देश में एक लाख से अधिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां पर पढ़ाने के लिए केवल एक शिक्षक ही मौजूद है। शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को देश में स्कूली शिक्षा पर ‘यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन प्लस 2025-26’ पर एक रिपोर्ट जारी की। हालांकि, पिछले वर्ष के मुकाबले इसमें सुधार दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025-26 में प्रारंभिक और माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर में गिरावट आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025-26 देश में 1,00,843 विद्यालय केवल एक ही शिक्षक जिम्मे चल रहे हैं। हालांकि, वर्ष 2024-26 में यह संख्या 1,04,125 थी। यानी इसमें सुधार हुआ है। वहीं, शून्य नामांकन वाले स्कूल की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025-26 में 5,663 स्कूल ऐसे थे जिनमें शून्य नामांकन हुई। वर्ष 2024-26 में यह संख्या 7,993 थी।

रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 की तुलना में 2025-26 के दौरान शिक्षकों की संख्या में 8.3 फीसद की वृद्धि हुई है। मंत्रालय ने कहा कि शिक्षकों की संख्या में यह वृद्धि छात्र-शिक्षक अनुपात को बेहतर बनाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षकों की उपलब्धता में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। 2025-26 में महिला शिक्षकों की भागीदारी में भी वृद्धि हुई है। अब कुल शिक्षकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 54.9 फीसद है। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में स्कूलों में महिलाओं की भागीदारी में सकारात्मक रुझान देखा गया है, जिसमें लड़कियों का नामांकन 48.4 फीसद तक पहुंच गया है।

यह सुधार शिक्षा में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और सभी स्तरों पर लड़कियों की बेहतर पहुंच और भागीदारी सुनिश्चित करने के चल रहे प्रयासों को दर्शाता है। केंद्र की स्कूल रिपोर्ट कार्ड में चंडीगढ़ सबसे ऊपर : केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा के लिए हालिया ‘परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स’ (पीजीआइ) 2.0 में चंडीगढ़ सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य/केंद्र शासित प्रदेश बनकर उभरा है। पंजाब, केरल और दिल्ली को दूसरे सबसे ऊंचे प्रदर्शन में रखा गया है। मंत्रालय ने देश भर में स्कूली शिक्षा के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह रिपोर्ट जारी की।

यह रिपोर्ट मूल्यांकन छह क्षेत्रों (सीखने के नतीजों, पहुंच, बुनियादी ढांचे और सुविधाओं, समानता, गवर्नेंस प्रक्रियाओं और शिक्षक शिक्षा व प्रशिक्षण) से जुड़े 70 पैमानों पर आधारित है। मंत्रालय के अनुसार, भारत में 14.67 लाख से अधिक स्कूल, 1.03 करोड़ शिक्षक और लगभग 24.72 करोड़ विद्यार्थी हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े स्कूली शिक्षा तंत्र में से एक बनाता है।

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