शिक्षा मंत्रालय ने क्लासिकल असमिया, बंगाली, पाली, मराठी और प्राकृत की पढ़ाई के लिए पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने को मंजूरी दे दी है। अधिकारियों ने शनिवार को ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पांच सेंटर को इन क्लासिकल भाषाओं की एकेडमिक रिसर्च, डिजिटाइज़ेशन, बचाव और विरासत को फैलाने के लिए मजबूत किया जाएगा।
ओडिशा के मुख्यमंत्री ने की तारीफ
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने X पर एक पोस्ट में कहा, “ओडिशा के लिए यह गर्व का पल है और भारत की समृद्ध भाषाई विरासत को बचाने की दिशा में एक अहम कदम है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा ओडिशा सेंट्रल यूनिवर्सिटी में क्लासिकल पाली के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंज़ूरी देने से पाली की पढ़ाई, बचाव और प्रमोशन को मज़बूती मिलेगी, जो भारत की बौद्धिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी भाषा है।”
सीएम मोहन माझी ने आगे कहा, “यह सेंटर भारत के सभ्यता के ज्ञान और भाषाई विरासत को बचाने में ओडिशा के योगदान को और मजबूत करेगा। ओडिशा सेंट्रल यूनिवर्सिटी और इस अहम पहल से जुड़े सभी लोगों को मेरी बधाई।”
कहां बनाए जाएंगे केंद्र?
जिन पांच यूनिवर्सिटी में सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे, उनमें तेजपुर यूनिवर्सिटी में असमिया, विश्व भारती यूनिवर्सिटी में बंगाली, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओडिशा में पाली, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ गुजरात में प्राकृत, डेक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट पुणे में मराठी शामिल हैं।
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एकेडमिक ईयर 2026-27 के लिए कक्षा 10वीं के पासिंग क्राइटेरिया को स्टूडेंट और पैरेंट्स में जो भ्रम की स्थिति बनी हुई थी उसे दूर करने का काम किया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 के छात्रों के लिए पास होने के नियमों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले साल जो क्राइटेरिया था इस साल भी वहीं लागू होगा। बोर्ड के पासिंग क्राइटेरिया के मुताबिक, किसी विषय में पास होने के लिए छात्र को इंटरनल असेसमेंट और एक्सटर्नल एग्जाम (प्रैक्टिकल और थ्योरी) के कुल अंकों को मिलाकर कम से कम 33 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे।
