच को गलत साबित कर दिया। 2024 में बंसल ने नूरिक्स एआई की शुरुआत की। कंपनी एंटरप्राइसेस के लिए एआई सॉल्यूसन्स और एआई एजेंट्स पर काम कर रही है। नूरिक्स का लक्ष्य कंपनियों के वर्कफ्लो और कस्टमर इंट्रेक्शन में एआई को शामिल करना है।

Nurix AI को मिले 27.5 मिलियन डॉलर

सितंबर 2024 में नूरिक्स एआई ने 27.5 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई। इस फंडिंग राउंड की हिस्सेदारी एक्सेल और जनरल कैटलिस्ट ने हासिल की थी। मेराकी लैब्स ने भी इसमें हिस्सा लिया। यह बताता है कि इंजीनियरों का भरोसा बंसल के नए वेंचर पर भी बना हुआ है।

करोड़ों की दौलत से ज्यादा बड़ी है सीख

मुकेश बंसल की नेट वर्थ को लेकर अलग-अलग ऑनलाइन रिपोर्टों में करीब 4,200 करोड़ का अनुमान मिलता है। हालांकि यह आंकड़ा स्वतंत्र रूप से ऑडिटिड या आधिकारिक तौर पर घोषित व्यक्तिगत नेट वर्थ नहीं है, इसलिए इसे अनुमान के तौर पर ही देखना चाहिए।

युवाओं के लिए मुकेश बंसल की कहानी का सबसे बड़ा सबक

मुकेश बंसल की कहानी उन युवाओं के लिए खास है जो मानते हैं कि करियर में एक बार सफलता मिल जाने के बाद ही जिंदगी सेट हो जाती है। उनकी ये लंबी यात्रा बताती है कि सफलता मंजिल से ज्यादा एक प्लेटफॉर्म है, जहां से अगली चुनौती शुरू की जा सकती है।

आईआईटी कानपुर से निकलना उनकी पहली बड़ी उपलब्धि थी, जिसके बाद सिलिकॉन वैली का अनुभव दूसरी, मिंत्रा को बनाना तीसरी और उसे फ्लिपकार्ट को बेचना चौथी। फिर क्योर फिट को बनाना और उसे अरबों डॉलर की वेल्यूएशन तक पहुंचाना एक और बड़ी उपलब्धि थी। इतने सब के बाद भी उन्होंने खुद को एक ही पहचान में सीमित नहीं किया।

आज वह AI जैसे तेजी से बदलते क्षेत्र में नूरिक्स एआई के साथ नई कहानी लिख रहे हैं। यही शायद उनकी सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है, सफलता मिलने के बाद रुकना नहीं, बल्कि हर बार खुद को फिर से साबित करने की तैयारी रखना।