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”मैनेजमेंट गुरू” भी हैं बजरंग बली, जानिए कैसे उनसे सीख सकते हैं जीवन प्रबंधन के गुर

हनुमान जी से मैनेजमेंट के छात्र डेडिकेशन यानी किसी निश्चित लक्ष्य के प्रति अंतिम समय तक अपना समर्पण बनाए रखना सीख सकते हैं। बजरंगबली ने आजीवन ब्रह्राचर्य का पालन किया है। ब्रह्राचर्य के प्रति उनके समर्पण के आगे कामदेव भी नतमस्तक थे।

हनुमान जी।

कॉलेजों में दाखिले का दौर चल रहा है और अलग-अलग विषयों में दाखिले के लिए छात्र अपनी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। मैनेजमेंट यानी प्रबंधन एक ऐसा विषय है जिसमें हर साल छात्र दाखिले के लिए जमकर माथापच्ची करते हैं। प्रबंधन के क्षेत्र में संभावनाएं तलाशने वाले छात्रों में कुछ अहम गुणों का होना बेहद ही जरूरी है। पढ़ाई के बाद यह विशेष गुण छात्रों को उनके करियर में सफलता दिलाने में काफी कारगर हैं। इन स्किल्स को जानने और सीखने के लिए प्रबंधन के छात्र भगवान हनुमान के जीवन से भी प्रेरणा ले सकते हैं। जानते हैं बजरंगबली से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जिनसे ‘मैनेजमेंट’ के छात्र प्रबंधन के गुर सीख सकते हैं।

डेडिकेशन : हनुमान जी से मैनेजमेंट के छात्र डेडिकेशन यानी किसी निश्चित लक्ष्य के प्रति अंतिम समय तक अपना समर्पण बनाए रखना सीख सकते हैं। बजरंगबली ने आजीवन ब्रह्राचर्य का पालन किया है। ब्रह्राचर्य के प्रति उनके समर्पण के आगे कामदेव भी नतमस्तक थे। हालांकि कहा जाता है कि हनुमान जी ने अपने गुरू भगवान सूर्यदेव के आदेश पर विवाह किया था।

प्रजेंस ऑफ माइंड : परम प्रतापी और परम बलशाली हनुमान जी के प्रजेंस ऑफ माइंड से प्रबंधन के छात्र काफी कुछ सिख सकते हैं। कहानियों में इस बात का जिक्र किया जाता है कि समुद्र पार करते समय सुरसा ने जब बजरंगबली का रास्ता रोका तो हनुमान जी ने बिना समय गंवाए अपने शरीर का आकार बड़ा किया और फिर बड़ी ही कुशलता के साथ अपने शरीर को छोटा कर वो सुरसा के मुंह के अंदर गए और फिर बाहर भी आ गए। हनुमान जी ने सुरसा की चुनौती को स्वीकार भी किया और अपने बुद्धिबल के जरिए इस चुनौती को पार भी किया।

कम्यूनिकेशन स्किल : प्रबंधन के छात्रों के लिए कम्यूनिकेशन स्किल का काफी महत्व है। युगों पहले हनुमान जी ने अपने संवाद कौशल का परिचय रावण की ‘अशोक वाटिका’ में सीता जी से पहली मुलाकात के दौरान दिया। सीता जी श्री राम भक्त हनुमान को नहीं पहचानती थीं, लेकिन हनुमान जी ने अपने वाक्-कौशल का परिचय देकर सीता जी को भरोसा जीता।

हालात भांप कर कदम उठाना : प्रबंधन के छात्रों को सिचुएशन के मुताबिक ही चलना होता है। उसी तरह जिस तरह सीता जी से मिलने के वक्त हनुमान ने खुद को लघु रूप में रखा परन्तु संहारक रुप में आते ही उन्होंने रौद्र रुप अपनाया और हालात देखकर कदम उठाए।

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