राजस्थान के कोटा में हर साल हजारों छात्र आईआईटी में प्रवेश का सपना लेकर पहुंचते हैं लेकिन इस बार एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसमें सिर्फ बेटे ने ही नहीं बल्कि उसकी मां ने भी इस संघर्ष को जिया। बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले छात्र गुंजा ने खराब आंखों की रोशनी, गंभीर बीमारी और महीनों की पढ़ाई छूटने जैसी चुनौतियों के बावजूद जेईई एडवांस्ड में सफलता हासिल की। इस सफर में उनकी मां गुंजा ने जो किया, वह हर अभिभावक के लिए मिसाल बन गया।
बेटे की आंखों की परेशानी बनी मां की जिम्मेदारी
गुंजा 2023 में जेईई एडवांस्ड की तैयारी के लिए सीतामढ़ी से कोटा पहुंचे थे। उनकी आंखों का नंबर 9.5 है, जिसकी वजह से लंबे समय तक पढ़ाई करना उनके लिए पहले से ही मुश्किल था। ऑनलाइन क्लास के दौरान भी उन्हें दिक्कत होती थी। ऐसे में उनकी मां गुंजा ने खुद क्लास में बैठना शुरू कर दिया ताकि कोई भी महत्वपूर्ण टॉपिक छूट न जाए।
ह्यूमैनिटीज की छात्रा ने सीखी फिजिक्स और मैथ्स
गुंजा बी.एड. डिग्रीधारी हैं और उनका शैक्षणिक विषय ह्यूमैनिटीज रहा है। उन्होंने वर्षों से फिजिक्स और गणित नहीं पढ़ी थी। इसके बावजूद उन्होंने जेईई स्तर की ऑनलाइन क्लास अटेंड करनी शुरू की और जो भी कॉन्सेप्ट समझ में नहीं आता, उसे शिक्षक से दोबारा समझतीं और फिर विस्तार से नोट्स तैयार करतीं।
बीमारी ने रोक दी पढ़ाई
जेईई परीक्षा से कुछ महीने पहले गुंजा ने भारी सामान उठाया, जिसके बाद उन्हें न्यूमोथोरैक्स (Collapsed Lung) की समस्या हो गई। इस वजह से उन्हें करीब तीन महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इस दौरान उनकी प्राथमिकता पढ़ाई नहीं बल्कि इलाज और रिकवरी बन गई।
मां ने रोज बनाया पढ़ाई का पूरा रिकॉर्ड
जब गुंजा क्लास नहीं कर पा रहे थे, तब उनकी मां रोज समय से ऑनलाइन क्लास में शामिल होतीं। पूरे लेक्चर के दौरान नोट्स बनातीं और शाम को उन्हें व्यवस्थित तरीके से दोबारा लिखतीं ताकि बेटा ठीक होने के बाद सीधे पढ़ाई शुरू कर सके।
फिजिक्स और मैथ्स उनके लिए सबसे कठिन विषय थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कई बार एक ही विषय को बार-बार समझकर नोट्स तैयार किए ताकि कोई गलती न रह जाए।
बेटे ने कहा- मेरी सफलता में मां की बराबर हिस्सेदारी
गुंजा का कहना है कि जब वह बीमारी की वजह से पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे, तब उनकी मां ने जो किया, उसे वह कभी नहीं भूल सकते। उनके अनुसार, मां ने क्लास अटेंड की, नोट्स बनाए और उनकी पढ़ाई को रुकने नहीं दिया। आज जो भी सफलता मिली है, उसमें उनकी मां की उतनी ही भागीदारी है जितनी उनकी खुद की।
IIT Delhi का सपना नहीं छोड़ा
गुंजा बताते हैं कि बीमारी के दौरान भी उनके मन से आईआईटी दिल्ली में पढ़ने का सपना कभी नहीं गया। मां का लगातार साथ और भरोसा उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाता रहा। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने छूटी हुई पढ़ाई को धीरे-धीरे पूरा किया और लगातार मेहनत जारी रखी।
कोटा को लेकर मां की राय
गुंजा का मानना है कि कोटा का कोचिंग सिस्टम अनुशासित और संसाधनों से भरपूर है। यहां अनुभवी शिक्षक छात्रों को बेहतर दिशा देते हैं। लेकिन इसके साथ ही उनका कहना है कि छात्रों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि परिवार का भावनात्मक सहयोग भी उतना ही जरूरी है। अत्यधिक दबाव के बीच यही सहयोग उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखता है।
अन्य अभिभावकों के लिए संदेश
गुंजा कहते हैं कि बच्चों की जिंदगी में सिर्फ अंक और रैंक ही सब कुछ नहीं होते क्योंकि कई बार माता-पिता का साथ, भरोसा और हौसला ही बच्चे की सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।
आखिरकार मिली मेहनत की सफलता
10 जून को जेईई एडवांस्ड का परिणाम घोषित हुआ और गुंजा ने आईआईटी में प्रवेश का सपना पूरा कर लिया। यह सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं थी, बल्कि उस मां के समर्पण की भी जीत थी, जिसने अपने बेटे के लिए खुद दोबारा छात्र बनने का फैसला किया।
